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जय श्री कृष्ण 🚩
Space on chanting of Durgasaptashati and the results.
Why mantra should never be taken from books ? The real life incidents to show the impact.
•Ḍurgasaptaśati, The chanting and the appearance of a Brahmarākṣasa.
• How Śrī Bhuvneshwari Upāsaka saved life
• How Śrī Baglāmukhi prevented mishap
• Śrī Vidhyranya Saraswati and the Brahmin who was saved from Durgasaptasati’s effects
• How a very affluent family was destroyed in front of me after the chanting of restricted grantha.
विश्वामित्र उवाच -
कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते ।
उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्त्तव्यं दैवमाह्निकम् ॥
- वाल्मीकिरामायणम्, बालकाण्डम्, २३.२
Vishvamitra -
"O noble son of Kausalya! O Rama! The eastern dawn is breaking (Sun is about to rise). Wake up, O Tiger among men! The morning's divine duties (towards gods) await you."
भगवान् श्री कृष्ण की रामभद्र लीला-
श्री हनुमान् जी के माध्यम से माता सत्यभामा, गरुड़ जी एवं श्री सुदर्शन चक्र का गर्व हरण-
२/२
प्रातः कालीन प्रथम पूज्य मंगल मूर्ति श्री गणेश जी महाराज के अद्भुत अलौकिक दिव्य दर्शन कीजिए।
जय श्री गणेश 🙏
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥🙏
If you are facing any kind of trouble or suffering from an illness, recite this chaupai daily.☀️
It is highly powerful and deeply effective.🌸
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥
वह लीला केवल भक्तों के हित के लिए ही है, क्योंकि भगवान परम कृपालु हैं और शरणागत के बड़े प्रेमी हैं। जिनकी भक्तों पर बड़ी ममता और कृपा है, जिन्होंने एक बार जिस पर कृपा कर दी, उस पर फिर कभी क्रोध नहीं किया॥
चित्र- प्रहलाद माता कयाधु एवं नारदजी
आनंद रामायण मे वार्णित कपिराज हनुमान् जी के इन बारह नामों का जो मनुष्य सोते, जागते, यात्रा अथवा गहन वन (आदि) किसी भी स्थान में पाठ करता है, उसे कभी किसी प्रकार का भय नहीं रहता एवं संग्राम में वो विजयी होता है।
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भारत में इतनी सारी हेल्थ प्रॉब्लम्स का एक कारण घर की मम्मी या हाउसवाइफ़ भी होती हैं, क्योंकि उन्हें यह बेसिक समझ ही नहीं होती कि बच्चों को क्या खिलाना चाहिए; बच्चा पूरा दिन कार्ब्स और तेल पर पल रहा है, प्रोटीन का नाम तक नहीं, पति का BP हाई है फिर भी नमक खाने में भरपूर दिया जा रहा है क्योंकि उनको पता ही नहीं आप जो खाने में एक्स्ट्रा नमक डाल रही है उसको खाकर आपके पति को निकट भविष्य में अटैक आ सकता है।
सुबह उठते ही चाय-पराठा न प्रोटीन, न फाइबर बस फैट ही फैट, पुरुष तो एक बार एक्सरसाइज भी कर लेते है लेकिन महिलाओं का तो बुरा हाल है ज़िंदगी में कभी एक्सरसाइज नहीं करती है 90% महिलाएं।
न भारतीय खाने में प्रोटीन है, न न्यूट्रिशियन, ऊपर से मिलावटी खाना, आने वाले भविष्य में सबकी फील्डिंग सेट है क्योंकि जिनको लग रहा है हम तो घर का खाते है उनको बहुत सारी डिफिशिएंसी होने वाली है या हो चुकी है।
ये माइंडसेट की घर का है तो सुरक्षित है वाली गलतफहमी, और इसी में पूरी पीढ़ी बीमार होती जा रही है।
जागो और अपने अपने घर में एक रिवोल्यूशन लाइये नहीं तो आप भी बच नहीं पाएंगे चाहे घर का ही क्यों न खाते हो जानकारी लीजिए और अच्छा खाइये।
O Rudra, You hold remedies a thousandfold,
You are the greatest physician among the gods.
You wound, yet you alone can heal.
You strike, yet you alone can restore.
None knows mercy as you do, O Terrible One.
भक्ति की अनोखी डोर: जब बांके बिहारी भक्त के पीछे चले 🔥❣️
बहुत समय पहले वृंदावन में एक निर्धन ब्राह्मण आया। उसके पास धन नहीं था, पर हृदय में भक्ति का सागर था। जैसे ही उसने बांके बिहारी जी के दर्शन किए, उसकी आँखों में बस वही छवि समा गई। करुणा से भरी मुस्कान और प्रेममय दृष्टि ने ब्राह्मण के मन को पूरी तरह मोह लिया।
दिन-ब-दिन वह मंदिर में ही बैठा, केवल अपने आराध्य को निहारता और मौन में उनसे बातें करता। उसकी भक्ति इतनी सच्ची थी कि जब विदाई का समय आया, ब्राह्मण का मन छूटने को तैयार नहीं था।
"हे प्रभु! मैं शरीर से जा रहा हूँ, पर मेरा मन आपके चरणों में ही अटका है। क्या आप मेरे साथ नहीं चलेंगे?"
इतनी सच्ची पुकार और प्रेम देखकर भगवान स्वयं ब्राह्मण के पीछे-पीछे चल दिए। अगले दिन जब पुजारी मंगला आरती के लिए आए, तो मंदिर का सिंहासन खाली था। वस्त्र और आभूषण वही थे, पर बाँके बिहारी गायब थे।
सभी भक्त और पुजारी दौड़े और देखा ब्राह्मण अपनी भक्ति में आगे बढ़ रहा है, और उसके पीछे भगवान बालक के रूप में, मुस्कुराते हुए, उसके साथ चल रहे हैं।
इस घटना ने बांके बिहारी मंदिर की अनोखी परंपरा को जन्म दिया। मंदिर में अब बार-बार पट (पर्दा) लगाया जाता है। इसका कारण यह है कि:
यदि कोई भक्त गहरे प्रेम से उन्हें निहारे, तो बिहारी जी का हृदय पिघल जाता है।
वे मूर्तिवत नहीं रहकर भक्त के साथ चल पड़ते हैं।
पर्दा केवल उस नजर को रोकने के लिए है, जो भगवान को मंदिर से ले जाने की कोशिश करती है।
सीख: बांके बिहारी केवल मूर्ति नहीं हैं। वे जीवंत हैं, भाव के भूखे हैं और सच्चे प्रेम को ही स्वीकारते हैं।
क्या आपने सोचा है कभी इतनी स्पीड से डाटा आपके फोन में बिना तार के जो आ रहा है ये सब तालाब ही तो है। आपके चारों तरफ हर कंपनी ने लाखों अपनी अपनी फ्रीक्वेंसी जो सरकार डिसाइड करती है बना रखी है सरल शब्दों में बोले तो फ्रीक्वेंसी के रास्ते बना दिये गये है अब जैसे ही आप यूट्यूब खोलेंगे तो उनकी फ्रेंवेंसी एक्टिवेट हो जाएगी और वो जो डाटा उनके सर्वर्स में पड़ा है उसको डिजिटल बना के हवा में फेक दिया फ्रीक्वेंसी में जैसे ही मोबाइल वो फ्रीक्वेंसी पकड़ेगा वीडियो चलने लगेगी। है न कमाल की चीज। आप एक तालाव में है जहाँ फ्रीक्वेंसी ही फ्रीक्वेंसी है। रेडियो लाखों की इंटरनेट की लाखों टीवी की लाखों।
इस दुनिया में आश्चर्य करने को कितना कुछ है। ब्रह्मांड तो दूर की बात है जो इंसानों ने खुद चीजें विकसित की है उनको देख के ही आपका दिमाग हिल जाएगा कि इंसान भी इतना कैसे कर सकता है।
इलेक्ट्रॉन्स की दुनिया का एक अलग ही रोमांच है। सोचिए आपके शरीर के आर पार इस समय अरबो चीजें कही दूर अंतरिक्ष से चलकर आपके आर पार होती हुई निकल रही है।
आपके मन में हमेशा wow वाला फील आना चाहिए और अपनी क्षमताओं को हमेशा पुश करते रहिए इंसान ने बहुत कुछ किया है और निकट भविष्य में बहुत कुछ करने लगेगा।
२/२
स्त्री प्रतिज्ञा करने पर भी यदि शारीरिक रूप से पूजन, व्रत आदि करने में अक्षम हो तो अपने पति द्वारा करवाए। इससे उसकी पूजा भंग नही होती। अथवा पति की आज्ञा से किसी ब्राह्मण द्वारा भी पूजन करा सकती है। इनके अतिरिक्त किसी अन्य के द्वारा कराई गई पूजा स्वीकार नहीं होती है।
(देवी पार्वती उवाच)
नमः शान्ताय घोराय मूढाय गुण धर्मिणे।
निर्विशेषाय साम्याय नमो ज्ञानघनाय च॥
गजेंद्र मोक्ष की कथा एवं स्तोत्र (१/२)
वैकुण्ठाधिपति भगवान् लक्ष्मीनारायण
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Śrī Rudra said, “O Lord, grant me another boon: that You will assume a form by which You will worship me, uphold me, and receive a boon from me; and as a result of this, You will become the most worshipful among the gods.”
— Varaha puran (73.43-44)
स्त्रोत- भगवद्लीला विशेषांक कल्याण
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भगवान् श्री कृष्ण की रामभद्र लीला-
श्री हनुमान् जी के माध्यम से माता सत्यभामा, गरुड़ जी एवं श्री सुदर्शन चक्र का गर्व हरण-
१/२
रामदूत श्री हनुमान को कोटि कोटि प्रणाम 🚩
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दोनों समाचारों को ध्यान से पढ़ो। देशी वृषभों को नपुंसक बनाएगी सरकार और विदेशी बिल गेट्स के विदेशी संकर वीर्य के केंद्र खोलेगी। दोनों स्थान पर सरकार भाजपा की ही है। जिसे लगता है कि विपक्ष हिन्दुओं के साथ है, वह दोगला है। जिसे लगता है कि सरकार हिन्दुओं के साथ है, वह महादोगला है। जिसे लगता है कि भारत स्वतन्त्र है और लोकतन्त्र भारत के हित में है, वह परमदोगला है। तुम क्या हो ?
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मनु और शतरूपा के महादानी।
बोले कृपानिधान पुनि, अति प्रसन्न मोहि जानि।
मागहु बर जोइ भाव मन, महादानि अनुमानि।।
महाशिवरात्रि क्यों मनायी जाती है?
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स्वर्भानु वध (राहु केतु का जन्म)
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दूसरे की पत्नी के मुख, नितम्ब तथा स्तनों को कामभाव से देखने पर चार युगों तक नरक में रहना पड़ता है।
Ogling or staring at face, hips or breasts of another’s wife results in a man being condemned to hell for four yuga-s.
गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् ।
रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम् ॥३६॥
- आनन्दरामायणम्, जन्मकाण्डम्, सर्गः ५ (रामरक्षा)
He who crossed the vast ocean (वारीशम्) as if it were the size of a cow's hoof (गोष्पदीकृत).
He who crushed the powerful rakshasas (राक्षसम्) as if they were tiny mosquitoes (मशकीकृत).
He who is the most precious jewel (रत्नम्) in the great garland (महामाला) of the Ramayana (रामायण).
I bow (वन्दे) to the Son of the Wind (अनिलात्मजम्).
इष्टदेवता का निर्धारण: ज्योतिषीय संकेत
इष्टदेवता का निर्धारण जितना सरल प्रतीत होता है, वास्तव में उतना सरल नहीं है। वर्तमान समय में अनेक ज्योतिषियों ने इस विषय में विभिन्न कपोलकल्पित सिद्धांत गढ़कर इस प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बना दिया है, जिससे सटीक निर्धारण कठिन हो गया है। कुछ स्वघोषित पंडितों द्वारा नवांश में भावों की कल्पना कर इष्टदेवता के निर्धारण की जो पद्धति प्रचारित की जा रही है, उसका किसी भी प्रामाणिक शास्त्र में आधार नहीं मिलता। यह आश्चर्य का विषय है कि शास्त्रसम्मत और सुलभ विधियों को त्यागकर अत्यंत अशास्त्रीय पद्धतियों को स्वीकार किया जा रहा है।
वास्तव में, इष्टदेवता के निर्धारण हेतु संबंधित भाव का सम्यक और गहन अध्ययन आवश्यक होता है। साथ ही, राशि तथा ग्रहों के कारकत्व का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए। उदाहरणार्थ, यदि किसी जातक की कुंडली में मीन राशि में स्थित बुध हो, तो वह शेषशायी भगवान विष्णु का प्रतीक माना जा सकता है, क्योंकि मीन राशि समुद्र की द्योतक है और बुध का संबंध भगवान विष्णु से माना गया है। किंतु शेषशायी भगवान विष्णु के भी विभिन्न विग्रह विद्यमान हैं — जैसे तिरुवनंतपुरम स्थित पद्मनाभ स्वामी और तिरुचिरापल्ली स्थित रंगनाथ स्वामी। इन विग्रहों में सूक्ष्म भेद है, जिसे समझने के लिए विग्रह का अध्ययन आवश्यक होता है। ध्यान दें की देवता श्री विष्णु ही हैं किंतु स्वरूप में भेद हैं।
कुछ लोग इसे निरर्थक प्रयास मान सकते हैं, किंतु यदि इष्टदेवता का यथार्थ और शुद्ध निर्धारण करना है, तो यही सूक्ष्म विवेचन अपेक्षित है। इस प्रकार के अनेक भेद हैं, जिन्हें समझना सरल नहीं है। अतः पाठकगणों से निवेदन है कि कृपया अंतरजाल पर उपलब्ध अप्रामाणिक ज्योतिषीय सामग्री के आधार पर इष्टदेवता का निर्धारण न करें, अपितु योग्य ज्योतिषीय परामर्श अवश्य लें।
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हमारे आस पास की पूरी दुनिया इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तालाब में डूबी हुई है। जैसे मछलियों को पानी दिखाई नहीं देता ऐसे ही हम मनुष्यों को इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का आभास नहीं होता। और हमे ज्ञान नहीं होता उन अधिकतर तरंगों का जो इस तालाब में उत्पन्न होती है।
हम इंसान इन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में से कुछ तरंग हो ही पकड़ पाते है जिसको विजिबल लाइट कहा जाता है। आप जो रोशनी देख रहे है जो अलग अलग रंग देख रहे है वो सब इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स ही है। ये वेव्स एक जैसी नहीं होती है सबके अलग अलग टाइप की होती है इसीलिए हमें अलग अलग रंग में दिखती है क्योंकि हर रंग की अपनी एक अलग वेव्स होती है।
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गजेंद्र मोक्ष की कथा एवं स्तोत्र (हिंदी) (२/२)
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केवल अपनी बुद्धि या तर्क को ही प्रमाण मानकर शास्त्र की अवहेलना वाला मानव मूढ़ और उद्दण्ड होता है - वह केवल प्रत्यक्ष दृश्य जगत् को ही मानता है।
He who ignores śāstra-s & relies only on his mind or logic for pramāṇa, is an impertinent fool, who accepts only the visible.