688
जय श्री कृष्ण 🚩
उन ४६ तीर्थों के नाम, श्रीमद्भागवत के अनुसार।
Names of the 46 Teertha-s as per Śrīmadbhāgawat Purāṇa
२/२
मीराबाई कहती हैं नश्वर पति क्यों चुनूँ?
मैं तो गोपाल को वरूँ, जिनसे जुड़कर चूड़ियाँ भी अमर हो जाती हैं। 🥹
परमात्मा ने सबको समान मन दिया है, यह मन पाप या विषयों के लिए नहीं, बल्कि पवित्र विचार और ईश्वर ध्यान के लिए दिया गया है।
Читать полностью…
ईश्वर की उपासना से असंभव भी संभव हो जाता है।
उसकी कृपा से मूर्ख भी विद्वान बन सकता है।
भक्ति का जन्म द्रविड़ क्षेत्र में हुआ। कलियुग में भी कावेरी, ताम्रपर्णी, महानदी, पयस्विनी आदि के तट पर ही अधिक भक्त मिलते हैं।
Bhakti originated in Draviḍa region. Even in Kaliyuga, large number of devotees are found on banks of Kāverī, Tāmraparṇī, Mahānadi, Payaswinī, etc.
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् ।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ।।
श्रीभगवान् बोले- मैंने इस अविनाशी योगको सूर्यसे कहा था, सूर्यने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा। हे परंतप अर्जुन। इस प्रकार परम्परासे प्राप्त इस योगको राजर्षियोंने जाना, किंतु उसके बाद वह योग बहुत कालसे इस पृथ्वीलोक में लुप्तप्राय हो गया।
१/२
📜 10 Karma Laws from Garuda Purana EVERYONE should know (Undeniable) 👇
➔ What happens if these 10 Warnings IGNORED ?
1. Insulting teacher ➔ Diseased rebirth
“यो गुरुमवमन्येत स अपस्मारी भवति।” Ref: Ch.5, v.7
2. Stealing others Work/Books ➔ Vision Loss
“ग्रन्थचौरः अन्धो भवति।” Ref: Ch.5, v.8
3. Despising scriptures ➔ Sickness
“वेदशास्त्रनिन्दकः कामला भवति।” Ref: Ch.5, v.7
4. Killing cow ➔ Deformed rebirth
“गोघ्नो कूब्जो भवति।” Ref: Ch.5, v.3
5. False witness ➔ Dumb rebirth
“यो मिथ्यासाक्ष्यं ददाति स मूकः जायते।” Ref: Ch.5, v.8
6. Wrongdoing ➔ Fall from misery to misery
“ये दुष्कृतिनः सदा… नरकान्नरकं यान्ति भयाद्भयम्।”Ref: Ch.4, v.2
7. Harming Others ➔ Hell-path
“ब्राह्मणहन्तारो… स्तेनाः… विश्वासघातिनः…” Ref: Ch.4, v.5-12
8. Illicit relations → Loss of vitality
“यो व्यभिचारं करोति स क्लिबः जायते।” Ref: Ch.5, v.4
9. Greedy / Not Sharing → Illness
“यो मधुरं भुङ्क्ते न ददाति स गलगण्डी।” Ref: Ch.5, v.6
10. Karma always follows you ➔ Yes ALWAYS
“यथा वत्सो मातरं विन्दति तथा कर्मानुगच्छति।” Ref: GP 2.42.1
This form of Yours bewilders me, because although fear personified fears You, You Yourself are afraid of Your mother ❣️
Читать полностью…
राम नाम के जप मे कोई नियम नही है
न देशकालनियमः शौचाशौचविनिर्णयः ।
परं संकीर्तनादेव राम रामेति मुच्यते ॥
राम नाम के जप मे न देश काल का नियम है, और न ही पवित्रता अपवित्रता का नियम है। किसी भी अवस्था मे राम नाम का संकीर्तन करने मात्र से जीव मुक्त हो जाता है।
माँ लक्ष्मी पंचामृत अभिषेक दर्शन मात्र से कल्याण होता है 🌺
Читать полностью…
जलमय तीर्थ और देव प्रतिमाओं का तो बहुत सेवन करने से मनुष्य पवित्र होता है परन्तु संत पुरुष तो दर्शन मात्र से ही पवित्र कर देते हैं।
A person becomes pure only after spending considerable time at tīrtha-s and worshipping deva pratimā-s, but saints purify just by their darśana.
संसारियों के हृदय में सकल लिंगस्वरूप साक्षात परमेश्वर (सूक्ष्म लिंग) का वास है, ऐसा ज्ञान जिसको हो गया है, उसको प्रतिमा (स्थूल लिंग) आदि से क्या प्रयोजन!
सगुण से ही निर्गुण की प्राप्ति होती है। इस प्रकार सभी देवताओं की प्रतिमाएँ उन देवों में विश्वास उत्पन्न करने के लिए होती है।
ज्ञान से हीन (परब्रह्म परमेश्वर के ज्ञान से हीन) प्राणी के लिए शुभ प्रतिमा की कल्पना की गई है, क्योंकि ऊँचे स्थान पर चढ़ने के लिए आलंबन आवश्यक है।
बिना ज्ञान प्राप्त किए ही जो प्रतिमा का पूजन छोड़ देता है, उसका निश्चित ही पतन होता है।
श्रीशिवमहापुराण 🌺🙏🏻🚩
अंतर्यामी नारायण स्वयं प्रकाशमय हैं, जीव के पाप-पुण्य, हँसी-रोने से वे अप्रभावित रहते हैं, जैसे दीपक सबको समान प्रकाश देता है।
Читать полностью…
मन को कंट्रोल कैसे किया जाये
हरे कृष्ण ❤️🌺🚩
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य - यह तीनों देव, ऋषि और पितृ ऋण के साथ ही जन्म लेते हैं। इन ऋणों को चुकाने के लिए…
Brāhmaṇa-s, Kṣatriya-s, and Vaiśya-s are born with debts to Devatā-s, sages, and ancestors. To repay these debts…
१/२
रोमहर्षण जी के वध के पश्चात् भगवान बलराम जी ने भारत के ४६ तीर्थों की यात्रा करी। इनमें से ८ का स्थान स्पष्ट नहीं है।
46 Teertha-s visited by Bhagwāna Balarāma ji after killing Romaharṣaṇa ji. Location of 8 of these is not clear.
१/२
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥
भगवती 🙏
जगत् उसका कार्य है, वह उसका कारण है।
कार्य नष्ट हो जाए, कारण कभी नष्ट नहीं होता।
सृष्टि बने, रहे या नष्ट हो जाए, परमात्मा में कोई क्षय नहीं होता। वही अव्यय है, सदा पूर्ण।
तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझको कहा है; क्योंकि यह बड़ा ही उत्तम रहस्य है अर्थात् गुप्त रखने योग्य विषय है।
२/२
⚠️ Remember this from Garuda Purana:
"You don’t escape karma. You outgrow it."
Read before life makes you learn it.
दधीचि ऋषि ने धर्म रक्षा के लिए किया अस्थियां दान!
उनकी हड्डियों से 3 धनुष बने..
1-- गांडीव
2-- पिनाक
3-- सारंग
जिसमें गांडीव अर्जुन को मिला था जिसके बल कर उन्होंने महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त की ।
सारंग से राम ने युद्ध किया और रावण के अत्याचारी राज्य को ध्वस्त किया था।
और पिनाक था शिव जी के पास जिसे तपस्या के माध्यम से खुश भगवान शिव से रावण ने मांग लिया।
परन्तु वो उसका भार ज्यादा समय तक नहीं उठा पाने की वजह से बीच रास्ते जनकपुरी में छोड़ आया था,
इसी पिनाक की नित्य सेवा सीताजी किया करती थी।
पिनाक का भंजन करके ही भगवान राम ने सीता जी का वरण किया था।
ब्रह्मर्षि दधीचि की हड्डियों से ही एकाख्नि नामक वज्र भी बना था, जो इंद्र को प्राप्त हुआ।
इस एकाघ्नि वज्र को इंद्र ने कर्ण की तपस्या से खुश होकर उन्होंने कर्ण को दे दिया था। इसी एकाघ्नि से महाभारत के युद्ध में भीम का महाप्रतापी पुत्र घटोत्कच कर्ण के हाथों मारा गया था और भी कई अस्त्र - शस्त्रों का निर्माण हुआ था उनकी हड्डियों से!
दधीचि के इस अस्थि दान का एक मात्र संदेश था।
"हे भारतीय वीरों शस्त्र उठाओ और अन्यान्य तथा अत्याचार के विरुद्ध युद्ध करो !"🚩
Matsyāvatāra & Dravida Region
—
द्रविड़ देश के स्वामी राजा सत्यव्रत ने मत्स्यावतार भगवान की सेवा करी। वही इस कल्प में वैवस्वत मनु हुए।
King Satyavrata, ruler of Dravida region, served Matsyāvatāra Bhagwan. In this kalpa, he became Vaivasvata Manu.
मन विषयों का चिंतन करे तो विषयाकार बनता है और नारायण का चिंतन करे तो नारायणाकार,
मन जैसा होगा, दर्शन वैसा होगा।
श्रीकृष्ण द्वारका में विराजमान थे, फिर भी गोपियों को गोकुल में दीखते थे क्योंकि उनका मन पूर्णतः श्रीकृष्णाकार हो चुका था।
Читать полностью…
The Hidden Science of Breath
How to Shape Your Reality?
With each conscious breath, you are not just inhaling air
you are shaping your mind
your energy, and the reality around you.
कनकमहामणिभूषितलिङ्गं
फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥
महादेव 🙏
श्रीकृष्ण ने शास्त्र नहीं पढ़ाया, साक्षात् अनुभव करा दिया कि सब कुछ वही हैं।
Читать полностью…
…यज्ञ, अध्ययन और पुत्र उत्पन्न करना इनका कर्तव्य है। ऐसा न करने पर यह पतित हो जाते हैं।
...performing yajna-s, studying, and begetting sons is their essential duty. Failure to do so leads to their downfall.
२/२
भगवान् को लगाए जाने वाले 56 भोग व्यंजनों की सूची-
Читать полностью…