688
जय श्री कृष्ण 🚩
भगवान श्रीकृष्ण के पालनकर्ता नन्द बाबा और वृंदावन के गोप (जो गाय पालते थे) वैश्य वर्ण में गिने जाते थे।
Nanda Bābā and his Gopa people (who kept cows for a living) were categorised as Vaiśya Varṇa.
🔴शिव ध्यान🔴
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः
सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं
पूजा ते विषयोपभोगरचना
निद्रा समाधिस्थितिः ।
संचारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः
स्तोत्राणि सर्वा गिरो
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं
शम्भो तवाराधनम् ॥
प्रभो! आप ही मेरी आत्मा हैं, भगवती गिरिजा मेरी मति (बुद्धि) हैं। मेरे प्राण आपके सहचर हैं और यह शरीर आपका गृह मन्दिर है। आप द्वारा प्रदत्त विषय और उनका उपभोग आपकी पूजा है। मेरी निद्रावस्था ही आपकी समाधि (ध्यान) है। मेरा पाद-संचरण (भ्रमण) ही आपकी परिक्रमा है। मेरे शब्द (बातचीत और लेखन) आपके स्तोत्र पाठ (स्तुति - प्रार्थना) हैं। शम्भो ! मेरे द्वारा जो कुछ भी सम्पादित हो रहा है, वह सब आपकी ही आराधना है।
इस श्लोक को बस पढ़ना नहीं है मन में आत्मसात करें विश्वास करें ये भाव बहुत संतुष्टि देने वाला होगा।
Śrī Rāma, together with his younger brother and in his physical form, entered his own Vaiṣṇava divine effulgence. Then the gods, the Sādhyas and the Maruts, along with Indra and led by Agni, worshipped that deity who had entered the tejas.
— Vālmīki Rāmāyaṇa (7.110.10-11)
भगवान् श्री राम के पितामह और महाराज दशरथ के पिता महाराज अज
Читать полностью…
बृहस्पतिर्मन्त्रविद्धि जजाप च जुहाव च।
एवं स्कन्दस्य महिषीं देवसेनां विदुर्जनाः ॥
षष्ठयां ब्राह्मणाः प्राद्दुर्लक्ष्मीमाशां सुखप्रदाम् ।
सिनीवालीं कुहूं चैव सद्वृत्तिमपराजिताम् ॥
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
१/२
दूसरे की पत्नी के मुख, नितम्ब तथा स्तनों को कामभाव से देखने पर चार युगों तक नरक में रहना पड़ता है।
Ogling or staring at face, hips or breasts of another’s wife results in a man being condemned to hell for four yuga-s.
ऐसे बना जाता है विश्वगुरु-
चीन हर साल १० हजार मेधावी विद्यार्थियों को विद्यालयों से चुनकर ओलंपियाड आदि अंतरराष्ट्रीय गणित-विज्ञान प्रतियोगिताओं की तैयारी करवाता है । ये भविष्य के टेक लीडर बनते हैं।
आज के भारत में अपनी मेधा को हतोत्साहित कर कुंठित करने का अभियान चल रहा है ।
बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची॥
प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू॥
मातृत्व का सर्वोच्च आदर्श माता कौशल्या-
१/२
@Lokesh_Sarswat अब तो सैलरी देंगे मुझे?
Читать полностью…
करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा॥
जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई॥
हाथों में बाण और धनुष बहुत ही शोभा देते हैं। रूप देखते ही चराचर (जड़-चेतन) मोहित हो जाते हैं। वे सब भाई जिन गलियों में खेलते (हुए निकलते) हैं, उन गलियों के सभी स्त्री-पुरुष उनको देखकर स्नेह से शिथिल हो जाते हैं अथवा ठिठककर रह जाते हैं।
नारायण ! हे रघुनन्दन, यह जगत दृश्य है और आप द्रष्टा हैं । आप ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के नियामक हैं । जब ये त्रिदेव आपका मर्म नहीं जानते तो और कोई क्या जानेगा !
Читать полностью…
एक वर्ष तक मिट्टी के बर्तन से पानी पीने, नवमी को व्रत करने और अंत में मूंगा दान करने से होंठ पके बिम्बफल जैसे लाल हो जाते हैं।
Drinking water out of clay cups for a year, observing fast on navami & donating coral at end, helps virtuous woman’s lips turn red like a bimba fruit.
त्रय्या चोपनिषद्भिश्च साङ्ख्ययोगैश्च सात्वतैः ।
उपगीयमानमाहात्म्यं हरिं सामन्यतात्मजम् ॥
- श्रीमद्भागवतपुराणम्, १०.८.४५
Within an indivisible, blissful, infinite mass of divine radiance (nirākāra Brahman) belonging to Lord Viṣṇu, the magnificent, supreme Śrī Vaikuṇṭha, the abode of Śrī Mahāviṣṇu, shines.
— Tripād-vibhūti Mahānārāyaṇa Upaniṣad (1.6-11)
ममेव पौरुषं रूपं गोपिकाजनमोहनम् ।
(ललितोपाख्यान)
Maa Gauri’s depiction in Bengali lithographic painting. Did you see anything different?
Читать полностью…
राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा॥Читать полностью…
नामु त भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं॥
जगत में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे तात! तुमसे न हो सके। श्री राम जी के कार्य के लिए ही तो तुम्हारा अवतार हुआ है। यह सुनते ही हनुमान जी पर्वत के आकार के (अत्यंत विशालकाय) हो गए॥
२/२
ज्ञान से नहीं, बालक भाव से भगवान् जल्दी प्रसन्न होते हैं। भगवान् वस्तु नहीं, भावना देखते हैं।
Читать полностью…
भगवान् किसी भाषा के बंधन में नहीं, अपने हृदय से उनकी स्तुति करो।
Читать полностью…
हे गोसाईं! सब देव और पितर तुम्हारी वैसी ही रक्षा करें, जैसे पलकें आँखों की रक्षा करती हैं। तुम्हारे वनवास की अवधि (चौदह वर्ष) जल है, प्रियजन और कुटुम्बी मछली हैं। तुम दया की खान और धर्म की धुरी को धारण करने वाले हो॥ऐसा विचारकर वही उपाय करना, जिसमें सबके जीते जी तुम आ मिलो
२/२
ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिं जा पर तुम्ह अनुकूल।
तव प्रभावँ बड़वानलहि जारि सकइ खलु तूल॥
🙏🌻 शुभ प्रभात वंदन 💐
श्रीमन्नारायाण हरि विष्णु भगवान् के नाम से जीवन पवित्र हो 🌺
जाओ पुत्र गणेश समस्त संसार के मनुष्यों के कार्य सिद्ध करो — माँ पार्वती
Читать полностью…
भगवद्धाम के निवासी स्वयं पुरुषोत्तम आनन्दकन्द श्रीकृष्ण हैं। वे पूर्ण आनन्दघन स्वरूप हैं।
Читать полностью…