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Telegram-канал pyari_shayri - प्यारी शायरी

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प्यारी शायरी

लिल्लाह शबो-रोज की उलझन से निकालो
तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यों नहीं देते

किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम
मैं हर्फ गलत हूं तो मिटा क्यों नहीं देते

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प्यारी शायरी

कुछ तो अलग हैं आप में ए मेरे दिलनशीं
हम सरफिरे को यूंही तो भाता नहीं कोई

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प्यारी शायरी

जख्म झेले दाग भी खाए बहुत

दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत

मीर तकी मीर

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प्यारी शायरी

किसी मुहब्बत में, पड़ गया मैं भी
तो भी मुझ को न मिल सका, मैं भी

एक अलाव के गिर्द, बैठे हुए
राख का ढेर हो गया, मैं भी

उमर कटती रही, और आखिर कार
क़ाश दर क़ाश कट गया, मैं भी

रात भर जागती रही, कोई याद
रात भर जागता रहा, मैं भी

दास्तां, इस तरह सुनाई गई
रो पड़ा वो भी, रो पड़ा मैं भी

अपना पहला मलाल, याद आया
याद आया के, जिंदा था मैं भी

अलाव: तापने के लिए लकड़ी
क़ाश: टुकड़ा, हिस्सा

सऊद उस्मानी


✔️ @Pyari_Shayri ✔️

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प्यारी शायरी

हम क्या कहें अहबाब (दोस्त) क्या कार-नुमायां (बड़ा काम ) कर गए

बी ए किया, नौकर हुए, पेंशन मिली फिर मर गए

अकबर इलाहाबादी

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प्यारी शायरी

तुम अपने अकीदों के नेजे
हर दिल में उतारे जाते हो
हम लोग मोहब्बत वाले हैं
तुम खंजर क्यों लहराते हो
इस शहर में नगमे बहने दो
इस शहर में हम को रहने दो
हम पालनहार हैं फूलों के
हम खुशबू के रखवाले हैं
तुम किस का लहू पीने आए हो
हम प्यार सिखाने वाले हैं

अहमद फ़राज़

⭐️ @Pyari_Shayri ⭐️

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प्यारी शायरी

धनक से फूल से बर्ग-ए-हिना से कुछ नहीं होता
बदन सहरा हुए आब-ओ-हवा से कुछ नहीं होता
-इरफ़ान सिद्दीक़ी

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प्यारी शायरी

उम्मीद यार नजर का मिजाज दर्द का रंग

तुम आज कुछ भी न पूछो के दिल उदास बहुत है

फैज़ अहमद फैज़

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प्यारी शायरी

इसे हंसाओ ये मर न जाए
ये मुद्दतों से हंसा नहीं है ....

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प्यारी शायरी

तबाहियों का किसी को निशां दिखाई न दे
कुछ ऐसे आग लगाओ धुआं दिखाई न दे

मेराज फैजाबादी

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प्यारी शायरी

गले लगाएं करें तुम को प्यार ईद के दिन

इधर तो आओ मेरे गुल-'इज़ार ईद के दिन

गुल-'इज़ार – गुलाब-जैसे सुकुमार और कोमल गालोंवाला (वाली), जिस के गाल फूल के रंग के जैसे हों, फूल जैसे गालों वाला

अकबर इलाहाबादी

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प्यारी शायरी

कुछ इहतमाम करूं चांद रात का मैं सहर
तमाम दर्द मेरे जगमगाने लगते हैं

यास्मीन सहर

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प्यारी शायरी

ए दोस्त झूठ आम था दुनिया में इस कदर
तो ने भी सच कहा तो, अफसाना लगा मुझे
मोहसिन!! हुजूम यास में, मरने का शौक भी
जीने का एक हसीन, बहाना लगा मुझे
[ यास: उम्मीद ]

मुहसिन नकवी

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प्यारी शायरी

हम से एक बार भी जीता है न जीतेगा कोई

वो तो हम जान के खा लेते हैं अक्सर

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प्यारी शायरी

तुम सादा मिजाजी से मिटे फिरते हो जिस पर

वो शख्स तो दुनिया में किसी का भी नहीं

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प्यारी शायरी

मैं आ लिखूं तो आ जाए

आमिर अमीर

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प्यारी शायरी

इन दिनों बद लिहाज हूं मैं भी
दोस्त शिकवा न कर किनारा कर
अताउल हसन

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प्यारी शायरी

दिलों से खौफ निकाला गया बचपन में
हमें हवा में उछाला गया था बचपन में

मैं इस लिए भी समझता हूं हिजरतों का दुःख
मुझे भी घर से निकाला गया था बचपन में

हिजरत: देश-त्याग, अपने देश को छोड़कर दूसरे देश में बसना

साजिद रहीम

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प्यारी शायरी

फकीर जादे अना को आवाज दे रहे हैं
चिराग हैं और हवा को आवाज दे रहे हैं

खुदा के बंदों का खूं बहाने की साजिशों में
सब अपने अपने खुदा को आवाज दे रहे हैं

अना: अहंकार, घमंड
आतिश-फ़िशाँ: आग के अंगारे
बरसाने वाला

मेराज फैजाबादी

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मुझे कुबूल हैं, ये गर्दिशें तहे दिल से

रहें जो सिर्फ तेरे बाजूओं के घेरे तक

अनवर शऊर

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प्यारी शायरी

हैरत है के हम लोग भी ठुकराए गए हैं

हम जैसे तो सीने से लगाने के लिए थे

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प्यारी शायरी

तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते
जो वाबस्ता हुए तुम से वो अफ़्साने कहाँ जाते

निकल कर दैर-ओ-काबा से अगर मिलता न मय-ख़ाना

तो ठुकराए हुए इंसाँ ख़ुदा जाने कहाँ जाते

तुम्हारी बे-रुख़ी ने लाज रख ली बादा-ख़ाने की
तुम आँखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी
वगर्ना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते

'क़तील' अपना मुक़द्दर ग़म से बेगाना अगर होता
तो फिर अपने पराए हम से पहचाने कहाँ जाते

कतील शिफाई

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प्यारी शायरी

उस को पढ़ता हूं, रात दिन नासिर

वो जो सूरत, किताब की सी है

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प्यारी शायरी

जिस्म के शहर में एक हश्र मचा देता है
दिल धड़कता है के जीने की सजा देता है
खालिद जावेद जान

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प्यारी शायरी

जिंदगी का एक-एक सांस जो गुजर रहा है जिंदगी को कम कर रहा और उसको समाप्ति के तरफ ले जा रहा है। ये मौजूदा हाल हमें दुःख दे रही है और जहर की तरह है जो आखिर में हमारी जिंदगी खत्म कर देगा। हमें जिंदगी गुजारने के लिए उस जहर की प्रवाह नहीं करनी चाहिए। कलंदरों (फकीरों )की शान यही तो है।
❤️ @Pyari_Shayri ❤️

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प्यारी शायरी

हम ने तुझे देखा नहीं क्या ईद मनाएँ
जिस ने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक
-लियाक़त अली आसिम

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प्यारी शायरी

घर की वहशत से लरजता हूं मगर जाने क्यों?
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है

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प्यारी शायरी

वो सबके सामने इस सादगी से बैठे हैं

के दिल चुराने का उन पर गुमां नहीं होता

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प्यारी शायरी

हम सीधे साधे लोगों के जीने के बहाने होते हैं
वीरान हुई इन आंखों में कुछ ख्वाब सुहाने होते हैं

ये तौर तरीके दुनिया के सब ही को निभाने होते हैं
कुछ जख्म दिखाने पड़ते हैं कुछ जख्म छुपाने होते हैं

हम दर्द छुपाने वाले कभी जब तन्हाई में रोते हैं
कुछ अश्क नवेले होते हैं, कुछ अश्क पुराने होते हैं

पढ़ पढ़ के किताबों के किस्से बस वक्त ही अपना खोया है
कभी देखा है उन चेहरों पर कितने ही फसाने होते हैं

⭐️ @Pyari_Shayri ⭐️

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प्यारी शायरी

और कुछ देर सितारो ठहरो

उसका वादा है जरूर आएगा

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