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🔱 Har Har Mahadev 🔱
Heartfelt greetings to you and your family on the sacred festival of Maha Shivaratri.
May Lord Shiva's blessings bring
✨ Peace
✨ Strength
✨ Prosperity
✨ and Success to your life.
May Bholenath fulfill all your wishes and make your life blissful.
Om Namah Shivaya 🙏
🌙✨ ✦ जहाँ “ख़ुद होना” अपराध नहीं होता ✦ 🪷
कुछ रिश्ते…
वो नहीं होते
जहाँ रोज़ शब्दों से
अपने होने का सबूत देना पड़े।
वो रिश्ते भी नहीं होते
जहाँ हर मौन को
ग़लती समझ लिया जाए। 😮💨
💖
थकान
मतभेदों से नहीं आती…
थकान आती है
बार-बार “मैं सही हूँ”
ये साबित करने से। 🌿
क्योंकि…
जहाँ अपनापन हो,
वहाँ स्पष्टीकरण नहीं—
समझ मिलती है। 🤍
💖
✨ सुकून वाले रिश्ते पहचानिए…
• जहाँ सीमाएँ तीर नहीं बनतीं 🛡️
• जहाँ “ना” कहना अपराध नहीं होता 🚫
• जहाँ आपकी उपस्थिति मापी नहीं जाती 📏
• जहाँ ख़ामोशी भी सम्मान पाती है 🌙
💖
🌸
और हाँ…
जो रिश्ता
आपकी भावनाओं को
बार-बार अदालत में खड़ा करे,
वो रिश्ता नहीं—
मानसिक परीक्षा है। ⚖️
💖
🪷
रहना वहीं सीखिए,
जहाँ आपकी मौजूदगी
“कितनी काम की है”
इससे नहीं…
“कितनी प्यारी है”
इससे आँकी जाए। 🤍✨
💖
🔥
क्योंकि
सच्चे रिश्ते
कभी आपको
“ख़ुद” बनने के लिए
संशोधित नहीं करते…
वे आपको
“ख़ुद” रहने के लिए
स्वीकार करते हैं। 🌿💫
💖
✍🏻 Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका 🌸📚
🥀💔
तेरे जाने से जो टूटा था मेरे अंदर कुछ,
उसी टूटन की वही पीर लिए बैठा हूँ।
तेरी ख़ामोश निगाहों का असर है अब तक,
अपने सीने में वही तीर लिए बैठा हूँ।
लोग कहते हैं बदल जाते हैं मौसम, चेहरे,
मैं मगर दिल में वही तक़दीर लिए बैठा हूँ।
तेरी यादों के धुएँ से है भरा ये कमरा,
मैं जला दिल की वही ज़ंजीर लिए बैठा हूँ।
कोई समझे तो मेरी आँख का ठहरा हुआ दर्द,
एक बरसों से अधूरी सी तहरीर लिए बैठा हूँ।
रात भर जाग के रोता हूँ तेरी यादों में,
सुबह होंठों पे मगर हँसी की ताबीर लिए बैठा हूँ।
तू अगर लौट भी आए तो कहाँ पहले सा हूँ,
मैं तेरे बाद नई एक तदबीर लिए बैठा हूँ।
✍🏿 शिवा
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💞 आत्म-विस्मृति वाले रिश्ते
कुछ रिश्ते बाहर से
बहुत सुंदर दिखाई देते हैं,
पर भीतर…
मन धीरे-धीरे थकने लगता है। 🌙
वहाँ प्रेम कम नहीं होता,
बस प्रेम की आड़ में
अपना होना
गुम होने लगता है। 🍃
कभी-कभी
किसी के बहुत पास रहते-रहते
हम अपनी ही सांसों की
जगह खो देते हैं। 🕊️
🌿 रिश्ता बोझ कब बनता है?
जब “मैं” का अर्थ
सिर्फ “तुम” से शुरू होकर
“तुम” पर ही खत्म हो जाए।
जब अपनी मुस्कान का कारण
दूसरे के व्यवहार में ढूँढना पड़े,
और अपने आँसू का कारण
भी उसी के शब्द बन जाएँ। 🤍
🪞 कुछ चुप संकेत
• जब तुम हर बार खुद को समझाने लगो
• जब तुम्हारा “ना” अपराध बन जाए
• जब तुम शांति के लिए अपनी सच्चाई दबा दो
• जब तुम्हारी दुनिया का केंद्र
सिर्फ एक इंसान रह जाए 🌫️
✨ प्रेम वह नहीं जो तुम्हें पकड़ कर रखे,
प्रेम वह है
जो तुम्हें स्वतंत्र देखकर
भी तुम्हारे पास रहे। 🌸
जहाँ साथ हो—
पर घुटन नहीं,
जहाँ लगाव हो—
पर कैद नहीं,
जहाँ चाहत हो—
पर अपनी पहचान की कीमत पर नहीं। 🪷
क्योंकि…
जो रिश्ता तुम्हें
खुद से दूर कर दे,
वो रिश्ता नहीं,
एक धीमी-धीमी हार है। 🌧️
— Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका ✍️🌿
✨ अंतरात्मा की देहरी पर ✨
कभी-कभी मन को
भीड़ से नहीं—
मौन से मिलना चाहिए। 🌙
जहाँ कोई लक्ष्य नहीं होता,
कोई दौड़ नहीं होती,
बस भीतर
एक धीमी-सी रोशनी
अपने आप जलती है। 🪔
ऐसे क्षणों में
इच्छाएँ भी शांत हो जाती हैं,
और जीवन
फिर से सरल
लगने लगता है। 🍃
क्योंकि विराम
थकान का नहीं,
पुनर्जन्म का नाम है। 🪷
🌙 शुभ रात्रि
🌸 राधे-राधे
— Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका ✍🏻✨
जितने खाली हैं हम तुम्हारे बग़ैर,
उतने ही भरे हैं हम तुम्हारी यादों के साथ।
तुम नज़र से दूर हो, दिल से कहाँ जाते हो,
हर साँस चलती है अब तुम्हारे एहसासों के साथ।
हमने सीखा है बहुत कुछ तुम्हें खो देने के बाद,
सब्र भी आया है आँखों में, कई ज़ख़्मों के साथ।
जो कभी घर था, वही वीरान सा लगता है अब,
रौशनी जाती रही तुम्हारे क़दमों के साथ।
तुम जो होते तो ये लम्हे भी मुकम्मल होते,
वक़्त अधूरा सा है टूटी हुई साँसों के साथ।
याद इतना भी न आया करो तन्हाई में,
दिल नहीं चलता हमेशा इतने बोझिल ख़यालातों के साथ।
हम ने चाहा था कि बिखरें न कभी टूट के हम,
टूटना आ ही गया तुम्हारी दूरी के साथ।
✍🏿 आकाश
🧩 कुछ रिश्ते—जो भीतर की रोशनी धीरे-धीरे कम कर देते हैं
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जो पास बैठकर भी
मन को अकेला कर देते हैं।
उनसे बात करके थकान नहीं होती…
थकान होती है
उस अनदेखे बोझ से
जो उनकी बातों में छिपा होता है। 🌫️
वो हँसते-हँसते
ऐसे तीर छोड़ते हैं
जो मज़ाक नहीं,
आत्मसम्मान का नुकसान बन जाते हैं। 🥀
वो पूछते नहीं—
तुम ठीक हो?
वो बस तय कर देते हैं—
तुम्हें क्या होना चाहिए,
तुम्हें क्या करना चाहिए,
तुम्हें कैसे जीना चाहिए। ⚖️
और फिर धीरे-धीरे
तुम्हारा मन
जीने से ज़्यादा
खुद को साबित करने में
खर्च होने लगता है… 😮💨
🌿 ऐसे रिश्तों की पहचान
• जहां बात के बाद सुकून नहीं, भारीपन मिले
• जहां सम्मान कम और तंज़ ज़्यादा हो
• जहां तुम्हारी अच्छाई भी कम पड़ती रहे
• जहां तुम्हें हर बार खुद को समझाना पड़े
🛡 खुद को बचाने के शांत तरीके
• कम शब्द, साफ़ दूरी
• हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं
• अपनी सीमाओं को गुनाह मत समझो
• शरीर के संकेत सुनो—
जहां मन घुटे, वहां रुक जाना ही समझदारी है। 🫀
याद रखना—
दूर हो जाना
बदतमीज़ी नहीं होता,
कभी-कभी
वो अपने भीतर की
इज़्ज़त बचाने का निर्णय होता है। 🪷✨
क्योंकि
तुम्हारा मन
कोई कचरा-पात्र नहीं
कि हर कोई
अपनी नकारात्मकता
उसी में फेंकता रहे। 🌙🤍
— Komal Rajput ✍🏻
साहित्यिक लेखिका 🌸
🏡 आश्रय की तृष्णा
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@baba_sanju
*महंगाई का विरोध करने वाले उस वक्त कहाँ थे... 🤣🤣..😏*
*जब एक चुम्मा के बदले पूरा up____बिहार दिया जा रहा था... 👉* 😘....... 😝😝😂😂😂😂😂
🥀💔
ना मौत से दूर हूँ, ना ज़िंदगी के पास हूँ,
साँसें तो चल रही हैं, पर एक ज़िंदा लाश हूँ।
हर रोज़ आईने में खुद से नज़र चुराई है,
चेहरे पे रौनक़ें हैं, दिल में मगर उदास हूँ।
लफ़्ज़ों में कह न पाया जो बोझ बन के रह गया,
ख़ामोशियों के शहर का मैं सबसे बड़ा बाशिंदा हूँ।
चाहा था कुछ और ही, किस्मत ने कुछ लिखा,
टूटे हुए ख़्वाबों का मैं बस एक एहसास हूँ।
महफ़िल में हँस रहा हूँ, तन्हाई रो रही,
सबके लिए मैं ठीक हूँ, खुद के लिए ख़ास हूँ।
जीने का हौसला भी अब बोझ सा लगने लगा,
चलती हुई भी ज़िंदगी, ठहरी हुई सी साँस हूँ।
✍🏿 शिवा
🌸 सुप्रभात 🌸Читать полностью…
आपका आज का दिन ✍🏻
शांति, स्वास्थ्य,
और मधुर ऊर्जा से
परिपूर्ण रहे। ✨
राधे राधे 🪷🙏
🥀💔
अपनों के होते हुए भी अनाथ सा लगता हूँ,
मैं अपने ही घर में एक श्राप सा लगता हूँ।
वो खुश हैं दुनिया के सामने मुझे अपना बताकर,
मगर अंदर ही अंदर मैं उन्हें एक श्राप लगता हूँ।
मैं चुप रहूँ तो मेरी ख़ामोशी खलने लगती है,
जो बोल दूँ तो हर लफ़्ज़ बेहिसाब लगता हूँ।
मेरी कोशिशों का कहीं ज़िक्र तक नहीं होता,
गलती करूँ तो बस मैं ही खराब लगता हूँ।
मैं बोझ नहीं था, बस समझा नहीं गया कभी,
इसी नासमझी में मैं बेहिसाब लगता हूँ।
ख़ुद को मिटा के भी सबको संभालता रहा,
फिर भी हर मोड़ पे मैं नाकाम लगता हूँ।
कभी तो कोई कहे, “तू ज़रूरी है हमें”,
हर रोज़ इस उम्मीद में बेताब लगता हूँ।
✍🏿 शिवा
कुछ प्रेम
आँधी की तरह नहीं आते,
वे हवा की तरह आते हैं—
और भीतर की घुटन को
धीरे-धीरे साँस बना देते हैं। 🌿✨
जहाँ साथ होना
कसौटी नहीं होता,
जहाँ हर पल
खुद को साबित करना
सज़ा नहीं होता। 🕊️
वहाँ दूरी
दहशत नहीं बनती,
वहाँ मौन भी
शक नहीं जगाता,
वहाँ भरोसा
किसी परीक्षा का
उत्तर नहीं माँगता। 🤍
ऐसा प्रेम
डर पर नहीं टिकता—
वह सम्मान पर पलता है। 🌸
वह अनुमान पर नहीं चलता—
वह स्पष्टता से चलता है। ✨
जहाँ तुम्हारे पास बैठते ही
शरीर नहीं…
मन भी ढीला पड़ जाए,
जहाँ तुम्हारी बात
बोझ नहीं लगे,
जहाँ तुम्हारी ज़रूरतें
अपराध न बनें। 🌙
वहाँ तुम
अपने अधूरेपन के साथ भी
पूरी लगती हो,
वहाँ तुम्हें
“बदल जाओ” नहीं,
“वैसी ही रहो”
कहा जाता है। 🪷
क्योंकि प्रेम का अर्थ
मुश्किलों का न होना नहीं—
प्रेम का अर्थ है
मुश्किलों में भी
खुद को खोए बिना
साथ निभा लेना। 🌱
और सच कहूँ तो…
शांत प्रेम
सबसे बड़ा वरदान है—
जो दिल को
चैन देता है,
और आत्मा को
घर। 🕯️🤍
जिस रिश्ते में तुम्हें “खुद” होना डराए—
वो प्रेम नहीं, आदत है। 💯
— Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका 🪶✨
मन का शांत रहना भाग्य,
मन का वश में रहना सौभाग्य,
मन से किसी को याद करना अहोभाग्य,
और मन से कोई याद करे,
वो है परम सौभाग्य...
Happy Maha Shivaratri
Good Morning All
🌿 मन के भीतर उठती एक अनकही हलचल…
🪷 यह भावना क्या है?
⚖️ यह भावना कब सुंदर होती है?
🔥 और कब भारी हो जाती है?
🌙 सच्चाई यह है…
🌸 सुंदर प्रेम वही है…
🖋️ Komal Rajput ✨Читать полностью…
📚 साहित्यिक लेखिका 🌸💚
💛 स्व-प्रेम — क्या यह सच में आवश्यक है?
कभी-कभी मन के भीतर एक प्रश्न
धीमे से जन्म लेता है…
और वही प्रश्न
अक्सर हमारी सबसे गहरी पीड़ा का
सबसे सच्चा पता बन जाता है। 🌿
हम दूसरों के लिए
अद्भुत रूप से कोमल हो जाते हैं—
किसी की भूल को माफ़ कर देते हैं,
किसी के दुख को अपने कंधे पर रख लेते हैं,
किसी के लिए शब्दों को भी नरम कर देते हैं…
पर जब बात अपने मन की आती है,
तो हम स्वयं के सबसे कठोर न्यायाधीश बन जाते हैं। 🥀
✨ स्व-प्रेम का अर्थ क्या है?
स्व-प्रेम का अर्थ यह नहीं
कि आप हर दिन मुस्कुराएँ,
हर पल आत्मविश्वासी रहें,
या स्वयं को परिपूर्ण साबित करें।
स्व-प्रेम का अर्थ है—
अपने भीतर के टूटे हुए हिस्सों को भी
सम्मान से थाम लेना। 🤍
स्व-प्रेम वह क्षण है
जब आप थककर भी
खुद को अपराधी नहीं मानते।
जब आप गलती करके
खुद को त्याग नहीं देते।
जब आप रोकर भी
खुद को कमज़ोर नहीं कहते। 🌙
🌸 स्व-प्रेम के बिना रिश्ते क्यों काँपते हैं?
क्योंकि जब हम स्वयं को नहीं अपनाते,
तो हम हर रिश्ते में
अपनी कीमत दूसरों से माँगने लगते हैं।
हम बार-बार आश्वासन खोजते हैं,
हम हर दूरी से डरते हैं,
और धीरे-धीरे
अपने ही अस्तित्व पर संदेह करने लगते हैं। 🕊️
🪷 सच्चा स्व-प्रेम कैसा दिखाई देता है?
• अपने आप से सम्मानपूर्वक बात करना
• बिना अपराध-बोध के विश्राम करना
• अपने भीतर की सीमाओं की रक्षा करना
• ऐसे लोगों को चुनना जो आपकी ऊर्जा न निचोड़ें
• और अपनी शांति को सबसे ऊपर रखना 🌿✨
🌼 स्व-प्रेम अहंकार नहीं है।
यह स्वयं के साथ
सौम्यता, सामंजस्य और सच्चाई में रहने की कला है।
क्योंकि जो व्यक्ति
अपने भीतर प्रेम की जगह नहीं बनाता,
वह बाहर प्रेम ढूँढते-ढूँढते
अक्सर खुद को खो देता है। 🤍
💫 और याद रखिए—
आपको “किसी के लिए” योग्य बनने की ज़रूरत नहीं…
आप पहले से ही
अपने लिए पर्याप्त हैं। 🌙💛
━━━━━━━━━━━━━━━━━━
𝐊𝐨𝐦𝐚𝐥 𝐑𝐚𝐣𝐩𝐮𝐭
साहित्यिक लेखिका 🌸
🌸 स्वयं होने का साहस 🌸
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🌙✨ शुभ रात्रि ✨🌙
आज की थकान को
चाँदनी के आँचल में रख दीजिए… 🌌
कुछ बातें अधूरी ही सही,
पर सपनों में
पूरी हो जाएँ—
यही दुआ है… 🌿💫
नींद आपकी
सुकून की रेशमी चादर बने,
और कल की सुबह
नई उम्मीदों का उजाला लाए… 🌸🕊️
शुभ रात्रि 🌙🤍✨
न कोई दोस्त है, न कोई रक़ीब है
तेरा शहर भी कितना अजीब है
वो जो इश्क़ था, वो जुनून था
जो ये हिज्र है, शायद नसीब है
यहाँ मुस्कुराहट भी उधार मिलती है
हर चेहरा थोड़ा-सा करीब है
सच बोलने वालों का अंजाम देखो
ख़ामोशी यहाँ सबसे बेहतर तर्ज़ीब है
दिल अपना भी अब अपना नहीं लगता
शायद यही जीने की नई तरकीब है
वो याद आए तो साँस ठहर-सी जाए
ये दर्द भी कितना मीठा अजीब है
हम अपनी ही नज़रों में गिर गए वरना
गुनाह क्या था, बस इश्क़ की तहज़ीब है
ख़ुद को तलाशूँ तो ये समझ आता है
कि गुमशुदगी भी मेरी तर्तीब है
✍🏿 शिवा
मेरी पोस्ट पर आने वाले सारे दोस्त
हीरा है हीरा..😁
जिस दिन मुझे पैसों की कमी महसूस हुई उस दिन सबको बेच दूंगा ..🙃🫣😂🤗😉😝😁😁
🌫 भविष्य की धुंध में मन
🥀💔
अब मुझ पर हक़ न जताना तुम,
तेरे हिस्से का मर चुका हूँ मैं…
बेईमानी भी तेरे इश्क़ ने सिखाई थी,
तू पहली चीज़ थी जो माँ से छुपाई थी…
जो गुनाह तेरे नाम पर किए मैंने,
उनकी सज़ा भी खुद ही भुगत चुका हूँ मैं…
तू कहती रही, “सब ठीक हो जाएगा”,
हर झूठ पर बस मुस्कुराता रहा हूँ मैं…
तेरी हर ज़िद को इबादत मानकर,
अपनी हर ख़्वाहिश को दफ़नाता रहा हूँ मैं…
अब जो मुझे ख़ामोश सा समझती है तू,
तेरी हर बात का जवाब दे चुका हूँ मैं…
और अब जो कहती है तू—मैं बदल गया हूँ,
हाँ… तेरी ही कहानी बनकर जला हूँ मैं…
✍🏿 शिवा
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@baba_sanju
💠 ख़ामोशियाँ — क्या ये प्रेम हैं या दूरी का शिलालेख?
कभी-कभी
हम बहुत ज़्यादा नहीं मांगते…
बस इतना चाहते हैं कि
जिसे दिल ने अपना कहा,
वो ध्यान भी अपना रखे। 🌿
🌙 असल में ख़ामोशी क्या है?
ख़ामोशी हमेशा ग़ुस्सा नहीं होती,
कई बार यह
थकान की तह में छिपा
एक नर्म सा दर्द होती है।
वो दर्द—
जो शिकायत नहीं करता,
बस धीरे-धीरे
अंदर ही अंदर
मन की दीवारों पर
अपना नाम लिख देता है। ✨
⚖️ ख़ामोशी कब सुकून है, और कब टूटन?
• सुकून — जब दो लोग बिना बोले भी एक-दूसरे को समझ लें
• सुकून — जब शब्दों से ज़्यादा भरोसा बोलता हो
• टूटन — जब चुप्पी सवाल बन जाए
• टूटन — जब “सब ठीक है” के पीछे
सब कुछ बिखर रहा हो 🥀
कभी-कभी
रिश्ते टूटते नहीं…
बस भीतर से
धीरे-धीरे
खाली होने लगते हैं।
और सबसे ख़तरनाक बात ये है—
जो इंसान
हर बात पर हँसता रहता है,
वो एक दिन
हँसते-हँसते
भावनाओं से विदा हो जाता है। 🌙🤍
✨ निष्कर्ष
अगर किसी की ख़ामोशी
आपके सामने बैठकर भी
आप तक नहीं पहुँचती,
तो समझिए—
वो आवाज़ नहीं,
आपकी अहमियत ढूँढ रही है। 🪷