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Telegram-канал royal_friend - 🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

कैसे कहूं, कैसे कहूं....❤🌸

मैं ठहरा एक अधूरा किस्सा,
वो मुकम्मल सी कहानी है...

कैसे मैं कहूं कि उसका नाम ही मेरी दुनिया है,
उसकी हँसी से ही मेरी शाम सुहानी है...

कैसे मैं कहूं कि उसकी राहों में बिखर जाना है,
मुझे मंज़िल नहीं, बस उसका साथ निभाना है...

कैसे मैं कहूं कि उसकी यादों में घर बनाया है,
हर धड़कन ने उसे अपना ख़ुदा बताया है...

कैसे मैं कहूं कि उसकी आँखों में डूब जाना है,
सारी उम्र के लिए वहीं ठहर जाना है...

कैसे कहूं, कैसे कहूं....❤🌸✨💫

कान्हा 🖤🥀

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

डर लगता है जब तेरा ज़िक्र किसी और के साथ आता है,
मेरे हिस्से का चाँद भी जैसे कहीं और नज़र आता है।
मैंने तो तुझे अपनी दुआओं में बसाया है उम्र भर,
तू किसी और से हँसकर बात करे तो दिल घबराता है।
कहने को तो हक़ नहीं कोई तुझ पर मेरा मगर,
तेरा हर लफ़्ज़ किसी और के नाम हो तो बुरा लगता है।
तू समझे या न समझे ये मोहब्बत की बेचैनी है,
तेरा किसी और का होना ख़यालों में भी रुलाता है।
🖤🥀

कान्हा...✍️

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

लोग समझते रहे कि
मर्द बस ख़ामोशियाँ रखते हैं,

तूने थोड़ा ठहर कर सुना होता,
तो हर ख़ामोशी में एक किस्सा पाया होता।

हम भी हँसते रहे ज़माने की ख़ातिर,
वरना सीने में दर्द का दरिया समाया होता।

जो आँखें तुझे देखकर झुक जाती थीं,
उनमें इश्क़ का पूरा समंदर पाया होता...🤍

कान्हा ✍️

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

हम भी अपने हिस्से के सारे ज़ख्म संभाल लेंगे,
लब पे हँसी रखकर दिल के आँसू टाल लेंगे।

जिस महफ़िल ने ठुकराया, उससे क्या शिकवा करना,
हम वीरान रास्तों को ही अपना हाल कह लेंगे।

जब यादों की बारिश होगी और रात बहुत गहरी होगी,
तेरा नाम लिखकर चुपके से फिर खुद को बहला लेंगे।

दुनिया चाहे लाख पुकारे, हम कम ही बोलेंगे,
अपने दर्द की चादर ओढ़े तन्हा ही डोलेंगे।

जिस दिन रूह थक जाएगी इस झूठी दुनिया से,
तेरी दहलीज़ की मिट्टी को आख़िरी घर बोलेंगे। 🖤🥀

कान्हा

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

तुम्हारी यादों में कट गईं कई स्याह सी रातें,
अब तेरे साथ चाँदनी का सफर चाहिए...♥️

बहुत जी लिए तन्हाई के मौसमों में,
अब बस तेरा साथ हर पहर चाहिए...🥀

Kanha ✍️🥺

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

🥀 मोहब्बत तेरी, सज़ा भी तेरी
फिर भी आदत सिर्फ़ तेरी...✨

Kanha✍💔

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

मुसाफ़िर कुछ वक़्त के लिए ठहरा था,
शायद सफ़र का बोझ भी चेहरा था।

हँसता रहा दुनिया की महफ़िलों में,
अंदर से मगर हर लम्हा बिखरा था।

लोग पूछते रहे हाल मुस्कुराकर,
कौन बताता दर्द कितना गहरा था।ये उसी दर्द और ठहराव वाले लहजे में रखा है।

Kanha

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

जैसे ही सच की बात हुई, पहरेदारी आई है,
हर दरवाज़े पर फिर इक नई सरकारी आई है।

माज़रत मालिक, खेतों से जाकर पूछो हालत क्या,
शहरों तक आते-आते कितनी लाचारी आई है।

मंदिर-मस्जिद बाँट रहे थे ऊपर बैठे लोग मगर,
भूखे बच्चे की आँखों में बस रोटी सारी आई है।

ताज पहनकर बैठा था जो खुद को खुदा समझे था,
वक़्त पड़ा तो उसकी भी बारी-बारी आई है।

लैला-मजनूँ, हीर की बातें सब करते हैं चौपालों में,
इश्क़ जहाँ बदनाम हुआ, पहले नारी आई है।

जूते वाले पाँव बहुत थे, सिर झुकते कम देखे हैं,
इस मिट्टी को हर ज़ुल्म पे फिर खुद्दारी आई है।

जब-जब हमने दर्द लिखा, महफ़िल थोड़ी चुप-सी थी,
लगता है फिर याद कोई ग़ज़ल तगड़ी आई है।

💔🥀

Kanha ✍️🥺

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

मैं चाहूं तो भी तुमको पा नहीं सकता
और ये बात किसी को बता नहीं सकता

मेरा दिल भी ये बात सोचके रोता है
ऐसी क्या मोहब्बत जो जता नहीं सकता

हर रात अब यही हकीकत है कि
एक दिल है जिसकी आंखों में उम्मीद रोती है

मेरा दिल है

जो हो चुका है क्या उस हकीकत को रोता है
या जो न हो सका वो हो जाए इस उम्मीद को रोता है

मेरा दिल नासमझ है मानता नहीं है
मैं चाहूं भी तो तुमको पा नहीं सकता

और ये बात किसी को समझा नहीं सकता......

🥀💔

Kanha ✍️ 🥺

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

रिश्तों की डोर थी, टूट गई हाथों से,
यारी को ही अब यारी की क़सक खा गई।

सपनों की बगिया में खुशियाँ बोई थीं,
मगर उम्मीद की हर फूल की पंखुड़ी खा गई।

घर की चौखट पे बैठा बाप रो पड़ा,
जिम्मेदारी की आग ने उसकी नींद खा गई।

इश्क़ की राह में जो दिल ने जिया,
वफ़ा की राह में ही दर्द ने ज़िंदगी खा गई।

गरीब ने जिए हज़ारों संघर्षों में,
गरीबी और बीमारी ने उसकी साँस खा गई।

औरतों की हँसी में जो रोशनी थी,
परदादारी और अत्याचार ने उसे छाया खा गई।

और आदमी चला नौकरी की तलाश में,
वक़्त की बेरहम चाल ने उसकी खुशियाँ खा गई।

आख़िर में बची सिर्फ़ यादें,
जो हर पल उसकी ज़िंदगी को मौत खा गई… 💔🥃

Kanha✍🥺

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

╔════❀🌹❀════╗
✨ सुनो... ✨
╚════❀🌹❀════╝

बहुत लोग कहते हैं कि ये ऑनलाइन रिश्ते
बस कुछ दिनों के मेहमान होते हैं,
पर जो दिल से जुड़ जाएँ,
वो कहाँ इतनी आसानी से अनजान होते हैं। ❤️

ना कभी हाथ थामा,
ना कभी सामने बैठकर बातें हुईं,
फिर भी कुछ लोग हमारी हर खामोशी से
परेशान होते हैं। 🌸

ना चेहरा देखा,
ना आवाज़ सुनी हर रोज़,
मगर उनके एक "कैसे हो?" से
दिन आसान होते हैं। ✨

जब दुनिया समझ नहीं पाती
दिल के हालात को,
तब वही कुछ शब्द मरहम बनकर
मेहरबान होते हैं। 🤍

कभी एक मैसेज देर से आए
तो दिल बेचैन हो जाता है,
लगता है जैसे अपने ही कहीं दूर
और वीरान होते हैं। 🌙

कुछ रिश्तों का नाम नहीं होता,
कोई पहचान नहीं होती,
फिर भी वही रिश्ते अक्सर
सबसे ज़्यादा जान होते हैं। 💫

कभी हँसी के इमोजी में
छुपा लेते हैं दर्द अपना,
कभी दो लाइनों में बयाँ
सारे अरमान होते हैं। 🌹

ये ज़रूरी तो नहीं कि
हर अपनापन मुलाक़ात माँगे,
कुछ लोग दूर रहकर भी
दिल के सबसे पास होते हैं। ❤️

❀━━━━━━━❀━━━━━━━❀

और...

जब कोई बिना वजह आपकी फ़िक्र करने लगे,
आपकी उदासी में खुद भी उदास रहने लगे,

तो समझ लेना कि वो सिर्फ़ चैट का साथी नहीं,
आपकी दुआओं में शामिल होने वालों में से एक होता है...! ❤️✨🌹

❀━━━━━━━❀━━━━━━━❀

Kanha✍🥀

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

मेरी ज़िंदगी Wi-Fi सी बन गई है अब,
किसी अनदेखे Hotspot से चल रही है अब।

ख़ुद अपने पैरों पर खड़ा था कभी मैं भी,
तेरी यादों के सहारे ही पल रही है अब।

दिल का Network भी अजीब फ़ितरत वाला है,
तू दूर है फिर भी Connection बना हुआ है अब।

हर ख़्वाब तेरा ही Address माँगता है मुझसे,
मेरी हर Search तुझी पर रुक रही है अब।

कभी Full Signal सा महसूस होता है इश्क़,
कभी एक Bar पे साँसें अटक रही हैं अब।

तेरे जाने के बाद ये हाल हुआ है दिल का,
हँसी होंठों पे है, आँखें भीग रही हैं अब।

ना कोई Password, ना कोई Security है यहाँ,
ये मोहब्बत खुले Network सी लग रही है अब।

लोग कहते हैं बदल जाएगा मौसम एक दिन,
मगर तेरी याद हर मौसम में बस रही है अब।

🥺🥀

कान्हा✍💔

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

कुछ चलेगा जनाब, कुछ भी नहीं
चाय, कॉफी, शराब, कुछ भी नहीं

चुप रहें तो कली लगें वो होंट
हँस पड़ें तो गुलाब कुछ भी नहीं

जो ज़मीं पर है सब हमारा है
सब है अच्छा, ख़राब कुछ भी नहीं

इन अमीरों की सोच तो ये है
हम ग़रीबों के ख़्वाब कुछ भी नहीं

मन की दुनिया में सब ही उरियाँ हैं
दिल के आगे हिजाब कुछ भी नहीं

मीरे-ख़स्ता के शेर के आगे
हम से ख़ानाख़राब कुछ भी नहीं

उम्र अब अपनी अस्ल शक्ल में आ
क्रीम, पोडर, खि़ज़ाब कुछ भी नहीं

ज़िन्दगी भर का लेन देन ‘अना’
और हिसाबो-किताब कुछ भी नहीं

अना कासमी

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

तेरा किसी और से यूँ मुस्कुराकर बात करना, मेरे दिल को हर दफ़ा बेचैन कर जाता है...

मैं रोक भी नहीं सकता तुझे किसी हक़ से, मगर ये मन जाने क्यों घबराता है...

तू कहती है ये तो बस बातों का सिलसिला है, मेरा दिल मगर हर बात पे भरम खाता है...

न जाने कैसा रिश्ता है तेरे और मेरे बीच, तुझे खोने का ख़याल भी डराता है...

तू पास रहे तो दुनिया हसीं लगती है, तेरा दूर होना रूह तक रुलाता है...


कान्हा...✍️

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ऊपर वाला खुश रखें उन दिलों को, जिनके दिलों में हम बुरे है.!!
🥀🥺

Kanha ✍️🥺

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इश्क़ की राह में ये रिवाज़ भी होगा,
दर्द मिलेगा मगर ऐतबार भी होगा...

तेरे जाने का ग़म हम छुपा लेंगे मगर,
इन निगाहों में तेरा इंतज़ार भी होगा...

दिल को समझाएँगे कि भूल जाए तुझे,
दिल ही दिल में मगर तेरा प्यार भी होगा...🤍

कान्हा✍

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

परेशान हैं दिल जिनके लिए,
हम तो बस इक किस्सा हैं उनके लिए...

मोहब्बत में क्या-क्या खोया हमने,
ये हिसाब कौन रखेगा हमारे लिए...

वो मुस्कुरा के गुज़र जाते हैं,
जैसे अजनबी हों बरसों से लिए...

हमने तो हर दुआ में माँगा था उन्हें,
और वो दुआ भी न बने हमारे लिए...

टूट कर चाहा था जिस शख़्स को,
वो वक़्त भी न निकाल सका हमारे लिए...

अब दर्द से दोस्ती सी हो गई है,
कोई मरहम नहीं बचा ज़ख्मों के लिए...

एक दिन थक कर छोड़ देंगे सब कुछ,
फिर ढूँढते रह जाओगे हमें अपने लिए...

🖤🥀

Kanha✍

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

बस इसीलिए तेरे शहर से गुज़रा नहीं कभी,
मुझे पता है मेरी आह, ठहर जाती है।

तूने समझा था कि हम टूट के बिखर जाएँगे,
हमारी ख़ामोशी भी अक्सर जवाब बन जाती है।

मैंने बद्दुआ नहीं दी, ये मेरी फ़ितरत ही नहीं,
मगर दिल से निकली बात कहाँ रुक पाती है।

तू छोड़ गया तो कोई शोर भी नहीं हुआ,
बस एक आदत थी जो धीरे-धीरे मर जाती है।

तेरा नाम लिया नहीं आज तक किसी महफ़िल में,
कुछ मोहब्बतें छुपाने से और गहरी हो जाती हैं।

हमसे दुश्मनी भी ज़रा सोच-समझकर करना,
हमारी दुआ कम, मगर बद्दुआ लग जाती है।

Kanha ✍️

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🥀 इश्क़ भी तेरा, दर्द भी तेरा
हम क्या हैं, बस नाम ही मेरा...🖤

Kanha ✍️🥺

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

🥀💔

मेरी मोहब्बत को तुम क्या आज़माओगे,
दिल की हर धड़कन में खुद को ही पाओगे।

मेरी मोहब्बत तो सितारों जैसी है,
क्या तुम उन सितारों को गिन पाओगे।

रातों की ख़ामोशी में मेरा नाम सुनोगे,
चाहकर भी ख़ुद को कहाँ बचा पाओगे।

इश्क़ की राहों में आसान कुछ भी नहीं,
एक क़दम चलोगे तो सौ दर्द उठाओगे।

मैंने हर दुआ में बस तुझको माँगा है,
तुम किसी और को कैसे अपना बनाओगे।

मेरी वफ़ाओं का हिसाब माँगोगे अगर,
उम्र भर काग़ज़ों पर लिखते ही जाओगे।

दूर रहकर भी जो दिल से उतरता नहीं,
उस एहसास को भला कैसे मिटाओगे।

जब कभी तन्हाई का मौसम घिर आएगा,
मेरी यादों के दिए ख़ुद ही जलाओगे।

टूटकर चाहने वालों की यही किस्मत है,
एक दिन मेरी मोहब्बत को समझ जाओगे।

'शायर' की तरह इश्क़ किया है मैंने,
तुम मेरी ग़ज़ल पढ़कर मुस्कुराओगे।

✍🏿 शिवा

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जब-जब सच की बात हुई, मुश्किल खड़ी आई है,
झूठ के दरबारों में हर कुर्सी बड़ी आई है।

रोटी की कीमत पूछो जाकर खाली थाली से,
महलों को क्या ख़बर कि कैसी भूख पड़ी आई है।

माज़रत साहिब, ऊँचे मीनारों पर मत इतराना,
नींव में जाने कितनों की मेहनत गड़ी आई है।

चेहरों पर तहज़ीब लिए फिरते हैं बाज़ारों में,
भीतर देखो हर शख़्स में थोड़ी जड़ी-लड़ी आई है।

इश्क़ की बातें सब करते हैं चौपालों में मगर,
हर प्रेम कहानी में पहले कोई लड़ी आई है।

जूते छोटे पड़ जाते हैं वक़्त के कद के आगे,
तख़्तों पर बैठी हर ताक़त नीचे गिरी आई है।

हमने जब भी सच लिखा, काग़ज़ काँप उठे सारे,
लगता है फिर याद कोई ग़ज़ल तगड़ी आई है।

Kanha✍💔

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किसी को पसंद करना इश्क नहीं होता ...

वो तुम्हें ना मिले उसके बाद भी उसे पसंद करते रहना इश्क है...🥀🩷🤎

अधूरी ख्वाहिशें 🥀

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यूँ तो ख़त्म-सी हो गई है हमारी कहानी,
तुम्हें रूबरू देख पाने की तमन्ना ज़िंदा बची हुई है॥

वक़्त की गर्द में दब गए हैं कई ख़्वाब सारे,
मगर दिल में एक तेरी याद ज़िंदा बची हुई है॥

राहें अपनी बदल गईं, कारवाँ भी बिछड़ गए,
फिर भी मिलने की कोई फ़रियाद ज़िंदा बची हुई है॥

हमने माना कि अब नहीं है कोई रिश्ता दरमियाँ,
पर मोहब्बत की वही बुनियाद ज़िंदा बची हुई है॥

तेरे जाने से ख़ामोशी ने घर कर लिया दिल में,
धड़कनों में मगर तेरी सदा ज़िंदा बची हुई है॥

उम्र भर की शिकायतें भी अब धुंधली पड़ गईं,
एक दीदार की बस मुराद ज़िंदा बची हुई है॥

💔🥀

Kanha ✍️🥺

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"कान्हा" लिखता है दर्द को ग़ज़ल बनाकर,
वर्ना ये ख़ामोशी कब से चीख़ रही है अब।

Kanha ✍️🥺

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

मैं हूँ इक अधूरी सी दास्ताँ,
तुम उसका खूबसूरत अंजाम बनोगी क्या?

मैं हूँ बरसों से प्यासा रेगिस्तान,
तुम मेरी पहली बरसात बनोगी क्या?

मैं हूँ मंदिर की बुझती हुई शमा,
तुम मेरी आरती की लौ बनोगी क्या?

मैं हूँ राह में बिखरा हुआ मुसाफ़िर,
तुम मेरा आख़िरी मुकाम बनोगी क्या?

मैं हूँ चाँद सा तन्हा रातों में,
तुम मेरी चाँदनी बनोगी क्या?

मैं हूँ दर्द को हँसकर छुपाने वाला,
तुम मेरी आँखों की नमी पढ़ोगी क्या?

मैं हूँ टूटी हुई उम्मीदों का घर,
तुम उसमें फिर से सपने सजाओगी क्या?

मैं हूँ शब्दों में उलझा हुआ कवि,
तुम मेरी सबसे हसीन ग़ज़ल बनोगी क्या?

मैं हूँ कृष्ण की बंसी का अधूरा सुर,
तुम मेरी राधा बनकर सुनोगी क्या?

और हाँ...
जब दुनिया छोड़ दे मेरा हाथ,
तुम तब भी साथ निभाओगी क्या?

करता हूँ इश्क़ मैं बेहिसाब तुमसे,
तुम मेरी आख़िरी नहीं,
मेरी हमेशा वाली मोहब्बत बनोगी क्या?

🥺🥀

Kanha✍💔

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🥀💔

वो जो उतरा है मेरी नज़रों से,
कभी उसकी नज़र उतारी थी हमने।

जिसके लहजे में रूह बसती थी,
अपनी ख़ामोशियाँ भी हारी थी हमने।

उसके चेहरे पे एक उजाला था,
अपनी रातों से लौ उधारी थी हमने।

वो जो कहता था साथ मरने का,
उसकी हर बात पर गुज़ारी थी हमने।

एक धागा था ऐतबारों का,
उम्र भर जिसकी रखवाली थी हमने।

जब भी दुनिया ने हमको तोड़ा था,
उसके सीने में पनाह ली थी हमने।

फिर वो बदला तो यूँ बदल बैठा,
जैसे पहचान ही उतारी थी हमने।

अब भी दिल में धुआँ-सा उठता है,
कोई बस्ती कभी सँवारी थी हमने।

अब मोहब्बत भी इक इबादत है,
जिसमें खुद अपनी हार मानी थी हमने।

✍🏿 शिवा

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