बला का हौसला हुज्जत तमाम करने लगा
खामोश शहर भी उठ कर कलाम करने लगा
किनारे झील के बैठे हुए परिंदे बता
खराब किस लिए तो मेरी शाम करने लगा
यास्मीन सहरЧитать полностью…
दिल ही थे हम दुखे हुए, तुम ने दुखा लिया तो क्या?
तुम भी तो बे अमां हुए, हम को सता लिया तो क्या!
उबैदुल्ला अलीम
अब्रु न संवारा करो कट जाएगी अंगुली
नादान हो तलवार से खेला नहीं करते
बड़े सीधे साधे बड़े भोले भाले
कोई देखे इस वक्त चेहरा तुम्हारा
कलेजे में हजारों दाग, दिल में हसरतें लाखों
कमाई ले चला हूं साथ अपनी जिंदगी भर की
मिलना न मिलना ये तो मुकद्दर की बात है
तुम खुश रहो, रहो मेरे प्यारे जहां कहीं
पहले उस में एक अदा थी नाज था अंदाज था
रूठना अब तो तेरी आदत में शामिल हो गया
तुम कहां वस्ल कहां, वस्ल की उम्मीद कहां
दिल के बहकाने को एक बात बना रखी है
आगा शायर कुजलिबाशЧитать полностью…
करोगे याद तो, हर बात याद आएगी
गुजरते वक्त की, हर मौज ठहर जाएगी
ये चांद बीते जमानों का, आईना होगा
भटकते अब्र में, चेहरा कोई बना होगा
उदास राह, कोई दास्तां सुनाएगी
करोगे याद तो, हर बात याद आएगी
बरसता भीगता मौसम, धुआं धुआं होगा
पिघलती शम्मों पे, दिल का मेरे गुमां होगा
हथेलियों की हिना, याद कुछ दिलाएगी
करोगे याद तो, हर बात याद आएगी
गली के मोड़ पे सूना सा, कोई दरवाजा
तरसती आंखों से, रस्ता किसी का देखेगा
निगाह दूर तलक, जा के लौट आएगी
करोगे याद तो, हर बात याद आएगी
बशर नवाज़
🌀🌻 @Pyari_Shayri 🌻🌀
जरा सी देर में दिल में उतरने वाले लोग
जरा सी देर में दिल से उतर भी जाते हैं
काशिफ हुसैन गायर
बहुत सलीके से बात उनसे करनी पड़ती है
वो जिनकी नाक पे गुस्सा धरा ही रहता है
यास्मीन सहर
चलो निखारेंगे अपने लहू से आरिज-ए-गुल
यही है रस्म-ए-वफा और मंचलों का शिआ'र
आरिज़-ए-गुल: प्रेमिका का चेहरा
शिआर: चलन, तरीक़ा, तौर
हमें देखो हमारे पास बैठो हम से कुछ सीखो
हमीं ने प्यार मांगा था हमीं ने दाग पाए हैं
किश्वर नाहीद
जरा सा बांट ही डालो के दुख बड़ा है बहुत
मुझे गले से लगाओ के अब बिछड़ना है
आमिर अमीरЧитать полностью…
मिट्टी भी जमा की खिलौने भी बना कर देखे
जिंदगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह
हम के मामूर हैं, हर शख्स की दिलजोई पर
हम किसे जा कर सुनाएं जो हमारा दुख है
मामूर
अर्थ: जिस को हुक्म अर्थात आदेश या निर्देश मिला हो
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कहीं तुम अपनी किस्मत का लिखा तबदील कर लेते
तो शायद हम भी अपना रास्ता तबदील कर लेते
अगर हम वाकई कम हैसला होते मोहब्बत में
मरज़ बढ़ने से पहले ही दवा तबदील कर लेते
तुम्हारे साथ चलने पर जो दिल राज़ी नहीं होता
बहुत पहले हम अपना फैसला तबदील कर लेते
तुम्हें इन मौसमों की क्या ख़बर मिलती अगर हम भी
घुटन के ख़ौफ़ से आबो हवा तबदील कर लेते
तुम्हारी तरह जीने का हुनर आता तो फिर शायद
मकान अपना वही रखते पता तबदील कर लेते
वही किरदार हैं ताज़ा कहानी में जो पहले भी
कभी चेहरा कभी अपनी क़बा तबदील कर लेते
जुदाई भी न होती ज़िंदगी भी सहल(आसान) हो जाती
जो हम एक दूसरे से मसला तबदील कर लेते
हमेशा की तरह इस बार भी हम बोल उठे वरना
गवाही देने वाले वाक़िया(कहानी) तबदील कर लेते
बहुत धुंधला गया यादों की रिमझिम में दिल सादा
वह मिल जाता तो हम ये आईना तबदील कर लेते
- सलीम कौशरЧитать полностью…
तुझ से मिल कर हमें रोना था बहुत रोना था
तंगी-ए-वक्त मुलाकात ने रोने न दिया
--सुदर्शन फाकिरЧитать полностью…
मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है,
ये आंख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है!!
बस अपने वास्ते ही फ़िक़्रमंद हैं सब लोग,
यहां किसी को किसी का ख़याल थोड़ी है!!
परों को काट दिया है उड़ान से पहले,
ये ख़ौफ़ ए हिज्र है शौक़ ए विसाल थोड़ी है!!
मज़ा तो तब है कि हम हार के भी हंसते रहें,
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है!!
लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले,
ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है!!
~परवीन शाकिर 🍁Читать полностью…
मैं आपकी आंखों को आईना बना लूं।
देखो, तुम्हें ऐसा कोई दर्पण नहीं मिलेगा।
"अनवर जलालपुरी"
हाल खुलता नहीं जबीनोंं से
रंज उठाए हैं जिन करीनों से
हम ने सोचा न उसने जाना है
दिल भी होते हैं आबगीनों से
आबगीना: शीशा, बिलौर, काँच
अदा जाफरीЧитать полностью…
वो सर्द फासला बस आज कटने वाला था
मैं एक चिराग की लौ से लिपटने वाला था
बहुत, बखेड़ा मुझे मेरे मेहरबानों ने
मेरा वजूद ही लेकिन सिमटने वाला था
बचा लिया तेरी खुशबू के फर्क ने वरना
मैं तेरे वहम में तुझ से लिपटने वाला था
उसी को चूमता रहता था वो, के उसको भी
अजीज था वही बाजू, जो कटने वाला था
मुझ को राह बदलनी थी, सो बदल डाली
कहीं पहाड़ भी ठोकर से हटने वाला था
तलाश जिसकी थी वह हर्फ मिल गया वरना
मैं एक सादा वर्क और उलटने वाला था
ये किस को तीर चलाने का शौक जाग उठ्ठा
वो बाज मेरी तरफ ही झपटने वाला था
कैफ वजदानी
जिंदगी एक सवाल है जिसका जवाब मौत है
मौत भी एक सवाल है जिसका जवाब कुछ नहीं
अमन लखनवी
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चला जाता हूं हंसता खेलता
मौज-ए-हवादिस में
अगर आसानियां हूं, जिंदगी दुश्वार हो जाए
मौज-ए-हवादिस: दुर्घटना-क्रम
ऐ ईमान वालो! तुम पर रोज़े फर्ज़ किए गए जैसा कि तुमसे पहले लोगों पर फर्ज़ किये गये थे अजब नहीं कि तुम परहेज़गार बन जाओ(183)
गिनती के कुछ दिन हैं फिर तुम में जो बीमार हो या वह यात्रा पर हो तो वह दूसरे दिनों से गिनती (पूरी) करे और जिन लोगों के लिए उसका बोझ मुश्किल हो जाए उन पर एक मोहताज का खाना (फ़िद्या) है फिर जो खुशी से नेकी करे तो वह उसके लिए बेहतर है और तुम रोज़ा रखो यही तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानते हो(184)
🤍 @Pyari_Shayri 🤍
सीने में उलझनों का जोबन, कमाल अस्त
आहा! ये जिंदगी से अनबन कमाल अस्त
टूटे हुए बदन में वहशत की सिसकियां
और फिर दिल खराब की छन छन कमाल अस्त
अगर बज्म इनसां में औरत न होती
ख्यालों की रंगीन जन्नत न होती
सितारों के दिल कश फसाने न होते
बहारों की नाजुक हकीकत न होती
जबीनों पे नूर मुसर्रत न होता
निगाहों में शान मुरव्वत न होती
घटाओं की आमद को सावन तरसते
फजाओं में बहकी बगावत न होती
फकीरों को इरफान हस्ती न मिलता
अता जाहिदों को इबादत न होती
मुसाफिर सदा मंजिलों पर भटकते
सफीनों को साहिल की कुरबत न होती
हर एक फूल का रंग फीका सा होता
नसीम बहारां में निकहत न होती
खुदाई का इंसाफ खामोश रहता
सुना है किसी की शफाअत न होती
सागर सिद्दीकी
झुर्रियां राह गुजर बनती चली जाती है
वक्त इंसान के अंदर से गुजर जाता है
रफी रजाЧитать полностью…
जब मैं चलूं तो साया भी अपना न साथ दे
जब तुम चलो जमीं चले आसमां चले
जलील मांकपूरी
मेरी बे दर्द निगाहों में अगर भोले से
नींद आ भी जाए तो ख्वाब कहां आते हैं
तन्हा रहता हूं मैं दिन भर भरी दुनिया में कतील
दिन बुरे हूं तो फिर अहबाब कहां आते हैं
कतील शिफाई
जख़्मों को रफ़ू कर लें, दिल शाद करें फिर से
ख्वाबों की कोई दुनिया, आबाद करें फिर से
- शहरयार
किसी मां-बाप से पूछो कभी बेटी का ये दुःख
देखने वाले जिसे देख के रद करते हैं
सऊद उस्मानीЧитать полностью…
अजीब शख़्स था बारिश का रंग देखकर भी
खुले दरवाजे पे एक फूलदान छोड़ गया
- परवीन शाकिरЧитать полностью…
"मेरे दिल से सुलूक, ऐसा ही होना चाहिए था
उसे भी तोड़ने को, एक खिलौना चाहिए था
- अख़्तर शमीम्"
सब मज़े दर कनार, आलम के
यार जब, हमकिनार होता है
"मीर तक़ी मीर"