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🤔 आजकल वो, "मैं देश नहीं बिकने दूंगा" जैसी खूबसूरत बातें नहीं करते !
🤔 अब वो 100 दिन में स्विस बैंकों में जमा काला धन वापस लाने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो सब के खाते में 15-15 लाख रुपए आने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो अपनी गलती निकलने पर चौराहे पर आ कर सजा़ खाने की बात नहीं करते !
🤔 अब वह चीन को लाल आंखें दिखाने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो एक के बदले 10 सर लाने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो जिस देश का रुपया गिरता है उस देश के प्रधानमंत्री की इज्जत गिरती है, ऐसी बातें नहीं करते !
🤔 अब वो देश की गिरी हुई जी. डी. पी. पर मुंह नहीं खोलते
🤔 अब वो "बहुत हुआ नारी पर अत्याचार" वाले नारे नहीं लगाते !
🤔 अब वो भ्रष्टाचारी नेताओं को जेल में डालने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो 100 स्मार्ट सिटी बनाने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो बुलेट ट्रेन की बात नहीं करते !
🤔 अब वो अच्छे दिनों की बात नहीं करते !
🤔 अब वह किसानों की आय दोगुनी करने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो सबको शिक्षा सबको रोजगार की बात नहीं करते।
🤔 अब वो डीजल पेट्रोल के दाम पर बात नहीं करते !
🤔 अब वो वोट देने से पहले गैस सिलेंडर को हाथ जोड़ने वाली सलाह नहीं देते !
🤔 अब वो "रेलवे का निजीकरण नहीं होने देंगे" वाला भाषण नहीं देते !
🤔 अब वो हवाई चप्पल पहनने वालों को हवाई यात्रा कराने की बात नहीं करते !
🤔 अब वो "महंगाई डायन" और "बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार" वाले नारे नहीं लगाते !
🤔 अब वो "मुझे 50 दिन दे दो" वाले जुमले नहीं मारते
🤔 अब वह हर साल 2 करोड रोज़गार देने की बात नहीं करते !
👉 अब वो भव्य राम मंदिर बनने को सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हैं
👉 अब वो अयोध्या, काशी के बाद मथुरा की बारी की बात करते हैं
👉 अब वो हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं
👉 अब वो "पाकिस्तान कंगाल हो गया" जैसे फालतू बात करते हैं
👉 अब वो जिन्ना और पटेल की बात करते हैं
*ऐसा क्यों ?*
*क्योंकि प्रधानमंत्री जी को पता है, धर्म ही ऐसा मुद्दा है जिससे जनता को बार बार मूर्ख बनाया जा सकता है...*
एक दिन गोलमालकर जी पान की दुकान पर मिठाई बांट रहे थे। यादव जी के हाथ मे भी एक टुकड़ा रखा गोलमालकर जी ने और आगे बढ़ गए। पास खड़े आदमी ने बताया कि अपने बेटे का सलेक्शन आईएएस में होने की खुशी में मिठाई बांट रहे हैं। एक बेटा तो पहले ही यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है और अब दूसरा आईएएस बनेगा।
यादव जी के आंखों के सामने कुछ महीनों पहले तक पढ़ाई में जी जान लगाते बेटे की तस्वीर घूम गई।
आंखों में आंसू लिए कभी वो हाथ मे पकड़ी मिठाई को देख रहे थे कभी मिठाई बांटते गोलमालकर जी को।
सबका साथ सबका विकास, जोल से बोलो
जय सिलिलाम...
अजय शुक्ला।
जमीदार ।।
UGC गाइडलाइन का गजट निकलते ही
अंधभक्ति की प्रयोगशाला में तैयार किए गए “श्रद्धालुओं” की आँखें अचानक खुल गई ।🙄
क्यों?
अब वही लोग
जो कल तक “विश्वगुरु” की चरण-वंदना में लोट रहे थे ,
आज उसी अपने नॉन बायोलॉजिकल भगवान को गालियाँ दे रहे हैं।
लेकिन सुनो ज़रा—
तब तुम्हारी ज़बान कहाँ थी जब
किसान डेढ़ साल दिल्ली की सरहदों पर ठंड, लाठी, कीलें और मौत झेल रहा था?
तब तुमने उन्हें खालिस्तानी कहा ।
NEET, SSC जैसे पेपर लीक में युवाओं का भविष्य लुट रहा था?
तब तुमने कहा— “विपक्ष की साज़िश है, कुचल दो।”
अग्निपथ ने जवानों के सपने जला दिए?
तब तुमने कहा— “गोली मार दो, गुंडे हैँ।”
2020 की आर्मी पेंडिंग भर्तियों के बच्चे
बिहार, राजस्थान, यूपी, MP, हिमाचल, पंजाब से
दिल्ली की सड़कों पर धक्के खा रहे थे?
तब तुम्हें उनकी चीखें नहीं सुनाई दीं
क्योंकि उनमें तुम्हारे बच्चे नहीं थे।
बिहार और दूसरे राज्यों में युवा अपने हक़ के लिए उठे?
तुमने उन्हें आग लगाने वाला बता दिया।
उत्तराखंड में अंकिता के न्याय के लिए पूरा राज्य उबल रहा था?
तुमने चुप्पी साध ली,
उल्टा बलात्कारियों के पक्ष में कुतर्क गढ़े।
संविधान, वोट चोरी, महँगाई, सुरक्षा पर सवाल उठे?
तुमने सवाल पूछने वालों को
पाकिस्तानी, गद्दार, देशद्रोही बना दिया।
धर्म के नाम पर घर तोड़े गए?
तुम्हें तालियाँ बजाने में मज़ा आ रहा था।
अरावली उजाड़ी गई, आदिवासियों के जंगल बेचे गए?
तुमने बेशर्मी से डिफेंड किया।
सोनम वांगचुक जैसे वैज्ञानिक अपने क्षेत्र के हक के लिए बोले ?
तुमने उन्हें चीन का एजेंट बना दिया।
बताओ—
कब खड़े हुए थे तुम सही के साथ?
कब बोले थे गलत के खिलाफ?
तुम्हारी वफादारी
देश से नहीं,
समाज से नहीं,
संविधान से नहीं,
नागरिकों से नहीं—
तुम्हारी वफ़ादारी सिर्फ
एक फर्जी विश्वगुरु की अंधभक्ति से थी ।
तुम्हे
पढ़े-लिखे, स्किल्ड, बेरोज़गार युवाओं का दर्द नहीं दिखा।
तुमने किसानों की आत्महत्याओं का मज़ाक उड़ाया।
तुम्हें अंकिता जैसी बेटियों की चीखें सुनाई नहीं दीं।
तुम्हारा काम सिर्फ़ यही रहा—
गाली दो,
ठप्पा लगाओ,
देशद्रोही कहो,
पाकिस्तानी बोलो,
चीन का एजेंट, डीप स्टेट, जॉर्ज सोरोस चिल्लाओ।
जो तुम्हारे
नॉन-बायोलॉजिकल भगवान के नैरेटिव में फिट नहीं बैठा
वो तुम्हारा दुश्मन बन गया।
लोकतंत्र से तुम्हें कोई प्रेम नहीं था,
तुम्हें सिर्फ़ अपना भगवान प्यारा था।
तो अब क्यों बिलबिला रहे हो?
अब क्यों रो रहे हो?
जब गलत तुम्हारे साथ हो
तो वो गलत हो गया?
और जब करोड़ों लोगों के साथ अन्याय हो रहा था
तो वो मास्टरस्ट्रोक था?
वाह रे दोगलेपन के देवतावो!
अब चिल्लाओ, रोओ, दीवारों से सिर मारो—
कुछ नहीं बदलेगा।
जिसे तुम भगवान बना चुके थे
उसे तुम्हारे वोट की ज़रूरत नहीं हैँ।
उसने पूरा चुनावी सिस्टम मैनेज कर लिया हैँ।
तुम्हें तब बोलना था
जब संसद से 150 से ज़्यादा सांसद निकाले गए।
जब चुनाव आयुक्त नियुक्ति और इम्युनिटी वाला कानून लाया गया।
लेकिन तब तुम्हें मज़ा आ रहा था।
अब याद रखो—
जिन हाथों को तुम चूम रहे थे ,
अब वही हाथ तुम्हारा गला मसलेंगे।
और तब
तुम्हारे आँसू भी
तुम्हें नहीं बचा पाएँगे।
ये सत्ता की हवस में किसी को नही बख्शेगा
सबका नम्बर आएगा😐
#UGC
#UGCRollback
#WithdrawUGCPolicy
#UGCAgainstStudents
#ReformUGCNow
#SaveStudentsFuture
#EducationUnderAttack
#YouthBetrayed
#AcademicDictatorship
#StudentsNotSlaves
#DemocracyInDanger
#IndiaAgainstInjustice
देखिए मुझे इस 👉 UGC मामले में कुछ नहीं कहना लेकिन UGC कानून का विरोध करने वालों से अगर मुझे कुछ कहना होता तो मैं यह जरूर कहता कि जिस किसी को भी संवैधानिक सरकार द्वारा लाए गए संवैधानिक UGC कानून से दिक्कत है वो नेपाल पाकिस्तान बंगलादेश क्यों नहीं चले जाते 🤔🤔😎😎😃😃🤣🤣
हां कुछ सवाल जरुर है
यूजीसी का विरोध हिंदू कर रहे हैं या मुसलमान ❓🤔
क्यों बे धर्म के नकली ठेकेदार नफरती चिंटूओ सिर्फ एक बिल पास क्या हुआ, अवतार से सीधा तेली- बना दिया तुमने तो अपने Pप्पा को 🙄🤔😎😃😃🤣😂
मोदी का ये मास्टर स्ट्रोक अच्छा नहीं लगा क्या गुफा पुत्र अंधभक्तो ❓❓🤔🤔
जो जिसे अभी तक तुम Pप्पा , या भगवान बनाएं घूम रहे थे अब एकदम से तेली , या दुश्मन हो गए ,🙄🤔😎
कमाल है कल तक Pप्पा Pप्पा करने वाले आज जाति सूचक गालियां दे रहें है,,,🙄🤔😎😎
इन्सान के कर्म और विचार ही
उसे शिखर तक पहुँचाते है
मगर गुफा पुत्र अंधभक्तो तुमने ने तो अपने Pप्पा को ही इतना नीचे गिरा दिया कि एक बिल में कट्टर हिंदू उर्फ तुम अंध भक्तों के Pप्पा उर्फ भगवान से सीधे तेली बना दिया ऐसे कैसे बनेगा रे हिंदू राष्ट्र गुफा पुत्र फर्जी हिंदू लोगों 🤔🤔❓❓😎😎🤣🤣😃😃
15 साल से पैर कोन छू रहा था 🤔🤔❓❓
उसको भगवान किसने बनाया था ❓❓ 🤔 🤔
जब EWS बिल लागू किया गया था तो मोदी भगवान (गुफा पुत्र अंधभक्तो के Pप्पा) हो गए थे अब UGC हुआ तो वही भगवान अब अंध भक्तों को दुश्मन ( उर्फ तेली ) नजर आने लगे 🙄🤔🤓😎🤣😃
सच सच बताना वास्तव मे तुम जैसे अवसरवादी लोगो का कोई बाP था भी या यू ही अवसरवाद देखकर किसी को भी बाP बना लेते हो 🤔🤔❓❓😎😎🤣🤣😃😃
केवल एक यूजीसी बिल के बाद ही पता चल गया अभी तक जो गुफा पुत्र अंधभक्त मैं भी चौकीदार आयेंगा तो मोदी ही मोदी ही मेरे Pप्पा है बोल रहे थे लगता है अब उन सब का भी फर्जी हिंदुत्व का भुत उतर गया...❓🤔
अब गोदी मीडिया के भांD कहां है UGC के फायदे क्यों नहीं गिनवा रहे 🙄🤔🤔❓❓
भDवे भाNडों कब बताना सुरु कर रहे हों कि जो राम को लाए हैं UGC भी तो वही लाए हैं, 🙄😎😎😃😃
एक बिल क्या पास हुआ सीधे।
कट्टर हिंदू से तेली बना दिया वाह रे दोगले भडवो 🤔🙄😎😎🤣🤣😃😃
जो "राम" को लाए हैं वहीं "यूजीसी बिल" भी लाए हैं ।
जय हो मोदी जी! Full support
आदरणीय मोदी जी आप संघर्ष करो असली हिंदू समाज आप के साथ हैं 🚩🫡🚩
जो कल तक दुसरो को बरनौल खरीदने की सलाह देते नजर आते थे...
मोदी जी ने तो उनको वैसेलीन खरीदने का भी मौका नहीं दिया... ढेर दर्द कर रहा होगा बेचारों को सुखे सुखे ही पेल दिया उनके Pप्पा उर्फ नान बायोलॉजिकल महामानव ने ..🙄🤔🤓😎😎🤣🤣😃😃😁😁
हैलिकॉप्टर 🚁🚁 भरकर बरनौल भेज दिया गया है जहां-जहां जरूरत है वहां वहां बरनौल का छिड़काव करवा कर कृपया हेलीकॉप्टर को वापस भेज दें
कथा सुनाते सुनाते
श्रवण दास का की नजर
मां से साथ बैठी एक किशोरी पर पड़ी
श्रवण ने किशोरी की मां से परिचय किया
और फिर किशोरी के मां का नंबर ले लिया
और फिर फोन करने लगा…
एक दिन अचानक
किशोरी के घर पहुंचा
और किराए पर रहने की बात कही
महाराज को कोई मना कैसे करे,
अतः घर वाले तैयार हो गए…
और इस तरह श्रवण, किशोरी के घर में रहने लगा,
और फिर किशोरी को प्रेमजाल में फंसाया,
लंबे लंबे सपने दिखाए…
जब भी घर वाले बाहर जाते,
लड़की संग "ब्लैक कॉफी" पीने लगता…
लड़की से कहता,
तुम लकी हो कि मैं तुम्हें छू रहा हूं
तुम मेरे सामने "कॉफी कप" को न ढाका करो…
आदि आदि…
ये सिलसिला चलता रहा
और वक्त बिताता गया…
इसी बीच किशोरी ने श्रवण महाराज से
विवाह की बात की तो
श्रवण महाराज ने कहा
तुम अभी 17 साल की हो,
अभी शादी नहीं कर सकते…
अभी तुम मेरी सेवा पर ध्यान दो,
जितनी सेवा करोगी, उतना ही फल मिलता जाएगा…
इस बीच जब किशोरी गर्भवती हो गई…
अब श्रवण महाराज गिरफ्तार हो चुका है…
समाचार समाप्त!
#darbhanga
#bihar
#BlackCoffee
कल एक बूढ़ा हनुमान जी के गले में धागा बांधकर उन्हें हवा में उल्टा सीधा लहरा रहा था। लेकिन कपड़ों का रंग और संता क्लॉज की टोपी देखकर तोड़-फोड़ मचाने वाला टनाटनी बिल्कुल आहत नहीं हुआ।
क्योंकि वो उस बूढ़े के गुलाम हैं, उन्हें बुरा सिर्फ उसी चीज में लगता है जिसमें उस बूढ़े को राजनैतिक लाभ होता है।
2025 में नफरत की ये आग अब सिर्फ़ जल नहीं रही—ये हमारे घरों तक पहुँच गई है. हमारे बच्चों की नींद छीन रही है, हमारी माँओं की आँखों में आँसू भर रही है.
दिल टूट जाता है ये पढ़कर: 2024-2025 में 947 से ज्यादा नफरत से जुड़ी घटनाएँ—602 हिंसक हमले, 345 नफरती भाषण, ज्यादातर मुसलमानों और ईसाइयों पर.
BJP से जुड़े नेता 178+ बार नफरत फैला चुके, जिसमें PM मोदी और कई मुख्यमंत्री शामिल
PM मोदी के 60+ भाषणों में “घुसपैठिए”, “ज्यादा बच्चे वाले”, “वोट बैंक” जैसे शब्द—दुनिया ने इसे इस्लामोफ़ोबिक कहा, लेकिन यहाँ तो रोज की जिंदगी बन गई.
योगी आदित्यनाथ जैसे नेता “100 मुस्लिम परिवारों में 50 हिंदू सुरक्षित नहीं रह सकते” जैसा जहर उगलते हैं
सुवेंदु अधिकारी “गाजा जैसा सबक” की धमकी देते हैं, बागेश्वर जैसे बाबा “गृहयुद्ध” की बात करके आग लगाते हैं.
ये सिर्फ़ शब्द नहीं हैं—ये वो चिंगारियाँ हैं जो घर जला देती हैं.
मस्जिदों पर पत्थर, चर्चों में तोड़फोड़, मुस्लिम दुकानों पर लूट, परिवारों को रातों-रात बेघर करना—ये अब खबर नहीं, रोज़मर्रा की ज़िंदगी बन गई.
एक माँ अपने बच्चे से कहती है—“बेटा, बाहर मत निकलना, नाम मत बताना”.
एक पिता रात को जागकर सोचता है—“कल क्या होगा?”
एक बूढ़ी औरत मस्जिद की सीढ़ियों पर बैठकर रोती है—“ये मेरा देश था ना?” हमारा भारत—जो कभी गंगा-यमुना की तरह मिलकर बहता था, राम-रहीम की एकता का गीत गाता था—आज नफरत के इस जहर से डूब रहा है.
क्या यही सपना था? क्या यही वो भारत है जहाँ हर बच्चा बिना डर के बड़ा हो सके? ये दर्द सिर्फ एक समुदाय का नहीं—ये हम सबका है.
हर हिंदू का, मुस्लिम का, सिख का, ईसाई का.
क्योंकि जब एक का घर जलता है, तो पूरे देश की छत पर आग लगती है.
चुप रहना अब गुनाह है.
आँखें बंद करना अब हिस्सा बन जाना है.
आवाज़ उठाओ—क्योंकि प्यार की एक आवाज़ नफ़रत की पूरी फौज को हरा सकती है. भारत हमारा है, सबका.
हम मिलकर इसे बचाएँगे.
नफ़रत नहीं—प्यार से, एकता से, इंसानियत से... #viral #india #viralnews
जब तक आप ‘मुसलमानों को सबक़ सिखाने / दोयम दर्जे का नागरिक बनाने’ के लिए वोट करते रहेंगे तब तक आपको ..
ज़हरीली हवा
यूरेनियम वाला पानी
नक़ली पनीर / खोया / सोया/ अंडे
केमिकल वाले फल / सब्ज़ी
जानलेवा कफ सिरप
नक़ली दवाईयों
ट्रेन दुर्घटना
प्लेन दुर्घटना
इंडिगो जैसी कंपनियों की मनमानी
महंगा पेट्रोल/ डीज़ल
ज़बरदस्ती का E20
टूटी सड़कें
गिरता रुपया
बिकी हुई मीडिया
जर्जराती न्याय व्यवस्था
लचर स्वास्थ्य व्यवस्था
तरह तरह के स्कैम
ख़राब क़ानून व्यवस्था
गुंडागर्दी
भ्रष्टाचार
गिरते पुल
महँगी शिक्षा
महँगा इलाज
भारी भड़कम टैक्स
बिल्डरों/ माफियाओं की मनमानी
खुली सट्टेबाजी
बेरोज़गारी
टूटते पहाड़
उजड़ते जंगल/ नष्ट होता पर्यावरण
… ही मिलेंगे ।
क्यूँकि जब वोट नफ़रत पर होगा , तो काम बेहतर व्यवस्था / विकास पर क्यों होगा ?
स्कूल के हेडमास्टर साहब थोड़े परेशान थे। कारण यह था कि तीसरी कक्षा का एक बालक जिद कर रहा था उसे पाँचवीं क्लास में पढ़ना है क्योंकि वह अपनी क्लास के बच्चों से ज्यादा बुद्धिमान है। समस्या के समाधान के लिए विद्यालय की सबसे बुद्धिमान शिक्षिका को बुलाया गया। उन्होंने कहा वह बच्चे का टेस्ट लेंगी, अगर वह पास हुआ तो उसे भेज दिया जाए पाँचवीं में। हेडमास्टर एग्रीड टू दिस!
मिस पहले कुछ आसान सवाल पूछीं, जैसे- "अफ्रीकी देश सेशेल्स की स्पेलिंग क्या है?" और "स्रोडिंजर वेव इक्वेशन क्या है?", जो बच्चे ने बता दी। अब बारी थी कठिन प्रश्नों की।
शी आस्क्ड, "उस शासक का नाम क्या है जिसने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में देश की अर्थव्यवस्था की लंका लगा दी, राजकोष खाली हो गया, फिर उसने महंगाई एवं टैक्स बढ़ा दिए?"
हेडमास्टर की आँखें चौड़ी हो गईं। वो कहने ही वाले थे कोई गैर-राजनीतिक सवाल प्लीज़ कि बच्चे ने उत्तर दिया- "फ्रांस का लुईस- XVI."
"उस शासक का क्या नाम है जिसने नफ़रत और अंध-राष्ट्रवाद के बल पर सत्ता प्राप्त किया, कैमराप्रेमी के तौर पर विख्यात रहा और उसके समर्थक उसके विरोधियों को गद्दार कहते थे?"
हेडमास्टर साहब फिर चिंतित हो गए। पर बच्चे ने जवाब दिया- "एडाॅल्फ हिटलर।"
"उस शासक का नाम बताओ जिसने देश की प्रचलित करंसी में अचानक बदलाव कर के प्रजा के लिए भारी असुविधा उत्पन्न कर दी थी?"
हेडमास्टर लगभग बेहोश!
चाइल्ड सेड, "मुहम्मद बिन तुग़लक!"
"उस शासक का नाम क्या है जिसपर फेवरिटिज्म का आरोप लगता था क्योंकि उसने बहुत से आकर्षक काॅन्ट्रैक्ट अपने सहयोगियों और मित्रों को दे दिए थे?"
हेडमास्टर जी कुर्सी से गिरने ही वाले थे कि बालक ने उत्तर दिया, "इंग्लैंड का जेम्स द्वितीय।"
"मीडिया उसका केवल गुणगान करती है, प्रेस उसके खिलाफ़ लिखे तो उनपर छापेमारी हो जाती है, हू इज दैट?"
"ही इज़ स्टालिन ऑफ सोवियत यूनियन।"
मिस्ट्रेस ने बालक को पाँचवीं में भेजने की मंजूरी दे दी। परंतु हेडमास्टर ने कहा, "इसको दसवीं में भेजो। लास्ट के पाँच सवालों पर तो मेरा अनुमान भी ग़लत निकला।
जनता मुर्दा हो चुकी है, वह सिर्फ इस्लाम, मुगल और मुसलमान नाम और चेहरा देखकर डरती है और उसमें जान आती है। कब्र में आराम कर रहे शहाबुद्दीन से डरती है , 500-600 साल मर खप गये औरंगज़ेब और बाबर से डरती है।
इन्हें झिंझोड़ना होगा।
राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस की , आप उन्हें पप्पू गप्पू जो भी कहें पर उनके रखे सबूतों को नकार नहीं सकते, मगर यह मुद्दा चुनाव में नहीं है। कोई और देश होता तो नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश बन चुका होता....
सड़क पर उतरना ही होगा , देशव्यापी आंदोलन करना ही होगा , राहुल गांधी को अनिश्चितकालीन आमरण अनशन करना ही होगा क्योंकि यह उनके राजनैतिक जीवन का अंतिम अवसर है और बिहार चुनाव का एक बहुत डरावना परिणाम उनके सामने है...
कल चुनाव आयोग को बचाने के लिए संघ के बुद्धिजीवी मंच विवेकानंद फाउंडेशन ने 272 रिटायर्ड अंकिल लोगों को आगे कर दिया है, यह लोग भारत में इससे पहले कभी किसी विषय पर इतना मुखर नहीं हुए।
इनके पत्र जिसमें सिर्फ राजनीति और राहुल गांधी पर घटिया आरोप है वह भी विवेकानंद फाउंडेशन द्वारा लिखा ही प्रतीत होता है..
इन सब रिटायर्ड अंकिलों का लोकेशन ट्रैक करिए , सब आपको वहीं जाते दिखाई देंगे.. विवेकानंद फाउंडेशन ..जो रिटायर्ड ब्युरोक्रेट्स , रिटायर्ड जज , रिटायर्ड सैन्य अधिकारी, रिटायर्ड पत्रकार , रिटायर्ड बैंकर्स इत्यादि इत्यादि का अड्डा है जिनके संबंधों के ज़रिए वह देश की सभी व्यवस्था में घुसने का काम करती है।
समझिए कि ज्ञानेश गुप्ता को कौन बचा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता अपने पद पर अगले चार साल अर्थात 2029 तक बने रहेंगे और तब तक देश में 32 विधानसभा और 1 लोकसभा का चुनाव होना है...
यह नहीं रुका तो आपके अधिकार ख़त्म हो जाएंगे.... लोकतंत्र खत्म हो जाएगा, संविधान खत्म हो जाएगा क्योंकि जो दिख रहा है उसमें यदि यह सफ़ल हो गये तो भारतीय लोकतंत्र का चीन, रूस और उत्तर कोरिया होना तय है...
राहुल गांधी के पास "अनिश्चितकालीन आमरण अनशन" ही अंतिम विकल्प है, डेडलाइन देकर बैठ जाएं , एक सुत्रीय मुद्दा सिर्फ यह हो कि "ज्ञानेश गुप्ता" को हटाया जाए और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पैनल में पुनः शामिल करके नया निष्पक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया जाए....
रामलीला मैदान की प्रस्तावित रैली में ही इसकी घोषणा कर दें , सत्य को जिता दें , सत्यमेव जयते को सिद्ध कर दें, नहीं तो पश्चिम बंगाल और आसाम भी गया... अगले 32 भी जाएंगे....
क्योंकि उनका लक्ष्य वही है , चीन , उत्तर कोरिया और रूस...
2014 से पूर्व हमारे मोदी जी अपनी रैलियों में चीख-चीख कर इल्जाम लगाते थे कि सोनिया गांधी सरकारी खर्चे से विदेश जाती हैं और अपना इलाज कराती हैं। बकौल मोदी जी के - सरकार ने सोनिया गांधी के ऑपेरशन और व्यक्तिगत यात्राओं पर 1800 करोड़ रुपये फूंके हैं।
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खैर, कभी राजनीतिक शिष्टता का वह दौर भी था, जब 1988 में अटल बिहारी जी के पास अमेरिका जा कर अपनी किडनी का इलाज कराने का पैसा नहीं था। तब इसी महिला सोनिया के पति राजीव गांधी ने जबरिया अटल जी को संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधिमंडल का सदस्य बना कर अमेरिका भेजा था, ताकि वे अपना इलाज करा सकें। आज ये दौर है, जब बीमारी के नाम पर भी घटिया राजनीति की मिसालें बनाई और तोड़ी जाती हैं।
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बहरहाल, विवाद हुआ तो पीएमओ ने पूरी रिपोर्ट दी। पता चला कि सरकार ने सोनिया गांधी की सिर्फ एक यात्रा पर 3 लाख रुपए खर्च किये हैं, उसमें भी वे बेल्जियम एक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने गईं थीं, घूमने नहीं। उसके अलावा सोनिया की यात्रा और इलाज पर कभी भी सरकारी चवन्नी भी खर्च नहीं की गई। अब अगर यह बात गलत होती तो झुठहों का बादशाह तो 11 साल से सत्ता में है। सब सरकारी फाइलें और दस्तावेज उनके पास हैं। कुछ भी साबित कर पाएं हैं क्या? खैर सोनिया तो अब रिटायर हुईं तो अब यही चरित्रहनन की टेक्निक उनके बेटे राहुल गाँधी पर आजमाई जाती है।
"गुप्त रूप से विदेश कहाँ जाता है?"
गुप्त रूप से क्या होता है भैय्या? प्लेन के पहियों पर लटक के जाता है? सूटकेस में छुप कर जाता है? बजरंगी भाईजान की तरह तारों के नीचे से जाता है? पासपोर्ट पर ठप्पा नहीं लगता? इमिग्रेशन क्लियर करे बिना ही जाता है? गुप्त रूप से जाता है, कहने का क्या लॉजिक है?
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"साल में 50 यात्राओं का खर्च कौन देता है?"
अरे पहले डेटा इकट्ठा करो कि कितनी यात्रा सरकारी थी और कितनी निजी? निजी यात्राओं में भी जब कोई संस्थान, यूनिवर्सिटी या कॉलेज आपको व्याख्यान देने बुलाता है तो आपकी टिकट और खर्च भी स्पॉन्सर करता है। पहले डेटा तो लाओ कि 50 यात्राओं में कितनी सैर-सपाटे वाली निजी यात्राएं थी?
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"विदेश में जा कर भारत की बेइज्जती करता है"
भारत की समस्याओं अथवा लोकतांत्रिक ढांचे के कमजोर होने की चिंता व्यक्त करना देशद्रोह नहीं है। वैसे भारत में एक ऐसे व्यक्ति भी हैं, जिनके अनुसार उनके पीएम बनने से पहले, यानी 2014 से पूर्व, लोग भारत में जन्म लेना ही दुर्भाग्य समझते थे। ऐसा कह कर वे भारत का मान बढाते थे क्या?
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तो मित्रों, अगली बार कोई चिरकुट संतरा राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और विदेशी ताकतों से मिलकर साजिशों की बात करे तो उसकी गोबरबुद्धि से भरे मस्तिष्क को दोनों हाथों से पकड़ एक बार जोर से झिंझोड़ कर बस इतना पूछिये:-
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सरकार तेरी, सारी एजेंसियां तेरी, गुप्तचर विभाग तेरा, गृहमंत्री तेरी पार्टी का - अगर राहुल के पास यात्राओं पर खर्च करने के लिए बेनामी और अकूत धन है अथवा वह देश के दुश्मनों से मिलकर साजिशें करता है तो जेल में क्यों नहीं डाल देते इसको?
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11 साल से एक देशद्रोही खुल्ला घूम रहा है - अगर ये सच है तो यह किसका नकारापन है?
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मोदी PM बनने के बाद पड़ोसी देशों को जो खैरात बांटी थी और फिजूलखर्ची की है उसका थोड़ा सा का लेखा-जोखा👇 पढ़ लीजिए...*
*🏵 भुट्टान को 10000 करोड़*
*🏵 मंगोलिया को 70000 करोड़*
*🏵 बांग्लादेश को 15000 करोड़*
*🏵 मोरेसीयस को 5000 करोड़*
*🏵 नेपाल और आफ्रिकी देशो मे 39 अरब*
*🏵 सरदार पटेल स्टेच्यू के लीये 3500 करोड़*
*🏵 उद्योगपतियों का ऋण माफ 5 लाख 55 हजार करोड़*
*🏵 मोदी की विदेश यात्राओं का ख़र्च 2500 करोड़ से ज्यादा*
*🏵 BJP का मुख्यालय का ख़र्च 350 करोड़*
*🏵 मोदी और BJP के विज्ञापन 1,5000 करोड़ से भी ज्यादा*
*🏵 मोदी की सुरक्षा में 24 घंटे का खर्च 1 करोड़ 62 लाख रुपये है। यानी एक साल का 591 करोड़ 30 लाख रुपये*
*🏵 पिछले पांच साल मे कुंभ मेलों का ख़र्च करीब 15000 करोड़*
*🏵 USA प्रेसिडेंट ट्रम्प के स्वागत के लीये 300 करोड़*
*मोदी का पूरा रिपोर्ट कार्ड (अगर गलत लगे तो गुगल पर जाकर देख लेना).....*
*👉 आप यह देखकर चौंक जाएंगे कि पिछले 6 वर्षों में भारत कैसे बदल गया है, इसमेंं अगर कुछ भी गलत लगे तो बताएं... अन्यथा इस सच को स्वीकार करें..*
*1. भारत अब उच्चतम बेरोजगारी दर से पीड़ित है! (NSSO डेटा)*
*2. दुनिया के सभी शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहर अब भारत में हैं! (WHO डेटा)*
*3. भारतीय सैनिकों की शहीद की संख्या 30 वर्षों में सबसे अधिक है! (वाशिंगटन पोस्ट)*
*4. भारत में अब 80 वर्षों में सबसे अधिक आय असमानता है! (क्रेडिट सुइस रिपोर्ट)*
*5. भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खराब देश बन गया है! (थॉमस रॉयटर्स सर्वे)*
*6. उग्रवाद में शामिल होने वाले कश्मीरी युवा इन वर्षों में सबसे ज्यादा हैं! (भारतीय सेना के आंकड़े)*
*7. इस बार भारतीय किसानों को पिछले 18 साल में सबसे खराब कीमत का सामना करना पड़ा है! (WPI डेटा)*
*8. मोदी के पीएम बनने के बाद अब तक की सबसे ज्यादा गाय से जुड़ी हिंसा और रिकॉर्ड मॉबलिंचिंग की घटनाएं हुई हैं। (इंडिया स्पेंड डेटा)*
*9. भारत अब विश्व का दूसरा सबसे असमान देश है! (ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट)*
*10. भारतीय रुपया अब एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा है।(मार्केट डेटा)*
*11. भारत पर्यावरण संरक्षण में विश्व का तीसरा सबसे बुरा देश बन गया है । (EPI 2018)*
*12. भारत के इतिहास में पहली बार विदेशी धन और भ्रष्टाचार को वैद बनाया गया है। (वित्त विधेयक 2019)*
*13. हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री 70 वर्षों में सबसे कम जवाबदेह प्रधानमंत्री हैं। (प्रथम पीएम 0 प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए )*
*14. भारत के इतिहास में पहली बार, CBI बनाम CBI, RBI बनाम Govt, supreme court बनाम Govt के झगड़े इसलिए हुए क्योंकि मोदी सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अपना नियंत्रण चाहते हैं।*
*15. भारत के इतिहास में पहली बार, सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ”लोकतंत्र खतरे में है, हमें काम नही करने दिया जा रहा!”*
*16. भारत के इतिहास में पहली बार, रक्षा मंत्रालय कार्यालय से चोरी हुए शीर्ष गुप्त रक्षा दस्तावेज! (राफेल)*
*17. पिछले 70 सालों में असहिष्णुता और धार्मिक अतिवाद सबसे ज्यादा है!*
*18. भारतीय मीडिया अब तक के वर्षों में सबसे खराब है!*
*19. भारत के इतिहास में पहली बार, अगर आप मोदी सरकार की आलोचना करते हैं, तो आप पर देशद्रोही का लेबल लगता है जो की बहुत शर्मनाक है।*
*👉 इस संदेश में जो कुछ भी कहा गया है, वह जुमला नहीं है। ऊपर दिया गया सभी डेटा 100% सत्यापित फैक्ट्स हैं। आप किसी भी बिंदु पर एक Google खोज करके उन्हें स्वयं सत्यापित कर सकते हैं। हमारे भारत के साथ जो हुआ है उसकी वास्तविकता यही है।*
*मोदी सरकार पिछले 70 वर्षों में सबसे खराब भारत सरकार है। देश को खड़ा करने में या किसी भी तरह का दो कौड़ी का भी योगदान नही है। ऐसे मोदी की सुरक्षा में 24 घंटे का खर्च 1 करोड़ 62 लाख रुपये है। यानी एक साल का 591 करोड़ 30 लाख रुपये।*
*कुछ लोग कहते हैं कि 2019 का चुनाव भारत में होने वाला आखिरी चुनाव है, क्योंकि मोदी ने जीतने के बाद हमारे लोकतंत्र के सभी संस्थानों को अपने नियंत्रण में कर लिया है और एक तानाशाह बन गये हैं।*
*👥 आज "चोर" और "चौकीदार" की बहस के बीच रोज़ी-रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भ्रष्टाचार, कालाधन, नोटबंदी, रोजगार, महंगाई आदि सभी मुद्दें उड़न छू हो गये हैं।*
*लेकिन ये तय है कि जब देश को बर्बाद करने वालों की सूची तैयार होगी तब इन दो वर्गों का नाम सबसे ऊपर होगा...*
*1. बिकाऊ मीडिया*
*2. मूर्ख अंधभक्त (भेड़ें)*
सत्ता पक्ष का हर समर्थक मन ही मन यह जानता है कि उनके देवता जिस प्रकार जीत रहे हैं, वह धांधली के बिना संभव नहीं। चुनाव आयोग और सरकार की खुली मिली-भगत दिखने के बावजूद भक्त मन ही मन हर्षित है। कहता है - मान लिया कि बेईमानी से ही जीतते हैं। उखाड़ लो, जो बस का हो।
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ऐसा कहते समय भक्त भूल जाता है कि केंद्रीय चुनावों में आज भी भाजपा बमुश्किलन 35% मत पाती है, एनडीए को जोड़ लिया जाए तो लगभग 40 प्रतिशत। अर्थात, भाजपा की अपराजेयता के मूल में सबसे बड़ा कारण विपक्ष की फूट है।
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वर्तमान चुनावों के खेल ने विपक्ष को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इन हालातों में चुनाव का कोई अर्थ नहीं है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सत्ता का शिकंजा कसता जा रहा है। आसन्न खतरे को भांप जिस दिन विपक्ष एकजुट हो गया, उस दिन कितनी भी वोटचोरी काम न आएगी। और जिस दिन ये पदच्युत हो गए, विपक्ष सत्ता में आया, उसके बाद सत्ता में बने रहने के लिए विपक्ष वह सब हथकंडे अपनाएगा, जो आज भाजपा अपना रही है। तब किस मुंह से विरोध कीजियेगा? राजनीति में त्याज्य नियमों को आप वैधानिक जामा पहना चुके हैं तो अगला खिलाड़ी भी उन्ही नियमों से खेलेगा। यही मेरे लिए एकमात्र चिंता का विषय है।
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बहरहाल, आज आप मुझे लाखों गाली दे सकते हैं, अपने देवता की अनैतिकता का समर्थन न करने के लिये "देशद्रोही" का तमगा भी खुशी से दे सकते हैं। पर मैं जानता हूँ कि एक दिन आएगा, जब आपकी लगाई आग की तपिश आपको ही झुलसायेगी। सत्ता के बुलडोजर का रुख एक दिन आपकी ओर होगा। तब सांस लेने में तकलीफ होगी, हृदय भय से व्याकुल। तब आपको एहसास होगा कि आपके सर पर ऐसे सर्वशक्तिमान बैठे हैं, जिन्हें अपदस्थ करने का लोकतांत्रिक अधिकार गंवा देने की अनुभूति क्या होती है।
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बहरहाल, ये दौर हो या आने वाले दौर, मैं तो आपसे बस इतना ही वादा कर सकता हूँ कि सामने मोदी हों, या राहुल, या कोई और - बात अगर अन्याय और गलत की होगी तो आपके कंधे पर रखा गया पहला हाथ झकझकिया का ही होगा।
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सत्ता में निष्ठा का निवेश कर पराई सफलता में गर्वबोध हासिल करना निर्बलों, असहायों और कमजोरों की निशानी है। सरकार ये हो, अथवा बदल जाए - झकझकिया आपको हमेशा विपक्ष में ही मिलेंगे।
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धन्यवाद।
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- झकझकिया
शायद आपको याद हो, मई 2020 में कोरोना के दौरान हर प्रदेश से प्रवासी मजदूर पैदल अपने घरों को लौट रहे थे
तब महाराष्ट्र से वापसी के लिये मजदूरों के एक ग्रुप ने रेल मार्ग को चुना, जब चलते चलते थक गए तो रेल की पटरी पर ही ये सोचकर सो गए थे कि रेल सेवा तो बंद है, कोई ट्रेन व्रेन आ नहीं रही है
लेकिन जब वो गहरी नींद में सो गए तो एक मालगाड़ी उनका काल बनकर आई और गहरी नींद में पटरी पर सो रहे 14 मजदूरों को रौंदते हुए निकल गई 😢😢
उनके थैलों में भरी सूखी रोटियां दुर्घटना के बाद ट्रैक पर बिखरी पड़ी थी❓🤔
आज वही मजदूर, वही पटरियां, वही रेलवे और वही देश है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब चुनाव है तो सबको फ्री में टिकट देकर वोट डालने भेजा जा रहा है🙄❓🤦♂️🤦
ये नीचता, स्वार्थ, गिरी हुई राजनीति, नेताओं के दोहरे चरित्र, दोगलापंथी और मतलबपरस्ती की पराकाष्ठा है
🤦🤦
और ऊपर से हम अपने आप को पूरे संसार में सबसे सभ्य पाकसाफ परोपकारी और स्वार्थहीन संस्कृति होने का दम्भ भरते हैं❓❓🤔🤔🤦♂️🤦♂️
देश के बीफ एक्सपोर्ट का आधा हिस्सा लगभग 60% योगी आदित्यनाथ के यूपी से आता है ,यूपी में रोज लगभग दस हजार गाय,भैंस कटती है
अपेडा से अप्रूव्ड देश के कुल 74 कत्लखानों में से 42 यूपी में हैं ये सारा मीट हलाल सर्टिफिकेशन के साथ अरब मुल्कों में एक्सपोर्ट होता है !
और हलाल सर्टिफिकेट का एक रु.भी नही लगता !
इलेक्टोरल बांड से करोड़ों मिल जाते हैं !
26 नवम्बर 2008 का मुंबई हमला मोदी जी याद है क्योंकि वो कांग्रेस शासन काल था लेकिन पिछले 12 सालों में जो हमले आपके प्रधानमंत्री रहते हुए है वो भी तो याद कीजिए ना
क्योंकि जनता ने कांग्रेस से परेशान होकर ही आपको सता की कुर्सी सोंफी थी ये हमले रोकने के लिए , ना की कांग्रेस के समय में क्या हुआ ये बताने के लिए , क्योंकि वो इस देश की जनता को पहले से पता है
मोदी जी आपको याद नहीं तो मै बता देता हूँ
1 मई 2014 को चेन्नई ट्रेन बंब धमाका 1 की मृत्यु 14 लोग घायल
2014 को असम में हुई हिंसा में 33 लोग मारे गए
12 मई 2014 गढ़चिरोली जिले में माओवादी विस्फोट , 7 लोग मारे गए 2 लोग घायल हुए
23 दिसंबर 2014 असम में फिर हिंसा हुई , 85 लोग मारे गए
28 दिसंबर 2014 बंगलौर बंब विस्फोट 1 व्यक्ति मारा गया
20 मार्च 2015 जम्मू हमला , 6 लोग मारे गए 10 घायल
4 से 9 जून 2015 मणिपुर में घात लगाकर हमला चंदेल जिला , मणिपुर 176 लोग मारे गए 15 घायल
27 जुलाई 2015 गुरदासपुर जिले के दीनानगर में गुरदासपुर हमला , 10 लोग मारे गए 15 से ज्यादा घायल
2 जनवरी 2015 गुरदासपुर जिले के दीनानगर में गुरदासपुर हमला , 7 लोग मारे गए
25 जून 2016 पम्पोर , जम्मू और कश्मीर , 8 लोग मारे गए 22 लोग घायल हुए
5 अगस्त कोकराझार , असम हमला 14 लोग मारे गए 15 घायल
18 सितंबर 2016 उरी , जम्मू और कश्मीर , 23 लोग मारे गए 8 लोग घायल
3 अक्टूबर 2016बारामूला , जम्मू और कश्मीर , 5 लोग मारे गए
6 अक्टूबर 2016 हंदवाड़ा में 30 राष्ट्रीय राइफल्स कैंप पर हमला
29 नवंबर 2016 में नग्रोटा सेना अड्डे पर हमला नागरोटा , जम्मू और कश्मीर , 10 लोग मारे गए
7 मार्च 2017 भोपाल-उज्जैन यात्री ट्रेन बम विस्फोट 10 लोग घायल
24 अप्रैल 2016 छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में , 26 लोग मारे गए
11 जुलाई 2017 अमरनाथ यात्रा हमला अनंतनाग , जम्मू और कश्मीर
8 लोग मारे गए 18 लोग घायल
10 फरवरी 2018 सनजुवान हमला सुनजुवान, जम्मू और कश्मीर, 11 लोग मारे गए 15 से ज्यादा घायल
13 मार्च 2018 सुकमा हमला छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में
9 लोग मारे गए
14 फरवरी 2019 पुलवामा हमला अवंतीपोरा , जम्मू और कश्मीर , 40 लोग मारे गए 35 से ज्यादा लोग घायल
7 मार्च 2019 जम्मू बस स्टैंड ग्रेनेड विस्फोट , 3 लोग मारे गए 35 से अधिक घायल
2019 दंतेवाड़ा हमला दंतेवाड़ा , छत्तीसगढ़ 3 लोग मारे गए
9 अप्रैल 2019 2019 दंतेवाड़ा हमला [ 93 ] दंतेवाड़ा , छत्तीसगढ़
9 अप्रैल 2019 किश्तवार में आरएसएस कार्यकर्ता की में हुई हत्या
1 मई 2019 गढ़चिरोली नक्सली बमबारी गढ़चिरोली , महाराष्ट्र
16 लोग मारे गए
12 जून 2019 कश्मीर हमला अवंतीपोरा , जम्मू और कश्मीर
6 लोग मारे गए 4 घायल
21 मार्च 2020 सुकमा माओवादी हमला छत्तीसगढ़ के सुकमा
17 लोग मारे गए 15 लोग घायल
3 अप्रैल 2021 2021 सुकमा-बीजापुर हमला
31 लोग मारे गए 32 लोग घायल
1 जनवरी 2023 राजौरी हमले राजौरी , जम्मू और कश्मीर
7 लोग मारे गए , 12 घायल
8 अप्रैल 2023 एलाथुर ट्रेन आगजनी एलाथुर, कोझिकोड जिला , केरल
3 लोग मारे गए
26 अप्रैल 2023 दंतेवाड़ा बमबारी [ दंतेवाड़ा जिला , छत्तीसगढ़
11 पुलिस कर्मी मारे गए 1 ड्राइवर सहित
29 अक्टूबर 2023 एर्नाकुलम यहोवा के साक्षी सम्मेलन केंद्र विस्फोट कोच्चि
3 लोग मारे गए 36 लोग घायल
1 मार्च 2024 बेंगलुरु कैफे बम धमाका बेंगलुरु
7 लोग घायल हुए
9 जून 2024 रियासी हमला रियासी , जम्मू और कश्मीर
9 लोग मारे गए 41 लोग घायल
22 अप्रैल 2025 पहलगाम हमला पहलगाम , जम्मू और कश्मीर
26 लोग मारे गए 20 लोग घायल
10 नंबर 2025 दिल्ली लाल किला बंब विस्फोट
15 लोग मारे गए 20 लोग घायल
ये सारा आंकड़ा विकिपीडिया से कलेक्ट किया मैने 🙏
वैसे अगर राहुल गांधी विदेश में जाकर कोई आतंकी हमले का जिक्र करे तो , आप लोग कहते हो कि देश की बेइज्जती कर रहा है
वही आप विदेश जाकर आतंकी हमलों पर बोलो तो आतंक पर कड़ा प्रहार बता दिया जाता है
🙏🙏🙏✍️✍️✍️✍️
चितपावन संघी गोलमालकर जी रोज पान की दुकान पर यादव जी से मिलते और वहीं मुल्लों को टाइट करने का राग अलापते।
यादव जी बेचारे दूध बेचकर गुजारा कर रहे थे।
समझ बहुत थी यादव जी में।
खूब समझते थे कि मेरा तो दूध बेचकर गुजारा हो जायेगा पर मेरे बेटे का पढ़ाई के बिना उद्धार नही हो सकता है। इसीलिए यादव जी पेट काटकर बेटे को पढा रहे थे।
थोड़ा बहुत ज्ञान था यादव जी को भी।पर गोलमालकर जी जब भी उनसे मिलते,तो एक टोन बोल ही देते,
"हिंदू खत्म हो रहे हैं। मुल्लों के 50 से ज्यादा देश हैं। हिंदुओं का एक देश भी नही।
पता नही हिंदू इतना स्वार्थी क्यों हो गया है ? कि अपने धर्म की रक्षा छोड़कर इन भौतिक सुख सुविधाओं के चक्कर मे पड़ा रहता है।
मैकाले की बनाई पढ़ाई लिखाई के चक्कर मे पड़ा रहता है हिंदू। ऊपर से इस आरक्षण ने हिंदुओ को जातियों में बांट रखा है। मुल्लों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है।
अगर इन मुल्लों को टाइट नही किया गया तो वो दिन दूर नही जब भारत एक इस्लामी राज्य बन जाएगा। औरंगजेब का समय वापिस आ जाएगा।
जीवन एक ही बार मिलना है।
चाहे खुद के लिए जी लो चाहे धर्म के लिये"
गोलमालकर जी ऐसा कहते हुए नथुने फुलाने की और फुफकारने की अच्छी एक्टिंग करते। बार बार शिवाजी महाराज का नाम लेते ,उनकी बहादुरी का चर्चा बढ़ा चढ़ाकर करते , यादव जी पर धीरे धीरे उनकी बातों का असर हो रहा था।
एक दिन यादव जी की तबियत थोड़ी खराब हुई तो यादव जी का बेटा दूध देने निकला था। उसकी मुलाकात गोलमालकर जी से हुई।बस गोलमालकर जी ने वही राग फिर से अलाप दिया। बेचारे किशोर मन पर हो गया असर उन बातों का।
उसे तो लगा कि ये पढ़ाई लिखाई सब बकवास कर रहा हूँ मैं। हिंदुत्व के प्रति तो अपने धर्म का पालन कर ही नही रहा मैं। गोलमालकर जी ने कुछ पुरानी पतली पतली किताबें भी दी यादव जी के बेटे को। उन किताबो में सैकड़ों साल पहले सो काल्ड हिंदुओ पर हुए अत्याचारों के बारे में बताया गया था। उसे एक ""हिंदू गौरव"" नाम का व्हाट्सएप ग्रुप भी जॉइन करवा दिया।
यादव जी के बेटे को जीवन का लक्ष्य मिल चुका था।
घर आते ही सबसे पहले तो उसने स्कूल की किताबो में आग लगाई। माँ ने पूछा तो कहा कि माँ ये सब मैकाले की बनाई हुई पढ़ाई है।
हमें धर्म से दूर करती है।
हमारा विज्ञान इन अंग्रेजो से लाख गुना आगे था।
मैं उस पुराने गौरव को हासिल करने में अपना जीवन लगाने जा रहा हूँ माँ।
धर्म जिंदा रहे, हम रहे ना रहें।
माँ को बातें अजीब लग रही थी पर चूंकि ज्यादा पढ़ी लिखी नही थी इसीलिए गोलमालकर के सिखाए तर्को से जीत नही पा रही थी।
बाप तो बेचारा ये जान ही चुका था कि जीवन एक ही बार मिलना है, चाहे खुद के लिये जी लो चाहे धर्म के लिये।
बस। उस दिन के बाद तो यादव जी का बेटा शामिल हो गया सनातनी हिंदुत्व सेना में। झंडे में डंडा फिट करने का काम उसे दिया गया जो करना उसने अपना धर्म समझा।
शोभायात्राओ में चलने लगा।
शाम के समय सभाओं में हिंदुत्व को बचाने और इस्लाम से लड़ने के नए नए हथकंडे सीखने लगा।
समय निकलता गया। यादव जी का गुजारा तो अब भी वैसे ही हो रहा था जैसे पहले हो रहा था दूध बेचकर।
एक बार किसी त्यौहार पर शोभायात्रा में यादव जी का बेटा सबसे आगे चल रहा था। रास्ते मे मस्जिद के सामने जोर जोर से नारे शुरू करवाकर हिंदुत्व सेना के पदाधिकारी ने यादव जी के बेटे को झंडा थमा दिया और कहा,
"जा कर दे हिंदुत्व का नाम रोशन।
ले ले बदला सालों के अत्याचार का।
लहरा दे भगवा आज मस्जिद पर।"
बस इतना सुनते ही तो यादव जी के बेटे की रगों में बहता गरम खून उबलने लगा। ऊपर से नारेबाजी ने तो इस आग में घी डालने का काम किया।
चढ़ गया यादव जी का बेटा मस्जिद पर। भगवा लहराकर इस तरह चिंघाड़ मारी कि क्या एवरेस्ट पर चढ़ने वाले प्रथम आदमी ने मारी हो। इतने में माहौल ज्यादा गर्म हुआ। पत्थरबाजी शुरू हो गई।
पता नही कहाँ से एक पत्थर आया और यादव जी के बेटे के सिर और लगा। वो वहीं बेहोश
एक बेजान पुतले की तरह यादव जी के बेटे का शरीर जमीन से आ टकराया।
भगदड़ मच गई।
यादव जी के बेटे को उकसाने वाला पदाधिकारी तो पत्थरबाजी शुरू होने से पहले ही वहां से जा चुका था।
पुलिस आ गई।
एक बुजुर्ग मुस्लिम की नजर यादव जी के बेटे पर पड़ी। उसने एम्बुलेंस को कॉल कर दी। आनन फानन में यादव जी के बेटे को हॉस्पिटल ले जाया गया।
सिर पर पत्थर लगने से नसें मर गई थी जिसके कारण आंखों की दृष्टि जा चुकी थी।
ऊंचाई से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। कमर से नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर चुका था। खटिया पकड़ ली।
सनातनी हिंदुत्व सेना वालों ने सुध तक नही ली।
यादव जी के सिर पर तो पहाड़ टूट पड़ा था। एक ही बेटा था। उसी का ये हाल।
जीवन चलता गया।
ये महज इत्तेफाक तो नहीं हो सकता
बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की अचानक रोड एक्सीडेंट में मौत,CDS विपिन रावत का अचानक प्लेन क्रैश में निधन,गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपानी की प्लेन क्रैश में मृत्यु,और अब अजीत पवार की अचानक बारामती प्लेन क्रैश में मौत,AJIT PAWAR महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम भी थे और आजकल बीजेपी से उनके संबंध ठीक नहीं चल रहे थे सब जानते है ! ये आरोप नहीं है बस बता रहा हु कि कुछ तो है जो सामने नहीं आ रहा है..
एक छोटे से गाँव में रामू नाम का किसान रहता था। रामू की जिंदगी बड़ी सिंपल थी – खेतों में मेहनत, घर में परिवार, और शाम को टीवी पर मोदी-योगी के भाषण सुनकर दिल खुश करना। वो ऐसे ताली बजाता जैसे स्टेडियम में मैच चल रहा हो!
मोदी जी बोलते: "गौ माता की रक्षा हमारा संकल्प है! गौ हत्या पर सख्ती, गाय राष्ट्र की पहचान बनेगी!"
योगी जी थंडर की तरह गरजते: "गौ रक्षा हमारी टॉप प्रायोरिटी! कोई गौ माता को छू भी नहीं सकता!"
रामू टीवी के आगे बैठकर चीयर करता, आँखें चमकतीं, और चिल्लाता: "वाह साहब! अब तो गौ माता सुपर सेफ हैं! जय श्री राम! जय गौ माता!" उसकी बीवी पूछती, "रामू, इतना एक्साइटमेंट क्यों?" रामू हंसकर: "अरे, मोदी-योगी ने प्रॉमिस किया है ना! अब रामराज आएगा!"
फिर एक दिन, रियलिटी ने रामू के दरवाजे पर नॉक किया – वो भी धमाकेदार!
टीवी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का बयान आया। वो गुस्से में बोले: "यूपी में योगी जी सीएम हैं, फिर भी यूपी बीफ एक्सपोर्ट में नंबर वन! केंद्र में मोदी जी, फिर भी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बीफ एक्सपोर्टर! गौ माता का मांस विदेश जा रहा है, और यहां गौ रक्षक सिर्फ शो कर रहे हैं! ये कैसा हिंदुत्व?"
रामू का मुंह खुला का खुला रह गया। सोचा, "शायद फेक न्यूज होगी!" लेकिन उत्सुकता ने गूगल सर्च करवा दिया। और जो निकला, वो रामू के लिए शॉकिंग सरप्राइज!
2025 में भारत ने 1.65 मिलियन टन काराबीफ (भैंस का मांस) एक्सपोर्ट किया, वैल्यू 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा! और यूपी अकेला 43% शेयर के साथ टॉप पर! रामू सोचता रहा, "जो लोग कांग्रेस को 'पिंक रिवोल्यूशन' के लिए कोसते थे, वो खुद बीफ बिजनेस को बूस्ट दे रहे हैं? और चंदा भी ले रहे हैं?"
रामू ने और खोजा तो पता चला कि पूर्वोत्तर के राज्यों में गौ-मांस खाया जाता है और बीजेपी नेता ऐसे बयान दे चुके हैं- जर्सी गाय खाते हैं, देसी गाय नहीं! गोवा में बीफ पार्टी होती है...
रामू का दिल टूटा, लेकिन वो हंसकर बोला:
"वाह रे जुमले! गौ माता की रक्षा के नाम पर एक्सपोर्ट रॉकेट!🚀 हिन्दुस्तानियों को हिन्दू-मुस्लिम में बांटते-बांटते इन्होंने तो गाय को भी देसी और जर्सी में बांट दिया.!😇"
फिर सोचा, चलो महंगाई तो कंट्रोल में है। बाजार गया राशन लेने। टमाटर 120 रुपये किलो, प्याज 80, दाल 220, तेल 190। रामू बोला, "अरे, CPI महंगाई दिसंबर 2025 में सिर्फ 1.33% थी ना?" दुकानदार हंसकर: "भाई, आंकड़े तो कम हैं, लेकिन तेरी थाली का बजट हाई! ये महंगाई की साइलेंट कॉमेडी है!"
महंगाई से रामू को बेटे की जॉब की चिंता सताई। बेटा राहुल अभी भी घर पर, बेरोजगार। रामू बोला, "बेरोजगारी तो 4.8% पर है!" राहुल ने सिर हिलाया: "पापा, आंकड़े 4.8% हैं, लेकिन मेरे लिए 100%! रोज 50 रिज्यूमे भेजता हूँ, जवाब: 'थैंक यू, नेक्स्ट!' लगता है जॉब मार्केट में मैं 'आउट ऑफ स्टॉक' हूं!"
रामू टीवी पर देखता कि मोदी जी विश्वगुरु हैं। लेकिन एक दिन उसने किसी चैनल पर ट्रंप का बयान देखा – ट्रंप बोले, "मैंने दबाव डालकर भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया! भारत ने ट्रेड थ्रेट से डरकर सीजफायर किया!" और रूस से ऑयल खरीदने पर 50% टैरिफ की धमकी! रुपया जनवरी 2026 में 91.55 के पार गिरा। रामू ने सोचा, "विश्वगुरु बनने के बाद भी रुपया क्यों गिर रहा है? ट्रंप का एक ट्वीट, और हमारी करेंसी डाउन!"
अब रामू का न्यूज चैनलों से भरोसा उठ चुका था। समझ गया कि मोदी-योगी के भाषण "जुमलों" की बारिश हैं, और "अधिकांश चैनल सत्ता के फैन क्लब!" आंकड़े दिखाते हैं, लेकिन ग्राउंड रियलिटी हिडन!
गौ माता की फोटो के सामने खड़े होकर रामू बोला: "मां, तेरी रक्षा के नाम पर क्या ड्रामा!
- जुमला: गौ हत्या बंद! हकीकत: बीफ एक्सपोर्ट टॉप गियर! 🐂💨
- जुमला: महंगाई काबू में! हकीकत: आंकड़े लो, थाली हाई! 🍅💰
- जुमला: करोड़ों जॉब्स! हकीकत: बेटा अभी 'अप्लाई मोड' में! 😩
- जुमला: रुपया स्ट्रॉन्ग! हकीकत: ट्रंप की धमकी, 91 पार! 📉"
रामू हंसते हुए: "लगता है गौ माता भी कह रही हैं – बेटा, जुमलों की मूवी मत देख, रियल लाइफ चेक कर!"
अब रामू खेतों में काम करता है और गाँव वालों को बताता है: "भाइयो, टीवी पर भाषण सुनकर डांस करना ठीक है... लेकिन ट्रुथ सामने आए तो लाफ्टर शो बन जाता है! 🐄😂"
और गाँव में रामू का नया नाम पड़ गया है – "जुमला डिटेक्टर रामू"! 😄
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नया भारत: जहाँ 'सवाल' कालकोठरी ले जाता है और 'पाखंड' पुरस्कार! ⚖️
आज की दो तस्वीरों में छिपी कहानी को पहचान लीजिए, वरना आने वाली नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी।
📍 अश्वमीत गौतम: एक ऐसा बच्चा जिसने "गुनाह" कर दिया। उसका गुनाह क्या था? उसने पूछ लिया कि हमें अच्छी शिक्षा और रोजगार कब मिलेगा? उसने पूछ लिया कि सड़कें ठीक क्यों नहीं हैं? उसे साफ हवा और पानी चाहिए था।
नतीजा: FIR और जेल की सलाखें। क्योंकि इस दौर में हक़ माँगना 'बगावत' है।
📍 अभिनव अरोड़ा: एक बच्चा जिसे कैमरे के सामने धर्म, पाखंड और प्रोपेगेंडा का चोला पहना दिया गया। जो मासूमियत की उम्र में नफरत और झूठ की स्क्रिप्ट पढ़ रहा है।
मंच पर कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी जी के हाथों सम्मान। क्योंकि इस दौर में चापलूसी ही सबसे बड़ी 'राष्ट्रसेवा' है।
सीधा सा संदेश है:
अगर आप कलम उठाकर व्यवस्था की खामियों पर सवाल लिखेंगे, तो आपके हाथों में हथकड़ी होगी। लेकिन अगर आप विवेक को गिरवी रखकर अंधभक्ति का ढोल पीटेंगे, तो आपके हाथों में ट्राफी होगी।
यह आईना है आज के भारत की प्राथमिकताओं का जहाँ तर्क (Logic) का गला घोंटा जा रहा है और तमाशे (Spectacle) को सर माथे बिठाया जा रहा है।
सोचिए, आप अपने बच्चों को क्या बनाना चाहते हैं? एक स्वाभिमानी नागरिक जो सवाल पूछे, या एक पालतू 'टूल' जो सिर्फ जयकारा लगाए?
#NewIndia #FreeSpeech #Education #Equality #JusticeForAshwameet #SocialReality
#भारत में यह #प्रचार किया जा रहा है कि #हिंदू खतरे में हैं और एक दिन कोई #मुसलमान आकर आपको मार देगा ! #इसलिए मुसलमान के हाथों मरने के बजाय...
● आप सीवर का दूषित पानी पीकर मर जाइये,
● नकली कफ़ सीरप और जहरीली शराब पीकर मर जाइये,
● धार्मिक स्थलों पर होने वाली भगदड से मर जाइये,
● कोरोना में आक्सीजन न मिलने से मर जाइये,
● लाॅकडाऊन में पैदल चलकर मर जाइये,
● कुंभ मेले की अनियंत्रित भीड़ में कुचलकर मर जाइये,
● प्रदूषित हवा में घुटकर मर जाइये,
● नोटबंदी की लंबी-लंबी लाइन में लगकर मर जाइये,
● हवाई जहाज गिरने से मर जाइये,
● ट्रेन हादसों में मर जाइये,
● भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े पुल गिरने से मर जाइये,
● खाद वितरण की लाइन में लगकर मर जाइये,
● पुलवामा, पहलगाम और लालकिला जैसी प्रायोजित आतंकी घटनाओं में मर जाइये,
● साम्प्रदायिक, जातीय या नस्लीय भेदभाव का शिकार होकर माॅबलिंचिंग से मर जाइये लेकिन...
शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, डीज़ल-पेट्रोल, रसोई गैस, कालाधन, महिला सुरक्षा, शुद्ध हवा-पानी और रुपये की गिरती कीमत पर सरकार से सवाल मत पूछिए,
वर्ना हिंदुत्व खतरे में आ जाएगा और आप देशद्रोही घोषित कर दिए जाएंगे।
लोकतंत्र/संविधान प्रेमी देशवासियों जरा सोचिए...
क्या आपने इसी तरह के विकास, अच्छे दिनों और तानाशाही शासन की कल्पना की थी ?
यदि नहीं तो विचार कीजिए और एकजुट होकर सत्ता को ललकारे कि हम जिसे सत्ता में बिठा सकते हैं, उसे सत्ता से उखाड़कर फेक भी सकते हैं !
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर जी ने कहा था...
जिन हाथों में शक्ति भरी है राजतिलक देने की,
उन हाथों में ही ताकत है सिर उतार लेने की !
🙏🙏#copy #fecbookpost #hindu #muslim #constitution #justice #bahujan #rashtra #chandanyadav #vastvik
#क्रिसमस पर तुम सैंटा पर लाठी बरसाते हो। फिर उम्मीद करते हो कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में तुम्हारे मंदिर न तोड़े जाएं। तुम भी तो यहां वही कर रहे हो।
तुम्हें क्या ये दुनिया अपनी जागीर लगती है कि तुम जुम्मे पर मस्जिद के ऊपर चढ़ जाओगे और मस्जिद में हनुमान चालीसा गाओगे, क्रिसमस पर चर्च में घुसकर हनुमान चालीसा पढ़ोगे और सैंटा पर लाठी बरसाओगे, फिर उम्मीद करते हो कि तुम्हारे साथ दुनिया में कोई ऐसा न करे। और अगर कोई कर देता है तो हिंदू खतरे में आ जाता है।
कल्पना करो कि आज जो तुम सैंटा पर लाठी बरसा रहे हो, कल पश्चिमी देशों में जब तुम गणपति और माता की प्रतिमा विराजित करो और वहां के लोग उन पर लाठियां बरसाने लगें फिर? आज तुम चर्च में घुसकर हनुमान चालीसा पढ़ रहे हो, कल वहां के लोग मंदिरों में घुसकर प्रेयर करें और शैम्पेन खोलें फिर?
तुम विदेशों में नदी किनारे जाकर छठ मनाने लगते हो, यहां सड़कों पर भी क्रिसमस को तैयारी नहीं करने दे रहे। वो तुम्हारी छठ पूजा पर तुममें लाठी भांजे तो तुम इंडिया में चिल्लाओगे की विदेशों में हिंदू भाइयों को धर्म के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है।
तुम सैंटा में लाठी भांज रहे हो तो ठीक, लेकिन जब वो गलती से भी तुम्हारे देवी-देवताओं के प्रिंट वाले चप्पल और कच्छे बना देते हैं तो तिलमिला जाते हो।
अरे भाई, जब तुम उनके ईश्वर का सम्मान नहीं करते तो उनसे क्यों उम्मीद करते हो? वो तो गलती से ऐसा कर लेते हैं और माफ़ी भी मांग लेते हैं। तुम तो जानबूझकर कर रहे हो और कभी माफ़ी नहीं मांगोगे।
बांग्लादेश में हिंदू भाई को जला डाला, वो इंसानियत नहीं थी। लेकिन तुम भी अलग नहीं हो। मौक़ा मिलने पर तुम भी यही करोगे। और तुमने किया भी है। कई लोगों की मॉब लिंचिंग की है।
फिर कहते हो कि #हिंदू को कट्टर मत बोलो। आज जो तुम कहते हो न कि इस्लाम दहशतगर्दों का धर्म है। तुम भी उसी राह पर हो। तुम्हारी ऐसी करतूतें रहीं तो आने वाले कुछ सालों में #मुसलमान के साथ-साथ दुनिया में हिंदू भी शक की निगाह से देखा जाएगा।
ये लोग हिंदू और सनातन का भला नहीं कर रहे हैं। इन जैसे कट्टरपंथी तो सनातन के नाम पर एक काला धब्बा हैं।
मैं तो कहता हूं कि दुनिया में जब भी कहीं हिंदू के ऊपर अत्याचार हो तो सबसे पहले हिंदुत्व के इन कथित रक्षकों को ढूंढ़-ढूंढ़ कर जनता कूटा करे। इन जैसों की ही करनी हिंदुओं को दूसरे मुल्कों में भुगतनी पड़ती है।
कल से मैं देख रहा हूँ कि लोग यह कह रहे हैं कि नीतीश चाचू ने नक़ाब इसलिए हटाया ताकि यह पता चल सके कि पर्दे (नक़ाब) के पीछे असली महिला है या नहीं।
लेकिन क्या इस बात में कोई तर्क या समझदारी है? 🤔😱
मान भी लें कि अगर उन्होंने यही सोचकर नक़ाब हटाया हो, तो भी सवाल यही है — क्या यह काम किसी पुरुष का है?
अगर नक़ाब हटाना ही था, तो किसी महिला की ज़रूरत क्यों नहीं पड़ी?
कोई पुरुष किसी दूसरी महिला का नक़ाब कैसे हटा सकता है?
एयरपोर्ट पर तो सबसे ज़्यादा सुरक्षा होती है, फिर भी वहाँ
महिलाओं की जाँच के लिए अलग महिला सेक्शन होता है,
और महिला की सुरक्षा जाँच की ज़िम्मेदारी हमेशा महिला कर्मी की ही होती है।
क्या आपने कभी सुना है — चाहे स्कूल हो या एयरपोर्ट —
कि किसी महिला की सुरक्षा जाँच कोई पुरुष कर रहा हो?
कभी नहीं सुना होगा।
मुझे सबसे ज़्यादा दुख इस बात का है कि
आज कुछ महिला परिवार भी उस महिला के साथ खड़े नहीं हैं।
जो कुछ उस महिला के साथ हुआ,
वह इन लोगों को गलत तक नहीं लग रहा।
पता नहीं हम किस दिशा में जा रहे हैं।
आख़िर इस नफ़रत का अंत क्या होगा? 😭😢😪 हमेशा ये ही कोशिश करता हूँ की सिर्फ़ अपना सफ़र करूँ लेकिन इस तरह की चीजे दिल को झझकोर देती है 😭😢
'कई बार राजा दशरथ मेरे सपने में आकर कहते हैं कि उठो पुत्र,अपना कार्य पूरा करो। ऐसा लगता है कि मैं भी उनके परिवार का हिस्सा हूं।'
- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
'मेरा तो मन करता है कि श्रीराम मंदिर अयोध्या के ध्वजारोहण के समय मंदिर से मोदी जी की प्रतिमा का अनावरण कर दिया जाए।मोदी जी के जन्म पर भी बारिश हो रही थी, बिजली गड़गड़ा रही थी, जैसे रामावतार हुआ हो।'
-सुधांशु त्रिवेदी , भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता
मोदी जी के अंदर हमने स्वयं राम जी की छवि देखी है ,सपने में।हो सकता है राम अवतार हों मोदी जी।
- धीरेन्द्र शास्त्री,हिंदू राष्ट्रवादी कथावाचक
जब अयोध्या में मोदी जी ध्वजारोहण कर रहे थे,उस समय उनके अंदर हनुमान जी समा गए थे।उनके अंदर हनुमान जी की शक्तियां आ गई थीं।
- मोहन भागवत ,संघ प्रमुख
ये बिलकुल ताजा वक्तव्य हैं। स्वयं मोदी जी से लेकर उनकी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, धीरेन्द्र शास्त्री,संघ प्रमुख सब एक स्वर से एक ही बात कह रहे हैं कि मोदी जी ईश्वरीय अवतार हैं।
और थोड़ा पीछे जाएं तो अमित शाह, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और न जाने किन -किन नेताओं के ऐसे वक्तव्य मिल जाएंगे। लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री जी भी अपने को नान बायोलॉजिकल बताकर अपनी हंसी उड़वा चुके हैं और बीच- बीच में कहते रहते हैं कि ईश्वर ने मुझे एक विशेष उद्देश्य के लिए भेजा है।
ध्यान रखिए संघियों की यह प्रजाति दो- चार -दस प्रतिशत लोगों द्वारा अपनी हंसी उड़ाए जाने से घबराती नहीं।उसका लक्ष्य हिंदुओं की बड़ी आबादी तक अपनी बात पहुंचाना होता है और वह जानती है कि उसकी बात सभी माध्यमों से लोगों तक सत्ता के दम पर पहुंचती है।यह छवि निर्माण ही इस खोखले व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत है वरना इसकी हालत भी आडवाणी जैसी होती!
तो मोदी जी की ईश्वरीय छवि बनाने का उपक्रम खासतौर से लोकसभा चुनाव के बाद से चल रहा है और वह स्वयं भी यह काम वक्तव्यों से ही नहीं मंदिर मंदिर जाकर, वहां अपनी पूजनीय छवि बनाकर,कल अयोध्या में तथाकथित ध्वाजारोहण करके बना रहे हैं और यह काम आगे भी दिन रात चलता रहेगा।
मोदी जी को समझ में आ गया है कि पांच किलो अनाज,बीच- बीच में नकदी सहायता, राममंदिर,धारा 370 हटाना, दुनिया में भारत का डंका बज रहा है,वोट चोरी आदि उपायों से लंबे समय तक उनकी लोकप्रियता बनी नहीं रह सकती।उनकी दैवीय छवि बनानी पड़ेगी,ताकि धार्मिक हिंदू डरे और चुनाव में उन्हें हराने का मतलब ईश्वर को अपमानित करना माने।डरे कि इन्हें हराया तो पता नहीं ईश्वर क्या कहर ढाये कि पापी हिंदुओं तुमने मेरे अवतार को पैदल कर दिया, तुम्हारा सर्वनाश निश्चित है!
इस तरह का प्रयोग भारतीय राजनीति में पहली बार हो रहा है और इस मामले में मोदी, अपने मेंटर लालकृष्ण आडवाणी से सौ कदम आगे है। इसलिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को इस षड़यंत्र से भी निबटने की रणनीति सोचनी होगी और यह काम राहुल गांधी या अन्य किसी की इसी तरह की ईश्वरीय छवि बनाने से नहीं हो पाएगा।इनके खेल में फंसकर बुरी तरह मात ही मिलेगी।मोदी द्वारा बनाई जा रही इस छवि को ़़ध्वस्त नहीं किया गया तो यह खेल लंबा चलेगा और दुनिया में भारत, चीन ही क्या नेपाल और पाकिस्तान से भी पिछड़ता जाएगा और बर्बादी की रामायण लिखता जाएगा।
और अंतिम बात। दशरथ के ये कलयुगी पुत्र - जो राम जी के भाई बनने की कोशिश में हैं- कह रहे हैं कि राजा दशरथ आकर कहते हैं कि उठो पुत्र, अपना कार्य पूरा करो।यह काम क्या है भाई और क्या है जो इन तथाकथित दशरथनन्दन ने पिछले ग्यारह साल में नहीं किया है और अब दशरथ जी के आह्वान पर करना चाहते हैं? इसके गंभीर आशय समझने की कोशिश कीजिए।
झूठ आधारित आंदोलन:-
इस देश की स्वतंत्रता के बाद 4 सबसे बड़े आंदोलन हुए हैं, चारों का आधार झूठ था.. और झूठ साबित हुआ....
पहला था, जेपी आंदोलन, मुख्यतः बिहार के मुसलमान मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर साहब को हटाने से शुरू हुआ और जय प्रकाश नारायण ने नारा लगाया "गाय हमारी माता है - इसको गफुरवा खाता है".. और यह सबसे बड़ा झूठ था..
इस आंदोलन से ही मृतप्राय और गांधी जी की हत्या का कलंक ढो रही आरएसएस और जनसंघ का एक तरह से पुनर्जन्म हुआ और संघ ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जयप्रकाश नारायण ने भी संघ को स्थापित किया...
इस आंदोलन का मकसद जो भी था, परिणाम यह रहा कि इंदिरा गांधी दो साल के अंदर प्रचंड बहुमत से चुन कर आईं और जेपी आंदोलन के सारे उद्देश्य आज तक बने हुए हैं बल्कि स्थितियां और भी बदतर है।
मगर उस आंदोलन से देश सत्ता बदली।
दूसरा आंदोलन विश्वनाथ प्रताप सिंह के द्वारा बोफोर्स तोप और सेंट किट्स बैंक खातों को लेकर हुआ और इसी आरोप में इलाहाबाद के तत्कालीन सांसद अमिताभ बच्चन के लोकसभा से इस्तीफा देने के बाद इलाहाबाद लोकसभा उप चुनाव में मैं प्रत्यक्षदर्शी रहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कैसे कैसे झूठ बोले और एक जगह की सभा की भीड़ शहर के दूसरे मुहल्ले में होने वाली सभा में ट्रांसफर करने के लिए कहते थे कि उनके जेब में एक पर्ची है जिसमें राजीव गांधी के सेंट किट्स बैंक खाते और उसमें जमा ₹64 करोड़ का सारा कच्चा चिट्ठा है , वह मैं थोड़ी देर बाद फला मुहल्ले में होने वाली अपनी सभा में खुलासा करूंगा...
भीड़ एक सभा से दूसरी सभा में ट्रांसफर हो जाती, बहुत छोटी उम्र थी इसलिए बहुत हल्की स्मृति है कि उनकी पीडी टंडन पार्क की सभा से कीडगंज में होने वाली सभा में मैं भी उत्सुकतावश गया था। मगर विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कभी भी वह पर्ची अपनी जेब से नही निकाली।
उच्चतम न्यायालय ने विश्वनाथ प्रताप सिंह के बोफोर्स मामले सहित, सेंट किट्स बैंक तक के सारे आरोप को झूठा करार दिया , और कुछ भी साबित नहीं हो सका।
मगर उस आंदोलन से देश की सत्ता बदली।
इसके बाद तीसरा आंदोलन बाबरी मस्जिद - राम मंदिर को लेकर इस देश में आंदोलन हुआ, आंदोलन जिन मुद्दों और नारों पर था, उन सभी मुद्दों और नारों को बाबरी मस्जिद के बारे में दिए अंतिम फैसले में उच्चतम न्यायालय ने ही झूठा करार दिया, हालांकि अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करके बाबरी मस्जिद की ज़मीन भी उन्हीं को दे दी।
मगर 35 साल राम मंदिर का आंदोलन जिन जिन बिंदुओं और नारों पर हुआ वह सभी उच्चतम न्यायालय में झूठे साबित हुए..
मगर उस आंदोलन से देश की सत्ता बदली..
चौथा आंदोलन अन्ना हजारे द्वारा किया गया और वह भी झूठा साबित हुआ, अन्ना हजारे झूठा साबित हुआ। अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल ने हर मर्ज की दवा "लोकपाल" का ख़्वाब देश को दिखाया और तत्कालीन डाक्टर मनमोहन सिंह की सरकार पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगाए जिसमें 2G , Caol इत्यादि शामिल थे।
उच्चतम न्यायालय में यह सारे आरोप झूठे साबित हुए, और "लोकपाल" का क्या हुआ आप खुद देख लें, खुद अरविंद केजरीवाल के दिल्ली में 10-11 साल मुख्यमंत्री रहते और पंजाब में उनकी पार्टी की सरकार रहते "लोकपाल" किस चिड़िया का नाम है किसी को नहीं पता।
मगर उस आंदोलन से देश की सत्ता बदली..
इन चारों झूठ पर आधारित आंदोलन में तीन बात बिल्कुल कामन थीं, एक तो चारों आंदोलन ने देश की सत्ता बदली और दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चारों आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और तीसरा यह कि चारों आंदोलन का आधार झूठ था....
यह सब राजा हरिश्चंद्र, धर्मराज युधिष्ठिर , मर्यादा पुरुषोत्तम राम, कृष्ण और दुनिया को "सत्य अहिंसा और प्रेम" का सूत्र देने वाले महात्मा गांधी के उस देश में हुआ जहां के राष्ट्रीय चिह्न में "सत्यमेव जयते" लिखा हुआ है।
कहने का अर्थ यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ "झूठ" के आधार पर भी इस देश में बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा करके सत्ता पलट सकती है मगर स्वतंत्रता आंदोलन करने का इतिहास रखने वाली कांग्रेस में वह करंट नहीं कि सच के आधार पर एक वैसा आंदोलन खड़ा कर सके...
"वोटचोरी" वही सच है ...
आप कहेंगे कि "वोटचोरी" मुद्दा बिहार चुनाव में नहीं चला, तो आपको बता दूं कि वह दौर और था जब झूठ पर चार आंदोलन होकर सत्ता पलट दिया जाता था। अब तो नोटबंदी में लाखों बर्बाद करने लाठियां खाने। कोविड में हर घर में दो चार के मरने और अपने परिजनों की लाशों को बालू में गाड़ने , उन्हें कुत्तों द्वारा नोचने के दृश्य पर भी लोग गुस्सा नहीं होते , यह चुनाव में मुद्दा नहीं बनता...
कोई और देश होता तो उलट पलट हो जाता।
2011 में सोनिया गांधी एक गुप्त सर्जरी के लिए अमेरिका गईं थीं। भक्त समाज प्रचारित करता है कि सोनिया गांधी को "सर्वाइकल कैंसर" था - एक ऐसी बीमारी जो यौन संपर्क से फैलती है। अर्थात, "विधवा सोनिया गांधी" के चरित्र पर सीधा आरोप।
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वैसे तो सोनिया गांधी की तरफ से इस बाबत कभी कोई जानकारी नहीं दी गयी है, बीमारी वैसे भी एक नितांत निजी चीज होती है। बहरहाल, अभी के लिए मान लेते हैं कि सोनिया को सर्वाइकल कैंसर ही था।
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सर्वाइकल कैंसर को जन्म देना वाला HPV वाइरस कॉन्टेक्ट में आने के बाद 10-15 साल अथवा उससे भी अधिक समय तक बॉडी में बना रह सकता है। उसके बाद कैंसर टर्न होने में भी 10-15 साल या अधिक समय आराम से लग सकता है। अर्थात - कोई बड़ी बात नहीं कि सोनिया गांधी को यह बीमारी उनके पति राजीव गांधी से ही प्राप्त हुई हो। पर इतना पढ़ने-लिखने का जो प्रयास करे, वह गोबर-भगत क्यों कहलाया जाए? गोबरबुद्धि को तो बस एक "विधवा औरत" के चरित्र का हनन करना है, सो करता है।
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अब मान लेते हैं कि सोनिया को यह बीमारी राजीव की मृत्यु के बाद किसी अन्य व्यक्ति से मिली। तो भी यह मेरे अनुसार यह निजी चीज है। किसी संबंध की परिस्थिति, संदर्भ, पृष्ठभूमि, व्यक्ति की मनोदशा जाने बगैर कोई टिप्पणी कैसे की जा सकती है? अगर महिला का पति नहीं रहा तो क्या वह आजीवन अकेलेपन को भोगने के लिए अभिशप्त है? भाई, लग गया होगा कहीं दिल। हम तुम कहाँ के चौधरी हैं, जो किसी के निजी जीवन पर टिप्पणी करें।
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यौन स्वतंत्रता वैसे भी एक निजी विषय है। अटल बिहारी बाजपेयी खुल कर कहते थे कि - अविवाहित हूँ, पर कुंवारा नहीं। लोग तो लिवइन में रहते हैं पर अटल जी ने एक महिला को उसके पति समेत अपने पास रख लिया था। सब जानते हैं पर क्या कभी किसी कांग्रेसी ने अटल जी का चरित्रहनन किया?
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भक्तों के भगवान स्वयं महात्मा जी एक लड़की की जासूसी कराते रंगे हाथों पकड़े गए। लड़की को चेन लगा कर रखना, 24 घण्टे पीछा करवाना और न जाने तमाम क्या-क्या रंगीले किस्से सुब्रमण्यम स्वामी और कपिल मिश्रा जैसे लोगों ने सुनाए हैं। पर किसी कांग्रेसी ने मोदी का चरित्रहनन फिर भी नहीं किया।
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आखिर सोनिया गांधी का अपराध क्या है? भक्तों के देवता की तरह भिखमंगई करने की बजाय रेस्टॉरेंट में वेटर का काम करना अपराध है? एक व्यक्ति के प्रेम में अपनी संस्कृति को त्याग कर भारत आना, हिन्दू संस्कारों के अनुसार विवाह करना और आजीवन मर्यादित वस्त्रों पहनने का चुनाव अपराध है? भक्तों के महात्मा की तरह अपने परिवार को छोड़ कर भाग जाने की बजाय इटली से आ कर अपने परिवार के लिए सब कुछ न्योछावर कर देना अपराध है? राजनीति से नफरत करने और अपने पति के राजनीति में शामिल होने के सख्त विरोध के बावजूद अपने पूर्वजों की पार्टी की जिंदा करने के लिये उसका राजनीति में उतरना अपराध है? अथवा जीत कर भी अपने विदेशी मूल पर सवाल उठते ही गद्दी छोड़ मनमोहन सिंह जैसे एक योग्य और ईमानदार आदमी को पीएम बना देना अपराध है?
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इसकी भारतीयता पर सवाल उठाने वालों, ये वो महिला है, जिसने भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा गालियां खाईं, चरित्र पर लांछन सहे, बारबाला और वैश्या तक इसे कहा गया - पर उफ्फ न की, कभी कहीं आंसू बहाती न दिखी।
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जिंदगी का पहला आंसू तब गिरा था, जब एक नीच व्यक्ति ने चुनावी लाभ के लिये सार्वजनिक सभा में इस महिला के दिवंगत पति के चरित्र को तार-तार कर दिया था।
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अपने लिए नहीं रोई, पति को किसी ने गाली दी तो आंसू रोक न पाई।
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"भारतीय नारी" होने की इससे खूबसूरत परिभाषा हो सकती है क्या?
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- झकझकिया
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(कमेंट करने से पहले प्रथम Pinned कमेंट पढ़ें)
#बिहार: लानत है RG पर, 'मो शा' की तरह 'परम-पवित्र' चुनाव नहीं लड़ सके..!
बिहार में मो शा एंड कंपनी ने राहुल -तेजस्वी की जोड़ी को धूल चटा दी है।
हर डेढ़ सयाना सबसे ज्यादा राहुल को कोसने में लगा है तो हम भी बहती गंगा में 'हाथ-मुंह' धो लेते हैं।
तो सबसे पहले लानत है राहुल को जो इस तरह चुनाव हारते रहते हैं।
असल में उन्हें चुनाव लड़ने का शऊर ही नहीं हैं चुनाव क्या ख़ाक जीतेंगे।
सयानों ने लाख कमियां गिनाई हैं जिन्हें यहां दोहराने की ज़रूरत नहीं लेकिन कुछ कमियां हम भी गिना देते हैं।
सबसे पहली बात राहुल को सारे 'अनैतिक' तौर तरीके छोड़कर मोदी शाह की तरह 'आदर्श' 'शुद्ध', 'सात्विक', 'परम पवित्र' तरीके से चुनाव लड़ना चाहिए।
ये क्या बात हुई कि आप रोजगार, खुशहाली, विकास आदि की बात करके चुनाव लड़ते हैं..
अरे भई ये 'अमृतकाल' है यहां ये सब नहीं चलेगा..
थोड़ा लुच्चा,लफंगापन, थोड़ी नफ़रत, थोड़ा झूठ, फरेब, चोरी, डकैती के बिना कैसा चुनाव..! हांय..!
अब आइए हम बताते हैं राहुल को क्या क्या करना चाहिए था...
१) सबसे पहले अपना एक चुनाव आयोग बना कर SIR के जरिए 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से उड़वा देने थे।
फिर आवेदन लेकर 16 लाख मनमाफिक वोटर जुड़ने थे।
इसके अलावा पांच लाख वोटर बिना लिखतम पढ़तम के जोड़ना थे।
चुनाव आयोग को खूंटे पर बांध कर रखना था, आदर्श आचार संहिता का आदर्श 'अचार' बना कर डब्बे/बरनी में रख देना था।
राहुल को अपना एक 'सुप्रीम कोर्ट' भी तो बनाना था जो SIR जैसे मुद्दे पर व्यास पीठ पर बैठ कर प्रवचन देता रहता...।
अनिल मसीह को 'लोकतंत्र का हत्यारा' कह कर फिर छुट्टा सांड की तरह खुला छोड़ देता।
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लानत है राहुल इतना सा काम नहीं कर सके।
२) इसके बाद चुनाव की घोषणा से एन पहले महिलाओं के खाते में सीधे दस दस हज़ार रु जमा करवाने थे।
कुल मिलाकर कुछ अरब रुपए ही तो देने थे।
कोई शिकायत करता तो अपने खूंटे पर बंधे चुनाव आयोग से कहलवा देते कि 'ऑन गोइंग स्कीम' है इसलिए बंद नहीं होगी।
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राहुल कुछ अरब रु खर्च नहीं कर सके।
३) राहुल ने पूरे चुनाव में अपने भाषणों में एक बार भी कट्टा, छर्रा, सिक्सर, मुजरा नहीं बोला।
अरे चुनाव लड़ रहे थे तो सड़कछाप छिछोरे जैसी भाषा में डायलॉग नहीं मार सकते थे तो चुनाव काहे लड़ने आए?
क्या बिगड़ जाता अगर एक बार कह देते कि चचा ट्रंप ने 'मो दी की कनपटी पर कट्टा' लगा कर सीजफायर करवाया था।
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राहुल लुच्चों जैसी बोली नहीं बोल सके।
४) चुनाव शुरू होने से पहले कहीं कोई लफंगा उनकी मां को गाली देता और वे हर मंच से आंसू बहाते कि देखो मेरी मां को गाली दी जा रही है।
उनकी पार्टी बिहार बंद करवाती और फिर उसमें गालियां दी जातींं।
पार्टी के प्रवक्ता गोदी मीडिया में छाती फाड़ कर चीखते देखो राहुल की मां को मो शा ने गाली दी है।
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राहुल इतना सा ड्रामा नहीं कर सके।
५) मतदान के दिन कर्नाटक और हिमाचल से रेल में भर भर कर वोट डालने के लिए वोटर भेजने थे।
पार्टी के पदाधिकारी/ कार्यकर्ता जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश या कहीं भी वोट डाल चुके उनके वोट बिहार में डलवाने थे।
ऐसे शूरवीरों के फ़ोटो सोशल मीडिया की शान बनने थे लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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राहुल इतना सा खेल नहीं कर सके।
६) पूरे चुनाव में घुसपैठियों का राग अलापना था।
घुसपैठिए,घुसपैठिए कह कर खुल कर 'हिन्दू मुस्लिम' करना था।
हर सभा में कहना था कि देखो मेरी सरकार है, मेरा गृह मंत्री है फिर भी लाखों घुसपैठिए घुस आए हैं, वोटर बन गए हैं।
कहना था कि मैं और मेरी सरकार महा नकारा हैं इसलिए मुझे वोट दो।
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राहुल न नफ़रत फैला सके और न अपनी नाकामी बता सके।
७) राहुल को अपनी ED, CBI, IT आदि बना कर विरोधी नेताओं की कमर तोड़ देना थी।
कम से कम किसी दूसरे राज्य में किसी विरोधी प्रत्याशी के घर बुलडोजर भिजवा कर उसे मिट्टी में मिलवा देते।
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राहुल इतना सा काम नहीं कर सके।
इन तमाम नैतिक, शुद्ध, सात्विक, परम पवित्र तरीकों से चुनाव लड़ते तो शायद थोड़ा बहुत जीत जाते लेकिन क्या करें राहुल को चुनाव लड़ने का शऊर ही नहीं है।
आप सबसे निवेदन है कि मो शा के सात्विक चुनाव के कुछ और उपाय याद आएं तो यहां जोड़ते जाइए।
वैसे इतना सब कर भी लेते तब भी कुछ नहीं होता क्योंकि 'चाइना गेट' वाला 'जगीरा' कह गया है कि मुझसे लड़ने की हिम्मत तो ले आओगे लेकिन....!
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लेकिन सुनो राहुल,
हजार चुनाव हारते रहना लेकिन
कभी 'मो शा' जैसे मत बन जाना..
कभी उनके जैसे घटिया भाषण मत देना,
कभी उनकी तरह नफ़रत मत फैलाना,
कभी उनकी तरह झूठ मत बोलना,
कभी उनकी तरह वोट चोरी मत करना।
जिस दिन चुटकी भर भी उन जैसे बन जाओगे उस दिन बहुतों की उम्मीदों का दिया बुझ जाएगा।
ऐसे ही जलते रहना,
ऐसे ही चलते रहना।
ऐसे ही बने रहना,
ऐसे ही तने रहना।
इति।
ग़ज़ब है या नहीं…👇👇🙄❓❓🤔🤔
आधार कार्ड - पैन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - राशन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - बैंक अकाउंट से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - स्कूल की परीक्षा से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - गैस सिलेंडर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - मोबाइल नंबर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - नौकरी की हाजिरी से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य किया गया।
लेकिन आधार कार्ड मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) से नहीं जोड़ा गया…
क्यों❓❓🤔🤔
क्योंकि…. 👇👇🙄🙄
आधार से लिंक करने पर एक ही व्यक्ति के डबल / ट्रिपल वोट बंद हो जाएंगे…
एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नामों से किए गए वोट रद्द हो जाएंगे…
फर्जी नामों से मिलने वाले वोट खत्म हो जाएंगे।
जिस तरह राशन कार्ड से फर्जी नाम हट गए,
उसी तरह मतदाता सूची से भी फर्जी नाम हट जाएंगे।
सरकार पैन कार्ड को आधार से न जोड़ने पर ₹10,000 का जुर्माना लगा रही है,
मतलब आपको हर जगह आधार कार्ड चाहिए —
लाडली बहना योजना हो या कोई अन्य सरकारी योजना,
लेकिन सिर्फ मतदान के लिए आधार कार्ड नहीं चाहिए?
लॉकडाउन के समय जब हमने सभी ने वैक्सीन लगवाई थी,
तब सरकार ने आधार कार्ड को वैक्सीन से भी जोड़ा था।
वह काम तो बहुत तेज़ी से हुआ था।
तो फिर चुनाव आयोग की गति कहाँ रुक जाती है…?
जब तक वोट बनाने, काटने ओर डालने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी!चुनाव आयोग संदेह के घेरे में ही रहेगा!
55 साल राज का क्या मतलब है..?? वोट चोर गद्दी छोड़
@चूना-आयोग
◆ आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश और भारतीय अर्थव्यवस्था का दुश्मन है..वरना "हलाल प्रोडक्ट" के ख़िलाफ़ नहीं बोलता..टोटल नॉनसेंस..
◆ जब कि भारत में उत्तरप्रदेश से सब से ज़्यादा बीफ़ एक्सपोर्ट होता है और वो बीफ़ हलाल है..अगर आदित्यनाथ में हिम्मत है तो उत्तरप्रदेश से हलाल बीफ एक्सपोर्ट बंद कर दे..बीफ एक्सपोर्टर मुसलमान नहीं है..
◆ इस वक़्त दुनिया भर में हलाल प्रोडक्ट की डिमांड लगभग 10-12 खरब डॉलर है..अगले 10 सालों में ग्लोबल हलाल मार्केट 25-30 खरब डॉलर होगा..चीन हलाल में लीडर है..(30 खरब डॉलर✌️)
◆ भारत का हलाल एक्सपोर्ट बीफ़, कॉस्मेटिक्स, मेडिसिन, खाने पीने के सामान, मसाले, कपड़े वग़ैरह हैं..'अरब में शायद 70 अरब डॉलर का व्यापार है..करोड़ों भारतीयों की रोज़ी रोटी हलाल मैन्युफैक्चरिंग पर टिकी हुई है..
◆ भारत की सारी FMCG कंपनियां, मेडिसिन, बीफ वग़ैरह सब हलाल बेचते हैं..रामदेव, अदाणी, अंबानी, टाटा, हल्दीराम जैसे बड़े नाम के प्रोडक्ट भी एक्सपोर्ट में हलाल सर्टिफाइड है..
◆ लगभग 100% बड़े भारतीय इंडस्ट्रियल हाउस हलाल सर्टिफाइड है..वरना 'अरब से इन्वेस्टमेंट नहीं मिलेगा और एक्सपोर्ट नहीं होगा..आदित्यनाथ की हिम्मत है तो विदेशी निवेश रोके..
◆ भारत में KFC, WOW Momo, Dominos, इटालियन आइसक्रीम और अनगिनत विदेशी कंपनियां हलाल सामान ही बेचती है..स्टोर पर हलाल सर्टिफिकेट लगे मिलेंगे..
◆ दुनिया की बड़ी से बड़ी पर्सनल केअर, हेल्थ केअर, फ़ैशन प्रोडक्ट्स सब हलाल है..भारत के हर बड़े स्टोर में इन के प्रोडक्ट बिकते हैं..हम भारतीय भी ख़रीदते हैं..
★ मुझे एक बात समझ नहीं आती है कि अगर अमरीका/यूरोप का FDA क़ानून भारत मानता है तो हलाल में क्या दिक़्क़त है?
★ असलियत में भारत हलाल क़ानून मानता है..मगर हिंदुओं को गुमराह करने आदित्यनाथ जैसे लोग हलाल के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी बयानबाज़ी करते हैं..
★ मैंने पहले भी लिखा था कि हलाल इकॉनमी दुनिया में बड़ी ऑपर्चुनिटी है..और भारतीय हलाल प्रोडक्ट्स की दुनिया भर में बड़ी मांग है..
★ भारत सरकार को चाहिए कि हलाल इकॉनमी में भारत का कम से कम 10% हिस्सा तए करे..इस के लिए चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, किसानों और व्यापारियों के साथ मिल कर स्ट्रेटेजी बनाए..ये राष्ट्रहित की बात है
◆ 25-30 खरब डॉलर के मार्केट में 2.5 खरब डॉलर का हिस्सा भारत की इकॉनमी को 9% की ग्रोथ दे सकता है..सपना देखो और साकार करो, विकास करो..
✋ वैसे भी आदित्यनाथ होता कौन है और उस के बयान की कोई अहमियत भी नहीं है..एक्सपोर्ट पॉलिसी भारत सरकार तए करती है और भारत सरकार ने हलाल पर कोई बैन नहीं लगाया है..
👉 अगर भारत को ख़ुद का विदेशी व्यापार बढ़ाना है तो हलाल बेस्ट अल्टरनेटिव है..मोदी का सीना 56 नहीं है मगर हलाल 56 इस्लामिक देशों में भारत का व्यापार खरबों डॉलर में पहुंचा सकता है..जय हिंद
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RSS
और
BJP
भारत की अर्थव्यवस्था क्यों बर्बाद कर रहे हैं
यह समझना हर भारतीय के लिए अनिवार्य है
जानिए क्यों ?
जब आप RSS के संघ संचालक, गोलवलकर की पुस्तक
We Or Our Nationhood Defined
को पढोगे तो समझ जाओगे कि अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना RSS का मुख्य मकसद है
यह गोलवलकर की पुस्तक में विस्तार से बताया गया है
👉 गोलवलकर ने लिखा है कि
हमेशा सत्ता में रहने के लिये 95% देश को बर्बाद करना जरूरी है।
👉 गोलवलकर के नियम के अनुसार
95 % देशवासियों को गरीब बनाया जाता है और चंद गुलाम किस्म लोगों को ही सर्व शक्तिमान बनाया जाता है ऐसा करके हमेशा के लिये सत्ता को हथियाया जा सकता है
यानि सत्ता पर कब्जा बरकरार रखा जा सकता है ।
👉 नोटबंदी,
GST,
बैंकों के एनपीए,
पीएमसी,
सरकारी उपक्रम बेचना,
रोजगार खत्म कर देना,
दंगे करवा कर खरबों की सम्पति को नुकसान पहुंचना,
संविधान को बदल कर कमजोर कर देना,
देश से छोटे व्यापार खत्म कर देना
और
यस बैंक का डूबना और वोडाफोन समेत कई कंपनियों को बर्बाद करके बन्द होने पर मजबूर कर देना
यह सब एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है ।
👉 UNO की रिपोर्ट के अनुसार
2016 से 2018 तक रोज 1095 अमीर भारतीय भारत छोड़ कर विदेशों में बस रहे हैं
इससे खरबों करोड़ रुपये विदेशों में चले गए
यह सब एक बहुत बडी साजिश के तहत किया जा है ।
👉 सरकार की नीतियों के कारण
कई उद्योगपति डिफाल्डर हो गए
जबकि चंद उद्योगपतियों की दौलत सौ गुनी से भी ज्यादा बढ़ गई
ये गुलाम उद्योगपति आप जानते हो अम्बानी अडानी रामदेव तथा BJP के अपने कई खास लोग ।
👉 जिन उद्योगपतियों ने इनकी बात नहीं मानी
उन्हें विदेशों में सैट कर दिया गया और खरबों रुपया उन देशों में इनवेस्ट करने के लिए इन्होंने दिए ताकि वंहां की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सके और तब वे देश इन को हिन्दू राष्ट्र बनाने में UNO में इन्हें वोट दे सकें
इतनी गहराई भारत के आम आदमी को समझ नहीं आएगी।
👉 जरा गौर करो कि
देश की अर्थव्यवस्था डूब रही है और
सरकार के चेहरे पर शिकन भी नहीं है।
👉 इन सभी तथ्यों को मिलाकर देखो
वही जो गोलवलकर ने कहा है की देश को कमजोर करके बर्बाद कर दो ।
👉 अपनी किताब वी और अवर नेशनहुड डिफाइंड में गोलवलकर लिखते हैं:
एक अच्छे प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके राज्य में जनता की आमदनी कम से कम रहे
धनवान नागरिकों पर नियंत्रण करना कठिन होता है
इसलिए दौलत एक दो या ज्यादा से ज्यादा तीन ऐसे लोगों के हाथ में केंद्रित कर दी जानी चाहिए जो प्रशासक के प्रति बफादार हों ।
गोलवलकर के उक्त वचन की कसौटी पर
सरकार की आर्थिक नीतियों को कसकर देखिए
आपकी समझ में आ जायेगा कि झोल कहां है ।
उक्त वचन वी और अवर नेशनहुड डिफाइंड के सातवें संस्करण के पेज नंबर 40 से लिया गया है ।
देश को आखिर बरबाद करने का कारण ये है
🙏🇮🇳भारत की जय 🇮🇳🙏