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षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता ! निद्रा तद्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रता !! किसी व्यक्ति के बर्बाद होने के 6 लक्षण होते है – नींद, गुस्सा, भय, तन्द्रा, आलस्य और काम को टालने की आदत . @bharat7773 @dharm7773 @geet7773
सभी मित्रों को राम राम 🙏🙏 सोलर पैनल से सीधे एसी, फ्रीज, फेन सिंगल फेस मोटर चक्की , हीटर सभी कुछ बिना बिजली के चलाओ, एक साल वारंटी के साथ 3केवीए से 15केवीए तक, सम्पर्क करें,फोन एवं व्हाट्सअप 9813181734,8930157366
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सूर्य और सात घोडो का रहस्य
अद्भुत ज्ञान सम्पूर्ण विज्ञानं
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रोचक तथ्य
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हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं तथा उनसे जुड़ी कहानियों का इतिहास काफी बड़ा है या यूं कहें कि कभी ना खत्म होने वाला यह इतिहास आज विश्व में अपनी एक अलग ही पहचान बनाए हुए है। विभिन्न देवी-देवताओं का चित्रण, उनकी वेश-भूषा और यहां तक कि वे किस सवारी पर सवार होते थे यह तथ्य भी काफी रोचक हैं।
सूर्य रथ
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हिन्दू धर्म में विघ्नहर्ता गणेश जी की सवारी काफी प्यारी मानी जाती है। गणेश जी एक मूषक यानि कि चूहे पर सवार होते हैं जिसे देख हर कोई अचंभित होता है कि कैसे महज एक चूहा उनका वजन संभालता है। गणेश जी के बाद यदि किसी देवी या देवता की सवारी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है तो वे हैं सूर्य भगवान।
क्यों जुते हैं सात घोड़े
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सूर्य भगवान सात घोड़ों द्वारा चलाए जा रहे रथ पर सवार होते हैं। सूर्य भगवान जिन्हें आदित्य, भानु और रवि भी कहा जाता है, वे सात विशाल एवं मजबूत घोड़ों पर सवार होते हैं। इन घोड़ों की लगाम अरुण देव के हाथ होती है और स्वयं सूर्य देवता पीछे रथ पर विराजमान होते हैं।
सात की खास संख्या
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लेकिन सूर्य देव द्वारा सात ही घोड़ों की सवारी क्यों की जाती है? क्या इस सात संख्या का कोई अहम कारण है? या फिर यह ब्रह्मांड, मनुष्य या सृष्टि से जुड़ी कोई खास बात बताती है। इस प्रश्न का उत्तर पौराणिक तथ्यों के साथ कुछ वैज्ञानिक पहलू से भी बंधा हुआ है।
कश्यप और अदिति की संतानें
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सूर्य भगवान से जुड़ी एक और खास बात यह है कि उनके 11 भाई हैं, जिन्हें एकत्रित रूप में आदित्य भी कहा जाता है। यही कारण है कि सूर्य देव को आदित्य के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य भगवान के अलावा 11 भाई ( अंश, आर्यमान, भाग, दक्ष, धात्री, मित्र, पुशण, सवित्र, सूर्या, वरुण, वमन, ) सभी कश्यप तथा अदिति की संतान हैं।
वर्ष के 12 माह के समान
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पौराणिक इतिहास के अनुसार कश्यप तथा अदिति की 8 या 9 संतानें बताई जाती हैं लेकिन बाद में यह संख्या 12 बताई गई। इन 12 संतानों की एक बात खास है और वो यह कि सूर्य देव तथा उनके भाई मिलकर वर्ष के 12 माह के समान हैं। यानी कि यह सभी भाई वर्ष के 12 महीनों को दर्शाते हैं।
सूर्यदेव की दो पत्नियां
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सूर्य देव की दो पत्नियां संज्ञा एवं छाया हैं जिनसे उन्हें संतान प्राप्त हुई थी। इन संतानों में भगवान शनि और यमराज को मनुष्य जाति का न्यायाधिकारी माना जाता है। जहां मानव जीवन का सुख तथा दुख भगवान शनि पर निर्भर करता है वहीं दूसरी ओर शनि के छोटे भाई यमराज द्वारा आत्मा की मुक्ति की जाती है। इसके अलावा यमुना, तप्ति, अश्विनी तथा वैवस्वत मनु भी भगवान सूर्य की संतानें हैं। आगे चलकर मनु ही मानव जाति का पहला पूर्वज बने।
सूर्य भगवान का रथ
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सूर्य भगवान सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होते हैं। इन सात घोड़ों के संदर्भ में पुराणों तथा वास्तव में कई कहानियां प्रचलित हैं। उनसे प्रेरित होकर सूर्य मंदिरों में सूर्य देव की विभिन्न मूर्तियां भी विराजमान हैं लेकिन यह सभी उनके रथ के साथ ही बनाई जाती हैं।:
कोणार्क मंदिर
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विशाल रथ और साथ में उसे चलाने वाले सात घोड़े तथा सारथी अरुण देव, यह किसी भी सूर्य मंदिर में विराजमान सूर्य देव की मूर्ति का वर्णन है। भारत में प्रसिद्ध कोणार्क का सूर्य मंदिर भगवान सूर्य तथा उनके रथ को काफी अच्छे से दर्शाता है।
सात से कम या ज्यादा क्यों नहीं
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लेकिन इस सब से हटकर एक सवाल काफी अहम है कि आखिरकार सूर्य भगवान द्वारा सात ही घोड़ों की सवारी क्यों की जाती हैं। यह संख्या सात से कम या ज्यादा क्यों नहीं है। यदि हम अन्य देवों की सवारी देखें तो श्री कृष्ण द्वारा चालए गए अर्जुन के रथ के भी चार ही घोड़े थे, फिर सूर्य भगवान के सात घोड़े क्यों? क्या है इन सात घोड़ों का इतिहास और ऐसा क्या है इस सात संख्या में खास जो सूर्य देव द्वारा इसका ही चुनाव किया गया।
सात घोड़े और सप्ताह के सात दिन
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सूर्य भगवान के रथ को संभालने वाले इन सात घोड़ों के नाम हैं - गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति। कहा जाता है कि यह सात घोड़े एक सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते हैं। यह तो महज एक मान्यता है जो वर्षों से सूर्य देव के सात घोड़ों के संदर्भ में प्रचलित है लेकिन क्या इसके अलावा भी कोई कारण है जो सूर्य देव के इन सात घोड़ों की तस्वीर और भी साफ करता है।
सात घोड़े रोशनी को भी दर्शाते हैं
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पौराणिक दिशा से विपरीत जाकर यदि साधारण तौर पर देखा जाए तो यह सात घोड़े एक रोशनी को भी दर्शाते हैं। एक ऐसी रोशनी जो स्वयं सूर्य देवता यानी कि सूरज से ही उत्पन्न होती है। यह तो सभी जानते हैं कि सूर्य के प्रकाश में सात विभिन्न रंग की रोशनी पाई जाती है जो इंद्रधनुष का निर्माण करती है।
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कुछ लोग ऐसे पूज्य संतों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं, इन्हें नहीं चुनाव लड़ना है और नहीं कोई स्वार्थ है, लक्ष्य है एकमात्र हिंदू एकता...🙏🙏🙏
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√●राम के बिना रामा व्यर्थ हैं। रामा के बिना जीवन नीरस है। गृहस्थ को दोनों चाहिये। राम और रामा का आगमन जिसके जीवन में है, वह धन्य है। उस सगृहस्थ संत को मेरा प्रणाम है।
"सुखतः क्रियते रामाभोग पश्चादहन्त! शरीरे रोगः ।"
(शंकराचार्य)
पहले रामा का भोग सुखपूर्वक किया जाता है, बाद में शरीर रोग से त्रस्त होता है। इसलिये हे मन । राम को न भूल। राम सत्य है, रामा मिथ्या ।
*अनमोल सत्य*
🙏🚩🙏
1. *टायर चलने पर घिसते हैं, लेकिन पैर के तलवे जीवनभर दौड़ने के बाद भी नए जैसे रहते हैं।*
2. *शरीर 75% पानी से बना है, फिर भी लाखों रोमकूपों के बावजूद एक बूंद भी लीक नहीं होती।*
3. *कोई भी वस्तु बिना सहारे नहीं खड़ी रह सकती, लेकिन यह शरीर खुद को संतुलित रखता है।*
4. *कोई बैटरी बिना चार्जिंग के नहीं चलती, लेकिन हृदय जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है।*
5. *कोई पंप हमेशा नहीं चल सकता, लेकिन रक्त पूरे जीवनभर बिना रुके शरीर में बहता रहता है।*
6. *दुनिया के सबसे महंगे कैमरे भी सीमित हैं, लेकिन आंखें हजारों मेगापिक्सल की गुणवत्ता में हर दृश्य कैद कर सकती हैं।*
7. *कोई लैब हर स्वाद टेस्ट नहीं कर सकती, लेकिन जीभ बिना किसी उपकरण के हजारों स्वाद पहचान सकती है।*
8. *सबसे एडवांस्ड सेंसर भी सीमित होते हैं, लेकिन त्वचा हर हल्की-से-हल्की संवेदना को महसूस कर सकती है।*
9. *कोई भी यंत्र हर ध्वनि नहीं निकाल सकता, लेकिन कंठ से हजारों फ्रीक्वेंसी की आवाजें पैदा हो सकती हैं।*
10. *कोई डिवाइस पूरी तरह ध्वनियों को डिकोड नहीं कर सकती, लेकिन कान हर ध्वनि को समझकर अर्थ निकाल लेते हैं।*
*इसलिए ईश्वर ने हमें जो अमूल्य वस्तुएं दी हैं, उनके लिए आभार मानिए और प्रभु से शिकायत करने का हमें कोई अधिकार नहीं है।*
🙏🙏🙏🙏🙏
🕉️🙏 वंदे मातरम 🚩🇮🇳
🇮🇳 जय हिंद - जय भारत 🙏
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सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने पर प्रकाशित किया गया
60 साल तक भारत में प्रतिबंधित रहा नाथूराम गोडसे
का अंतिम भाषण -
#मैंने_गांधी_को_क्यों_मारा !
30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुए बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया,
नाथूराम गोड़से समेत 17 देशभक्तों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान #न्यायमूर्ति #खोसला से #नाथूराम जी ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था पर यह कोर्ट परिसर तक ही सिमित रह गयी क्योकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया l
#मैंने_गांधी_को_क्यों_मारा*
नाथूराम गोड़से ने गांधी हत्या के पक्ष में अपनी
150 दलीलें न्यायलय के समक्ष प्रस्तुति की
नाथूराम गोड़से के वक्तव्य के कुछ मुख्य अंश,
नाथूराम जी का विचार था कि गांधी की अहिंसा हिन्दुओं
को कायर बना देगी कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी को मुसलमानों ने निर्दयता से मार दिया था महात्मा गांधी सभी हिन्दुओं से गणेश शंकर विद्यार्थी की तरह अहिंसा के मार्ग पर चलकर बलिदान करने की बात करते थे नाथूराम गोड़से को भय था गांधी की ये अहिंसा वाली नीति हिन्दुओं को
कमजोर बना देगी और वो अपना अधिकार कभी
प्राप्त नहीं कर पायेंगे,
1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोलीकांड
के बाद से पुरे देश में ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ
आक्रोश उफ़ान पे था,
भारतीय जनता इस नरसंहार के #खलनायक_जनरल_डायर
पर अभियोग चलाने की मंशा लेकर गांधी के पास गयी
लेकिन गांधी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन
देने से साफ़ मना कर दिया,
महात्मा गांधी ने खिलाफ़त आन्दोलन का समर्थन करके भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का जहर घोल दिया महात्मा गांधी खुद को मुसलमानों का हितैषी की तरह पेश करते थे वो #केरल_के_मोपला_मुसलमानों द्वारा वहाँ के
1500 हिन्दूओं को मारने और 2000 से अधिक हिन्दुओं
को मुसलमान बनाये जाने की घटना का विरोध
तक नहीं कर सके,
कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में #नेताजी_सुभाष_चन्द्रबोस
को बहुमत से काँग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गांधी ने #अपने_प्रिय_सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे गांधी ने सुभाष चन्द्र बोस से जोर जबरदस्ती करके इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर दिया...
23 मार्च 1931 को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गयी पूरा देश इन वीर बालकों की फांसी को
टालने के लिए महात्मा गांधी से प्रार्थना कर रहा था लेकिन गांधी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए देशवासियों की इस उचित माँग को अस्वीकार कर दिया,
गांधी #कश्मीर_के_हिन्दू_राजा_हरि_सिंह से कहा कि
#कश्मीर_मुस्लिम_बहुल_क्षेत्र_है_अत:वहां का शासक
कोई मुसलमान होना चाहिए अतएव राजा हरिसिंह को
शासन छोड़ कर काशी जाकर प्रायश्चित करने जबकि हैदराबाद के निज़ाम के शासन का गांधी जी ने समर्थन किया था जबकि हैदराबाद हिन्दू बहुल क्षेत्र था गांधी जी की नीतियाँ
धर्म के साथ बदलती रहती थी उनकी मृत्यु के पश्चात
सरदार पटेल ने सशक्त बलों के सहयोग से हैदराबाद को
भारत में मिलाने का कार्य किया गांधी के रहते ऐसा करना संभव नहीं होता
पाकिस्तान में हो रहे भीषण रक्तपात से किसी तरह से अपनी जान बचाकर भारत आने वाले विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली मुसलमानों ने मस्जिद में रहने वाले हिन्दुओं का विरोध किया जिसके आगे गांधी नतमस्तक हो गये और गांधी ने उन विस्थापित हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में सड़कों पर रात बिताने पर मजबूर किया गया,
महात्मा गांधी ने दिल्ली स्थित मंदिर में अपनी प्रार्थना सभा
के दौरान नमाज पढ़ी जिसका मंदिर के पुजारी से लेकर
तमाम हिन्दुओं ने विरोध किया लेकिन गांधी ने इस विरोध को दरकिनार कर दिया लेकिन महात्मा गांधी एक बार भी किसी मस्जिद में जाकर गीता का पाठ नहीं कर सके,
लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से विजय
प्राप्त हुयी किन्तु गान्धी अपनी जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया गांधी अपनी मांग
को मनवाने के लिए अनशन-धरना-रूठना किसी से बात
न करने जैसी युक्तियों को अपनाकर अपना काम
निकलवाने में माहिर थे इसके लिए वो नीति-अनीति का लेशमात्र विचार भी नहीं करते थे,
*पिता पुत्र की श्लोक पढ़ने में जुगलबंदी। कृपा कर पुरा देखें। सनातनी होने पर गर्व करेंगे*
*देख कर बताये है न अदभुत अलौकिक?? ....*🙏#जयहोसनातनधर्मकी
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शुभ शनिवार, शुभ प्रभात मित्रों 🙏🙏 जय श्री राम 🙏🙏 कृप्या मुझे फॉलो ओर शेय...
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जय श्री राम 🙏🙏 जय श्री राम 🙏 शुभ प्रभात मित्रों 🙏🙏 कृप्या मुझे फॉलो
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January 28, 2026
https://youtube.com/shorts/q-4_7aJTAqU?si=kbFnxfGPYNz2NmEO
https://youtu.be/lfAdBcjPufQ?si=Vkbzbgran5dBKD5_
*क्या हिन्दू अगली सदी तक रहेगा*❓
एक गहन आत्ममंथन, हिन्दूओं की आंखें खोलने वाला लेख...
*जागो हिंदुओं जागो...*
*क्या मरने के बाद जागोगे ?*
*एक या दो संतान पैदा करने वाले 70% हिंदु बुढ़ापे में अकेले रह जाएंगे...*
*क्योंकि अधिकांश बच्चे...*
या तो कुंवारे रह जाएंगे!
या बिगड़ कर बर्बाद हो जाएंगे!
या तो मानसिक रोगी हो जाएंगे!
या तो बच्चे पैदा नहीं कर पाएंगे !
या अकेलेपन का शिकार हो जाएंगे!
या तो मां बाप को छोड़कर चले जाएंगे!
या तो बीमारी से मर जाएंगे!
या तो आत्महत्या कर लेंगे!
या तो सड़क दुर्घटना में मर जाएंगे!
हम दो हमारे एक या दो,
हिंदुओं की सबसे बड़ी भूल है,
क्योंकि यह वेद विरुद्ध है।
हिंदुओं ने गर्भनिरोधक संसाधनों का प्रयोग करके अपने पित्रों को धरती पर आने से रोका है, क्योंकि पितृ मोक्ष के लिए संतान के रूप में धरती पर आते हैं।
और हिंदुओं की संपत्ति जिहादी कोम हड़प लेगी, क्योंकि हम दो हमारे दो पर हिंदू कायम हे, जिहादी अल्लाह की देन पर कायम हे! जब तक हिंदुओं को कांग्रेस और भारत का कानून नोचता रहेगा हिंदु खुद भी बच्चों को जन्म देने से पहले मार दिए जाएंगे!
*हिन्दूओं की चारों ओर अंधकार !*
• बेटियां 30–35 की उम्र तक कुंवारी!
• बेटे 35 पार कर चुके, विवाह नहीं!
• विवाह होते है तो देरी से!
• बच्चे होते हैं तो एक ही!
• विवाह विच्छेद और टूटते परिवार!
• वृद्ध माता-पिता अकेले!
• पूरी पीढ़ी खोखली!
क्या हम इसे “शिक्षित समाज” कहें ?
या आत्मघाती समाज ?
*हिंदु जनसंख्या घटाने की साजिश !*
एक उदाहरण से समझिए...
• आज समाज में 100 लोग हैं = 50 जोड़े
• यदि हर जोड़ा सिर्फ एक ही संतान पैदा करता है तो अगली पीढ़ी में अधिकतम 45-46 संतानें (कुछ निःसंतान जोड़े)
• फिर वे एक-एक संतान करें तो अगली पीढ़ी में 20–22
• तीसरी पीढ़ी में समाज शून्य के करीब
यह कोई अनुमान नहीं यह गणित है ! आज गांव उजड़ चुके हैं! शहरों में बड़ी इमारतें हैं, पर उनमें कोई परिवार नहीं बचा!
*क्यों नई बहुएं एक संतान चाहती हैं ?*
• ताकि ज़िंदगी का आनंद ले सकें।
• ताकि करियर न रुके।
• ताकि डिलीवरी में शरीर न बिगड़े।
• और कहीं कोई वांझोटी न कहे।
इसलिए बस एक बच्चा वो भी देर से,
क्या यही धर्म और देश का भविष्य है ?
*सबसे बड़ा दोषी लड़की के पिता !*
• वही पिता जिसने खुद 22–25 की उम्र में विवाह कर लिया था।
• पत्नी के साथ समय बिताया, परिवार बसाया, संतान पाई।
• आज वही अपनी बेटी को 30 तक कुंवारी रखता है! कभी करियर के नाम पर, कभी "बढ़िया लड़का नहीं मिल रहा” कहकर, तो कभी दहेज व प्रतिष्ठा का हवाला देकर!
• बेटी को सिर पर बैठाकर आपने उसे रिश्तों से दूर कर दिया!
• अब वही बेटी अवसाद में, IVF में, या विवाह विच्छेद में जा रही है!
*हिन्दू समाज में क्या चल रहा है ?*
• विवाह की औसत आयु : लड़के–32 वर्ष, लड़की–29 वर्ष!
• औसतन संतान : 1 या 0.5 प्रति दंपत्ति!
• डिवोर्स रेट : भारत में तेज़ वृद्धि दर!
• प्रजनन की समस्या : हर 4 में 1 दंपत्ति को संतान होने में समस्या!
• विवाह योग्य युवक/युवतियां कुंवारे, हज़ारों की संख्या में!
*हिंदु समाज के अध्यक्ष क्या कर रहे हैं ?*
• मूलभूत संकट पर कोई चर्चा नहीं!
• विवाह और संतान को त्याज्य माना!
• यह धर्म नहीं पलायन है!
विवाह एक धार्मिक कर्तव्य है। यह कोई सांसारिक बंधन नहीं, बल्कि वंश और धर्म की निरंतरता का माध्यम है।
*हमने क्या किया ?*
• बेटी को “राजकुमारी” बनाकर विवेक से वंचित किया।
• बेटे को जिम्मेदारी से दूर कर दिया।
• विवाह को टालते रहे और जब किया तो देरी से, शरीर साथ नहीं देता।
• जब बच्चे हुए तो केवल एक।
• जब रिश्ता बिगड़ा तो बेटी अकेली, बेटा टूटा और घर बिखर गया।
*अब क्या करना होगा ?*
• समय पर विवाह को अनिवार्य बनाएं।
22 के बाद पुत्र, 20 के बाद पुत्री का विवाह हो जाना चाहिए।
• एक नहीं, कम से कम चार संतानें, यह आवश्यक है।“एक बच्चा” यह मानसिकता समाज को शून्य पर ला रही है।
• प्रबुद्धजन को सामाजिक विषयों पर बोलना ही होगा। हिंदु समाज का विनाश सबसे बड़ा प्रश्न है।
• लड़की के पिता को अब सजग होना होगा। अपेक्षाएं नहीं, समझदारी लानी होगी। बेटी की ज़िंदगी बचानी है तो समय पर विवाह कराओ।
*अंतिम चेतावनी :*
नहीं चेते तो इतिहास में रह जाएगा हिन्दू
• ना युवक होंगे, ना युवतियां
• ना संतानें होंगी, ना संस्कार
• ना समाज होगा, ना संस्कृति
• ना धर्म होगा, ना देश
*नए भारत का वैश्विक संकल्प...*
*सनातन वैदिक धर्म...विश्व धर्म*
*अखंड हिंदु राष्ट्र भारत...विश्व गुरु भारत*
*धर्मो रक्षति रक्षितः...*🚩
बनता है इंद्रधनुष
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यह रोशनी एक धुर से निकलकर फैलती हुई पूरे आकाश में सात रंगों का भव्य इंद्रधनुष बनाती है जिसे देखने का आनंद दुनिया में सबसे बड़ा है।
प्रत्येक घोड़े का रंग भिन्न
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सूर्य भगवान के सात घोड़ों को भी इंद्रधनुष के इन्हीं सात रंगों से जोड़ा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम इन घोड़ों को ध्यान से देखें तो प्रत्येक घोड़े का रंग भिन्न है तथा वह एक-दूसरे से मेल नहीं खाता है। केवल यही कारण नहीं बल्कि एक और कारण है जो यह बताता है कि सूर्य भगवान के रथ को चलाने वाले सात घोड़े स्वयं सूरज की रोशनी का ही प्रतीक हैं।
पौराणिक गाथा से इतऱ
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यदि आप किसी मंदिर या पौराणिक गाथा को दर्शाती किसी तस्वीर को देखेंगे तो आपको एक अंतर दिखाई देगा। कई बार सूर्य भगवान के रथ के साथ बनाई गई तस्वीर या मूर्ति में सात अलग-अलग घोड़े बनाए जाते हैं, ठीक वैसा ही जैसा पौराणिक कहानियों में बताया जाता है लेकिन कई बार मूर्तियां इससे थोड़ी अलग भी बनाई जाती हैं।
अलग-अलग घोड़ों की उत्पत्ति
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कई बार सूर्य भगवान की मूर्ति में रथ के साथ केवल एक घोड़े पर सात सिर बनाकर मूर्ति बनाई जाती है। इसका मतलब है कि केवल एक शरीर से ही सात अलग-अलग घोड़ों की उत्पत्ति होती है। ठीक उसी प्रकार से जैसे सूरज की रोशनी से सात अलग रंगों की रोशनी निकलती है। इन दो कारणों से हम सूर्य भगवान के रथ पर सात ही घोड़े होने का कारण स्पष्ट कर सकते हैं।
सारथी अरुण
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पौराणिक तथ्यों के अनुसार सूर्य भगवान जिस रथ पर सवार हैं उसे अरुण देव द्वारा चलाया जाता है। एक ओर अरुण देव द्वारा रथ की कमान तो संभाली ही जाती है लेकिन रथ चलाते हुए भी वे सूर्य देव की ओर मुख कर के ही बैठते है !
केवल एक ही पहिया
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रथ के नीचे केवल एक ही पहिया लगा है जिसमें 12 तिल्लियां लगी हुई हैं। यह काफी आश्चर्यजनक है कि एक बड़े रथ को चलाने के लिए केवल एक ही पहिया मौजूद है, लेकिन इसे हम भगवान सूर्य का चमत्कार ही कह सकते हैं। कहा जाता है कि रथ में केवल एक ही पहिया होने का भी एक कारण है।
पहिया एक वर्ष को दर्शाता है
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यह अकेला पहिया एक वर्ष को दर्शाता है और उसकी 12 तिल्लियां एक वर्ष के 12 महीनों का वर्णन करती हैं। एक पौराणिक उल्लेख के अनुसार सूर्य भगवान के रथ के समस्त 60 हजार वल्खिल्या जाति के लोग जिनका आकार केवल मनुष्य के हाथ के अंगूठे जितना ही है, वे सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। इसके साथ ही गांधर्व और पान्नग उनके सामने गाते हैं औरअप्सराएं उन्हें खुश करने के लिए नृत्य प्रस्तुत करती हैं।
ऋतुओं का विभाजन
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कहा जाता है कि इन्हीं प्रतिक्रियाओं पर संसार में ऋतुओं का विभाजन किया जाता है। इस प्रकार से केवल पौराणिक रूप से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों से भी जुड़ा है भगवान सूर्य का यह विशाल रथ।
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हर घर में ये पांच चीजें जरूर होनी चाहिए मित्रों 🙏
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*__वो संघ प्रचारक था तो भी नफरT_________वो CM बना तो भी नफरत…*
*बिजली चोरी को रोका तो भी नफरत..*
*रिवरफ्रंट बनाया फिर भी नफरत..*
*नेनो के लिए टाटा को बुलाया तो भी नफरत…*
*15 साल पहले हुए दंगो की वजह से नफरत…*
*15 साल से दंगे नहीं हुए इस लिए नफरत…*
*उसके PM बनने की बात से नफरत..*
*उसके PM बन जाने से नफरत,*
*उसके कपड़ों से नफरत…*
*उसके सुधार कार्यक्रमों से नफरत..*
*उसके विदेश दौरों से नफरत…*
*उसके भाषण से नफरत…*
*उसके चेहरे से नफरत…*
*उसकी माँ से नफरत..*
*उसने चाय बेची तो नफरत..*
*उसने घरबार को त्याग दिया तो नफरत..*
*माँ से मिलने जाए तो नफरत….*
*पत्नी को सिक्युरिटी दे तो नफरत..*
*न दे तो भी नफरत…*
*संसद में बैठे तो नफरत..*
*जनता से बोले तो नफरत..*
*रेडियो टीवी पर बोले तो नफरत..*
*न बोले तो नफरत..*
*भाषण की भावुकता से नफरत..*
*भाषण की दृढ़ताओं से नफरत..*
*वो रोये तो नफरत..*
*वो हँसे तो नफरत..*
*पाकिस्तान से वार्ता पर नफरत…*
*पाकिस्तान से सख्ती पर नफरत,*
*सर्जिकल स्ट्राइक पर नफरत..*
*आतंकवादी को मारे तो नफरत..*
*काले धन पर अभियान न चलने पर नफरत…*
*अभियान चले तो नफरत…*
*भ्रष्टाचारी की पुंगी बजाई तो नफरत…*
*इस बात से भी नफरत कि कोई आदमी*
*उसके पक्ष में पोस्ट कैसे लिख सकता है?*
*लिखे तो ‘मोदी भक्त’ का संबोधन…*
*सबसे बड़ा रहस्य ये है कि*
*मोदी का विरोध करने वाले यह नहीं बताते,*
*या बताने से डरते हैं कि वह समर्थन किसका करते हैं?*
*जिसको जनता चुन के लाई उसका या अल्प मत का?*
*कामचोरों का या जो 16-17 घंटे काम करता है उसका?*
*या फिर सिर्फ करने के लिए विरोध और नफरत करते हैं?*
*माफ़ कीजियेगा …..!!!!*
*ये पक्का मनोरोग का मामला है हुजूर*
*"सनातन और सनातनी का खून धर्म, कर्म, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम से सिंचित होता है।*
*सनातनी अपने धर्म के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति भी समर्पित होता है*
*वह राष्ट्र के लिए जीता है और राष्ट्र के लिए ही मर जाता है।*
*सनातन उस मिट्टी का संस्कार है जहाँ जन्म लेने वाला हर व्यक्ति देशभक्ति को अपना धर्म मानता है।*
*वह अपने प्राणों की आहुति दे सकता है, पर राष्ट्र और धर्म के अपमान को कभी सहन नहीं कर सकता।*
*प्रधानमंत्री मोदी जी उसी सनातन परंपरा की संतान हैं,*
*जिनके संस्कारों में राष्ट्रभक्ति, सेवा और सनातन*
@देशद्रोहियों। विरोध करते हो विरोध करना चाहिए लेकिन कोई ठोस कारण दो 😡😡😡😡😡😡😡
√★कुण्डली में दहेज का विचार अष्टम भाव से करना चाहिये। सप्तम भाव जाया है जाया से दूसरा भाव अर्थात् अष्टम, जाया का घन वैभव हुआ। जाया की धन सम्पत्ति का नाम दहेज है। लोगों की लालची आँखें दहेज पर लगी रहती हैं जिसकी कुण्डली में अष्टम भाव पुष्ट, बली है, उसे अनायास बिना मांगे ही दहेज मिलेगा। अष्टम भाव के अपुष्ट एवं निर्बल होने पर माँगने पर भी दहेज नहीं मिलता। यदि बलात् दहेज का दोहन किया जाता है तो वह निश्चय ही उसके लिये अनिष्टकर होगा। अष्टम भाव में स्थित मह वा अष्टम को देखने वाले ग्रह की प्रकृति के अनुरूप धन का स्वरूप होगा। व्यक्ति के लिये दहेज शुभ होगा वा अशुभ, इसका निर्णय अष्टमस्थ राशि राशि के स्वामी, अष्टमस्थ मह/ यहाँ एवं अष्टम द्रष्टा मह/ महों के शुभाशुभ प्रभाव का सम्यक् आकलन कर करना चाहिये।
√★★★दहेज सामाजिक कोढ़ है। राजाओं, उद्योगपतियों, अति धनाढ्य की देखा-देखी सामान्य जनता को यह शोभा नहीं देता। इसके मूल में अकर्मण्यता एवं लोभ है। स्त्री धन पर जीवन निर्वाह करने वालों को धिक्कार है। अपने मायके से प्राप्त धन का प्रयोग स्त्री स्वयं के लिये करे वर का विक्रय कर स्त्री धन/ दहेज लेने वाले अकर्मण्य धन लोलुप कुक्कुरों को मैं नमस्कार करता हूँ।
अंगिरा ऋषि का वचन है...
"स्त्रिया धनन्तु ये मोहाद् उपजीवन्ति बान्धवाः ।
स्त्रिया यानानि वासांसि ते पापा यान्त्यधोगतिम् ॥"
(अंगिरास्मृति-७१)
√★स्त्री के धन (दहेज) को जो बान्धव भोगते हैं, स्त्री का यान/ वाहन (जैसे ससुराल से मिली मोटर साइकिल स्कूटर कार ) जो प्रयोग में लाते हैं, उस (स्त्री पक्ष) के वस्त्रों को जो व्यवहार में लाते हैं, वे पापी अधोगति को प्राप्त होते हैं।
√★स्त्री सेवा करती है। जो सेवा करता है, वह शूद्र है। पुरुष सदैव स्त्री से अपनी सेवा कराता है। इसलिये स्त्री शूद्र हुई। मासिक धर्म के समय स्त्रियों से सेवा नहीं ली जाती। इन दिनों स्त्रिय अस्पृश्य वा अछूत होती हैं। प्रकारान्तर से शूद्र जब सेवा धर्म का त्याग कर दे तो वह अछूत होता है, किन्तु पृण्य नहीं। सेवक सबको प्रिय होता है। अतः स्त्री सदा ही पुरुष को प्रिय है। स्त्री का अन्न अर्थात् दहेज में मिला। अन्न वा अन्नोत्पादक कृषि योग्य भूमि से ब्रह्मतेज का हनन होता है। अंगिरा ऋषि कहते हैं...
"राजानं हरते तेज, शूद्रानं ब्रह्मवर्चसम्।
सूतकेषु च यो भुंक्ते स भुङ्क्ते पृथिवीमलम् ॥"
(अंगिरा स्मृति ७२)
√★ राजान्न तेज हर्ता है। शूहान्न तपहर्ता है। सूतकान्न/ अशौचान्न तो पाप ही है। इन तीन अन्नों से जो अछूता है, उसे मेरा प्रणाम । सांसारिक आसक्ति से निवृत होने के लिये भगवान्, विष्णु के चरणों में विधिवत् मन लगाना चाहिये। स्वर्ग के द्वार को खोलने में समर्थ धर्म का उपार्जन भी करना चाहिये। युवती नारी के तन के साथ कामक्रीड़ा अवश्य करना चाहिये। जो ऐसा नहीं करता वह माता के यौवनरूपी वन को काटने में कुल्हाड़ी रूप है ऐसा योगी भाईहरि कहते हैं। यह श्लोक है...
"न ध्यातं पदमीश्वरस्य विधिवत् संसारविच्छितये, स्वर्गद्वारकपाटपाटनपटुः धर्मोऽपि नोपार्जित।
नारीपीनपयोधरोरूयुगलं स्वप्नेऽपि नालिंगितं,
मातुः केवलमेव यौवनवनच्छेदे कुठारा वयम् ॥"
( वैराग्य शतक ११ )
√★ वैराग्य के लिये ये तीन कर्म आवश्यक हैं। बिना भगवत्पूजा किये बिना धर्म (कलियुग में दान ही धर्म है) किये, बिना स्त्री सहवास किये, स्थिर वैराग्य नहीं होता। पुरुष को वास्तविक वैराग्य देने वाली स्त्री ही है (और स्त्री को पुरुष) ऐसा नित्य समझना चाहिये। स्त्री की लताड़ से पुरुष का स्त्री के प्रति मोह भंग होता है। भर्तृहरि अपने अनुभव की बात करते हैं। ये तीन कर्म अनिवार्य हैं। इसका तात्पर्य है-गृहस्थाश्रम से होकर ही वैराग्य का पथ प्रशस्त होता है। मोक्ष के लिये विवाह (बन्धन) अनिवार्य है। गृहस्थ का बन्धन वास्तविक है। अगूहस्थ का बन्धन अवास्तविक वा मिथ्या है। मिथ्या की मुक्ति सम्भव नहीं। यही विवाह का महत्व है।
जो जीवन भर स्त्री का ध्यान करता रहा, ईश्वर का ध्यान ही न किया, उसे मुक्ति कहाँ ? एक बड़ा सुन्दर श्लोक है ...
"चिरंध्याता रामा, क्षणमपि न रामप्रतिकृतिः
परं पीतं रामाधरमधु, न रामालिंगसलिलम् ।
नवा रुष्टा रामा यदचिन रामायविनति:,
गतं मे जन्म्याय्यं न दशरथजन्मा परिगतः ।"
√●सुन्दर स्त्री को रामा कहते हैं। आजीवन रामा का ध्यान करता रहा और क्षण भर भी राम की छवि ध्यान नहीं किया। रामा के अधरोष्ठ शहद को जी भर पिया और राम के चरणामृत का पान किया ही नहीं। रुष्ट हुई रामा के सामने बार-बार झुका और राम के सम्मुख एक बार भी नहीं। मेरा सम्पूर्ण जीवन व्यतीत हो गया और मैं दशरथजन्मा राम को न जान पाया। व्यक्ति ऐसे ही पछताता है, जब उसके जीवन का सूर्य अस्ताचल के निकट पहुँचता है।
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14 जून 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था लेकिन गांधी ने वहाँ पहुँच कर
प्रस्ताव का समर्थन करवाया यह भी तब जबकि गांधी
ने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश
पर होगा न सिर्फ देश का विभाजन हुआ बल्कि लाखों
निर्दोष लोगों का कत्लेआम भी हुआ लेकिन गांधी
ने कुछ नहीं किया,
धर्म-निरपेक्षता के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के जन्मदाता महात्मा गाँधी ही थे जब मुसलमानों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने का विरोध किया तो महात्मा गांधी ने सहर्ष ही इसे स्वीकार कर लिया और हिंदी की जगह हिन्दुस्तानी (हिंदी+उर्दू की खिचड़ी) को बढ़ावा देने लगे बादशाह राम और बेगम सीता जैसे शब्दों का
चलन शुरू हुआ,
कुछ एक मुसलमान द्वारा वंदेमातरम् गाने का विरोध करने
पर महात्मा गांधी झुक गये और इस पावन गीत को भारत
का राष्ट्र गान नहीं बनने दिया,
गांधी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी महाराणा प्रताप व
गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा वही दूसरी
ओर गांधी मोहम्मद अली जिन्ना को क़ायदे-आजम
कहकर पुकारते था,
कांग्रेस ने 1931 में स्वतंत्र भारत के राष्ट्र ध्वज बनाने के
लिए एक समिति का गठन किया था इस समिति ने
सर्वसम्मति से #चरखा अंकित भगवा वस्त्र को भारत का
राष्ट्र ध्वज के डिजाइन को मान्यता दी किन्तु गांधी जी
की जिद के कारण उसे बदल कर तिरंगा कर दिया गया
जब #सरदार_वल्लभ_भाई_पटेल के नेतृत्व में सोमनाथ
मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया तब गांधी जी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य
भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव
को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला
भारत को स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान को एक समझौते के तहत 75 करोड़ रूपये देने थे भारत ने 20 करोड़ रूपये
दे भी दिए थे लेकिन इसी बीच 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण से क्षुब्ध होकर 55 करोड़ की राशि न देने का निर्णय लिया |
जिसका #महात्मा_गांधी ने
विरोध किया और #आमरण_अनशन शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप 55 करोड़ की राशि भारत ने पाकिस्तान
को दे दी महात्मा गांधी भारत के नहीं अपितु पाकिस्तान
के राष्ट्रपिता थे जो हर कदम पर पाकिस्तान के पक्ष में
खड़े रहे फिर चाहे पाकिस्तान की मांग जायज हो या
नाजायज गांधी ने कदाचित इसकी परवाह नहीं की
उपरोक्त घटनाओं को #देशविरोधी मानते हुए #नाथूराम
गोड़से जी ने महात्मा गांधी की हत्या को न्यायोचित
ठहराने का प्रयास किया,
#नाथूराम ने न्यायालय में स्वीकार किया कि माहात्मा गांधी बहुत बड़े देशभक्त थे उन्होंने निस्वार्थ भाव से देश सेवा की
मैं उनका बहुत आदर करता हूँ लेकिन किसी भी देशभक्त
को देश के टुकड़े करने के एक समप्रदाय के साथ पक्षपात करने की अनुमति नहीं दे सकता हूँ गांधी की हत्या के
सिवा मेरे पास कोई दूसरा उपाय नहीं था!!
#नाथूराम_गोड़सेजी द्वारा अदालत में
दिए बयान के मुख्य अंश,
मैने गांधी को नहीं मारा
मैने गांधी का वध किया है,
वो मेरे दुश्मन नहीं थे परन्तु उनके निर्णय राष्ट्र के
लिए घातक साबित हो रहे थे,
जब व्यक्ति के पास कोई रास्ता न बचे तब वह मज़बूरी
में सही कार्य के लिए गलत रास्ता अपनाता है,
मुस्लिम लीग और पाकिस्तान निर्माण की गलत निति
के प्रति #गांधी की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने ही मुझे
मजबूर किया,
पाकिस्तान को 55 करोड़ का भुगतान करने की
गैरवाजिब मांग को लेकर गांधी अनशन पर बैठे..
बटवारे में पाकिस्तान से आ रहे हिन्दुओ की आप बीती
और दुर्दशा ने मुझे हिला के रख दिया था,
अखंड हिन्दू राष्ट्र गांधी के कारण मुस्लिम लीग
के आगे घुटने टेक रहा था,
बेटो के सामने माँ का खंडित होकर टुकड़ो में बटना
विभाजित होना असहनीय था,
अपनी ही धरती पर हम परदेशी बन गए थे,
मुस्लिम लीग की सारी गलत मांगो को
गांधी मानते जा रहे थे,
मैने ये निर्णय किया कि भारत माँ को अब और
विखंडित और दयनीय स्थिति में नहीं होने देना है
तो मुझे गांधी को मारना ही होगा
और मैने इसलिए गांधी को मारा!!
मुझे पता है इसके लिए मुझे फाँसी ही होगी
और मैं इसके लिए भी तैयार हूं,
और हां यदि मातृभूमि की रक्षा करना अपराध हे
तो मै यह अपराध बार बार करूँगा हर बार करूँगा,
और जब तक सिन्ध नदी पुनः अखंड हिन्द में न बहने
लगे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन नहीं करना!!
मुझे फाँसी देते वक्त मेरे एक हाथ में केसरिया ध्वज
और दूसरे हाथ में #अखंड_भारत का नक्शा हो,
मै फाँसी चढ़ते वक्त अखंड भारत की जय
जयकार बोलना चाहूँगा!!
हे भारत माँ मुझे दुःख है मै तेरी इतनी
ही सेवा कर पाया!!
#नाथूराम_गोडसे
एक Gynaecologist अपने पूरे जीवन में यह कुछ lines पढ़ती हैं और आजीवन इन Lines के सहारे कमाती हैं ।
वह Lines क्या हैं , यह हैं :-
1. अरे बच्चे के गले में नाल फँस गयी है , Operate करना पड़ेगा ।
2. अरे बच्चे ने पॉटी कर दी है , condition Critical है , Operate करना पड़ेगा ।
3. बच्चे का पानी सूख गया , Operate करना पड़ेगा ।
4. बच्चा उल्टा हो गया , जच्चा बच्चा बचाने के लिए Operate करना पड़ेगा ।
5. बच्चे का Weight बहुत ज्यादा है , Operate करना पड़ेगा ।
6. बच्चा हिल नहीं रहा है , operate करना पड़ेगा ।
7. समय से ऊपर हो गया , Labour pain नहीं आया , Operate करना पड़ेगा ।
8. बच्चा नहीं निकल रहा है , Operate करना पड़ेगा ।
9. Labour Pain बन्द हो गया ( जो स्वयं वह Epidural injection देकर करते हैं ) , Operate करना पड़ेगा ।
10. इतने पढ़े लिखे होकर भी तुम अपनी Wife की डिलीवरी Normal करवाओगे ।। Operate करना पड़ेगा ।
तुम अब लेकर आ रहे हो अपनी Wife को !!!! पढ़ने लिखने का क्या फायदा ??
और हर महीने Ultrasound और भर भर कर हज़ारों की Medicines जिनके बिना भ्रूण बनेगा ही नहीं , यह ऐसे दिमाग में भरती हैं ।
यह 10 सूत्रीय महामंत्र हैं , जिनसे पूरे जीवन भर एक Doctor अपने सात पुश्तों का इंतजाम कर लेता है ।
और यह 10 सूत्रीय महामंत्र एकमात्र बोगे हिंदुओं पर ही कार्य करता है ।
क्योंकि यह जानते हैं कि यह बहुत ही भयाक्रांत प्रजाति है और वर्षों की गुलाम प्रजाति रही है ।
इनका यह 10 सूत्रीय महामंत्र कभी भी बुरका नशीन ख़ातूनों पर प्रभाव नहीं डाल पाता ।।
मुस्लिम औरतें 10 10 बच्चे बिना चीड़ फाड़ के पैदा करती हैं जो फौलाद किस्म के होते हैं ।
और वहीं डरपोक हिंदुओं के एक ही बच्चा होगा वह भी पेट फाड़कर और असंख्य chemical दवाईयों से निर्मित होते हैं और पूरे जीवन भर मोम के पुतले बनकर रोगी बनकर असंख्य chemical दवाईयों पर निर्भर रहकर विदेश में बस जाते हैं ।
कभी देख लेना जहाँ 90 प्रतिशत हिंदुओं के बच्चे सब दवाईयाँ खा खाकर पेट फाड़कर जन्म लेते हैं और मात्र 1% ख़ातूनों के बच्चे Operation से पेट फाड़कर पैदा होते हैं ।
यह क्यों है , यह सभी लोगों को गहनता से विचार करना चाहिए ।
हिंदुओं के लिए भगवान मूर्ख है जिसने स्त्रियों को वह Aperture दिया जहाँ से बच्चे जन्मते हैं ।
इनके लिए Doctor भगवान है जो पेट फाड़कर अप्राकृतिक तौर पर बच्चे निकालते हैं ।
विश्व में एकमात्र मनुष्य का ही और उसमें से हिंदुओं के ही बच्चे होते हैं जो पेट फाड़कर पैदा किये जाते हैं ,बाकी के विश्व के सभी जीवों के बच्चे प्राकृतिक रूप से वहीं से पैदा होते हैं , जहाँ से उन्हें होना चाहिए ।
हिंदुओं की इतनी निर्भरता Doctors पर देखकर लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब यह गर्भाधान भी Doctors से ही करवायेंगे और स्वयं कमरे के बाहर बैठ कर इन्तेजार करेंगे ।
लेकिन यह अत्यंत सोचनीय विषय है कि ऐसा क्यों है ।
क्यों नहीं हम इसके मूल में जाते हैं ।
क्यों नहीं कभी किसी मुस्लिम औरत का बच्चा फँसता है , क्यों उनके बच्चे के गले में नाल नहीं फँसती है , क्यों क्यों क्यों ₹??
सोचिये सोचिये सोचिये ।
*परम आदरणीय*
*आपका दिन शुभ हो*
*मेरी ओर मेरे परिवार की ओर से आपको व आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं ।*
*लक्ष्मी माता का आशिर्वाद आप सभी पर सदैव बना रहे।*
🙏*आदर सहित 🙏