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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

💔🥀

अधूरी हसरतें वाला, काश हूँ मैं,
जितना बचा हूँ, एक जिंदा लाश हूँ मैं।

ख्वाबों की चादर में लिपटी हैं सिसकियाँ,
नींदों से दूर, टूटा हुआ सा विश्वास हूँ मैं।

हर मोड़ पर खुद से ही मिलता रहा मगर,
अपनों की भीड़ में कितना उदास हूँ मैं।

दिल ने जो चाहा था, वो कभी मिला नहीं,
किस्मत के हाथों लिखा एक परिहास हूँ मैं।

चेहरे पे मुस्कान, भीतर सन्नाटा गहरा,
खुद अपनी ही रूह का इक अहसास हूँ मैं।

वक्त ने छीन ली हर रंगत जिंदगी की,
अब बस धुंधली सी कोई तलाश हूँ मैं।

अधूरी हसरतें वाला, काश हूँ मैं,
जितना बचा हूँ, एक जिंदा लाश हूँ मैं।

✍🏿 शिवा

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

💔🥀

किसी और को मिल गई उनकी चाहत,
मेरे पास फ़क़त वादे रह गए…

वो जो ख़्वाबों में चमकता था सितारा बनकर,
आज उस रोशनी के बस साए रह गए…

दिल ने हर मोड़ पर उनको ही पुकारा लेकिन,
रास्ते खुद ही तन्हा मोड़ बन के रह गए…

उनकी बातों में बसी थी एक महकती दुनिया,
आज वो लफ़्ज़ भी सूने वीराने रह गए…

हमने चाहा था जिसे जान से भी बढ़कर,
उसके एहसास भी बस अफ़साने रह गए…

वक़्त ने ऐसे भी क्या मोड़ पे ला छोड़ा हमें,
हम मुस्कुराते रहे, ज़ख़्म गहरे रह गए…

✍🏿 शिवा

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

💔🥀

यादें इसलिए नहीं चुभतीं कि वो बुरी थीं,
मसला ये है कि वो हद से ज़्यादा अच्छी थीं।

हमने तो भूल जाने की ठानी थी मगर,
ये कमबख़्त यादें भी ज़िद्दी ही निकलीं थीं।

तुम भी अजीब थे कि चले ही गए यूँ ही,
हम भी अजीब हैं कि अभी तक यहीं थे, यहीं हैं।

वो जो एक लम्हा था, बहुत साफ़, बहुत रोशन,
अब सोचता हूँ—शायद वही मेरी ग़लती थी।

दिल को भी क्या समझाएँ, कि अब कुछ नहीं बाक़ी,
ये जानता है फिर भी उसी बात पे अटका हुआ है।

हाँ, वो जो बहुत अच्छा था—वो गुज़र ही गया,
अब जो है, वो बस जीने की एक आदत-सी है।


✍🏿 शिवा

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इसमे मेरा शायरी बोट को ऐड करना

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💔🥀


गुज़र गई है मगर रोज़ याद आती है,
वो एक शाम जिसे भूलने की हसरत है।

वो शाम जैसे रगों में धुआँ उतर आया,
हर एक साँस में अब जलने की हसरत है।

कभी जो नाम था दिल की धड़कनों का सुकून,
उसी को आज सदा के लिए खोने की हसरत है।

वो जिस्म-ओ-जाँ पे ठहरी हुई-सी ख़ामोशी,
उसी ख़ला में बिखर जाने की हसरत है।

जो ख़्वाब आँख में पनपे थे तेरी आहट से,
उन्हीं को नींद में दफ़नाने की हसरत है।

तेरे ही ज़िक्र से भर जाता है ये सन्नाटा,
मगर उसी को लबों से छुपाने की हसरत है।

ये कैसा दर्द है, जो मर के भी नहीं जाता,
उसी अज़ाब में उम्र बिताने की हसरत है।

वो एक लम्हा, जो सदियों से कम नहीं लगता,
उसी में फिर से ठहर जाने की हसरत है।

‘शिवा’ अब तो ख़ुद से मुलाक़ात भी अज़ाब लगे,
उसी फ़रेब में उम्र बिताने की हसरत है।


✍🏿 शिवा

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💔🥀

ये कैसा इश्क़ था तेरा — न मुकम्मल, न ही आधा,
बस एक लम्हा मिला… और उम्र भर का बिखर जाना।

दिल ने चाहा तुझे जैसे कोई मन्नत अधूरी,
तू मिला भी तो लगा जैसे कोई ख़्वाब ठहर जाना।

तेरे वादों की चमक आज भी आँखों में बसी है,
जैसे बारिश में कहीं धूप का चुपके से उतर जाना।

मैंने हर मोड़ पे चाहा कि तुझे भूल ही जाऊँ,
पर तेरा नाम रहा दिल में धड़कनों सा उभर जाना।

तू गया छोड़ के ऐसे कि कोई शिकवा न रहा,
बस सिखा गया मुझे ख़ुद में ही हर रोज़ बिखर जाना।

अब तो आदत सी है तन्हाइयों से बात करने की,
जैसे वीराने को आता हो खुद से ही सँवर जाना।

"ख़ामोश" दिल ने तुझे चाहा था इतनी शिद्दत से,
कि तेरा दूर भी रहकर मेरे अंदर ही ठहर जाना।


✍🏿 शिवा

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❖━━━✦ अविराम पथ की व्यथा ✦━━━❖


🌿✨

पग-पग पर थकान ने
जब साँसों से संवाद किया,
तब समझ आया—
मंज़िल का सौंदर्य नहीं,
उस तक पहुँचने का संघर्ष
जीवन का सच्चा श्रृंगार होता है।

🌙🍂

कभी धूप ने तपाया,
कभी छाँव ने बहलाया,
पर राहों की कठोरता ने ही
अंतरमन को दृढ़ बनाना सिखाया।

🚶‍♀️💭

ये पथ यूँ ही सरल नहीं होते,
हर मोड़ पर प्रश्न खड़े होते हैं,
और उत्तर वही खोज पाता है—
जो रुककर नहीं,
चलकर स्वयं को गढ़ता है।

🔥🌸

मंज़िल का मिल जाना
सिर्फ़ एक क्षणिक उल्लास है,
पर उस तक पहुँचने की कथा—
जीवन का अमिट इतिहास है।

💫🕊️

इसलिए ऐ पथिक,
जब थकान तुझे रोकने लगे,
तो स्मरण रखना—
हर कठिन डगर के पार ही
तेरी विजय की प्रतीक्षा है।

🌄❤️

❖━━━✦✧✦━━━❖
Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका ✍️✨

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🌺✨ “आँखों का अधिकार” ✨🌺


चेहरों की चमक पर
मोहित तो हर दृष्टि हो जाती है… 🌼

पर आत्मा की आहट सुनकर
जो ठहर जाए—
वही स्नेह का सच्चा साधक होता है। 💫

हँसी के उजालों में
साथ चलने वाले बहुत मिलते हैं,
पर नीरव अश्रुओं की भाषा समझे
वो विरले ही होते हैं… 🌙

प्रेम केवल स्पर्श नहीं,
एक मौन समर्पण है—
जहाँ शब्द कम पड़ जाएँ
और अनुभूति बोल उठे। 🍃

इसलिए तलाश उसे करना,
जो तुम्हारी मुस्कान नहीं—
तुम्हारी खामोशी का भी
अधिकार माँगे… ❤️‍🔥


⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯

✍🏻 Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका 🌷✨

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❝ अपेक्षाओं का बोझ ❞ 🌙


दुख किसी और ने नहीं दिया,
ये सत्य बहुत देर से समझ आया…
हमने ही
अपनी ही उम्मीदों का महल बनाकर,
उसे अपनों के नाम कर दिया। 🥀

हर बार सोचा—
वो समझेंगे बिना कहे,
हर बार चाहा—
वो ठहरेंगे हमारे लिए…
पर ये “हर बार” ही
हमारे अंदर कुछ तोड़ता गया। 💔

लोग तो बस वैसे ही थे,
जैसे सदा से थे…
बदलती रही तो सिर्फ
हमारी आस और आकांक्षाएँ। 🌿

हमने उनके खामोश लम्हों में
अपनी बातें खोज लीं,
उनकी बेरुख़ी को भी
अपने प्रेम का उत्तर मान लिया…
और फिर,
उसी भ्रम में खुद को खो दिया। 🌫️

सच तो ये है—
अपेक्षाएँ जब सीमा लाँघ जाती हैं,
तो संबंध नहीं,
मन के भीतर की शांति टूटती है। 🕊️

अब सीखा है—
रिश्तों को “स्वीकार” करना,
ना कि “शर्तों” में बाँधना…
क्योंकि जो बिना अपेक्षा के साथ दे,
वही सच्चा कहलाता है। ✨

और जो नहीं दे पाए—
उन्हें दोष क्या देना…
वो तो बस
हमारी कल्पनाओं के पात्र थे,
हकीकत के नहीं। 🌙

✍️ — Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका 🌸

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💔🥀

तेरे ही एहसास में जलकर भी देख लिया,
खुद को तेरे नाम से ढलकर भी देख लिया।

एक तेरे होने का भरम था दिल के अंदर,
उस भरम को सच समझकर भी देख लिया।

माँगी थी मोहब्बत हमने झुक-झुक कर बहुत,
आँखों से अपनी अश्क बहाकर भी देख लिया।

कोई नहीं सुनता यहाँ टूटे दिल की सदा,
हमने हर दर पे जाकर भी देख लिया।

जिसको चाहा था जान से ज्यादा कभी,
उसे अपना बनाकर भी देख लिया।

फिर भी खाली ही रहा ये दिल का जहाँ,
सब कुछ पाकर भी खोकर भी देख लिया।



✍🏿 शिवा

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💔🥀

वो लम्हा, वो सफ़र, वो हाल अच्छा ना था
मोहब्बत तो थी मगर ख्याल अच्छा ना था

जिस चेहरे पे ठहर गई थीं मेरी नज़रें
वो एक ही था, बाकी जमाल अच्छा ना था

कुछ ख़्वाब थे जो टूट के बिखरते रहे
दिल को बहलाने का मलाल अच्छा ना था

वो बात थी तेरी जो दिल में उतरती गई
वरना लफ़्ज़ों का कोई जाल अच्छा ना था

हम ढूंढते रहे सुकून तेरी बाहों में
दुनिया का कोई भी कमाल अच्छा ना था

तू पास था तो हर इक दर्द भी हल्का था
तेरे बिना ये जीना भी हाल अच्छा ना था


✍🏿 शिवा

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❝ दृष्टि का दीप ❞ 🪔🌿


जब मन की परिधि बदलती है,
तभी संसार के आयाम
नव रूप धारण करते हैं… 🌸

दुनिया वैसी ही रहती है,
परंतु दृष्टि का दीप जलते ही
हर दृश्य में
एक नया सौंदर्य प्रकट होता है। ✨

कभी जो अंधकार प्रतीत होता था,
वहीं अब अनुभव की उजास बनकर
हृदय को आलोकित करता है… 🌙

जो पहले शिकायतों से भरा था,
वहीं अब स्वीकार का सरोवर बन जाता है,
जहाँ हर पीड़ा
एक शिक्षा में परिवर्तित हो जाती है। 💫

नज़रिया बदलना,
केवल सोच का परिवर्तन नहीं,
यह आत्मा का परिष्कार है,
जहाँ अहंकार गलकर
संवेदनाओं का सृजन करता है। 🌺

जब तुम स्वयं को समझने लगते हो,
तो जगत भी तुम्हें समझने लगता है,
और हर अधूरी कथा
एक सुंदर अंत की ओर बढ़ती है। 🕊️

इसलिए बदलो अपने देखने का ढंग,
क्योंकि सत्य यही है—
दृष्टि बदलते ही,
संसार स्वयं ही सुन्दर हो जाता है। 🌼✨


Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका ✍️

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  “स्वाभिमान की मौन ध्वनि”

किसी ने कहा —
मांग लो अपना हक़,
पर मेरे संस्कारों ने
मुझे झुकना नहीं,
स्वयं को थामना सिखाया है… 🌿

मैंने सीखा है —
अधिकारों की ऊँची आवाज़ से नहीं,
बल्कि
आत्मसम्मान की नीरवता से पहचानी जाती है पहचान… 🕊️

मेरे भीतर एक संसार है,
जहाँ अभिमान नहीं,
पर आत्मगौरव की दीपशिखा जलती है… 🔥

मैं खामोश हूँ —
पर ये मौन कमजोरी नहीं,
ये वो तप है
जिसमें शब्द नहीं,
चरित्र बोलता है…

मैंने कभी किसी से
अपनी अहमियत नहीं जताई,
क्योंकि मुझे विश्वास है —
जो सच में अपने होते हैं,
वो बिना कहे ही मूल्य समझ जाते हैं… 💫

और जो नहीं समझते,
उन्हें समझाने में
अपनी गरिमा खोना
मुझे स्वीकार नहीं… 🌸

इसलिए अब —
मैं न तो प्रश्न करती हूँ,
न ही अपेक्षाओं का भार उठाती हूँ,
बस अपने अस्तित्व को
शांत सौंदर्य में जीती जाती हूँ… 🌙

क्योंकि मैंने जान लिया है —
मांगने से नहीं,
योग्यता और धैर्य से
हर अधिकार स्वयं चलकर आता है… 🌼



Komal Rajput —🤍
साहित्यिक लेखिका ✍️✨

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❖═══ ❝स्वतंत्र पंखों का सत्य❞ ═══❖

किसी एक डाल पर ठहर जाना
हर पंछी की नियति नहीं होता… 🕊️

कुछ परिंदे होते हैं—
जो आसमान की असीमता में
अपनी पहचान लिखते हैं,
ना कि किसी एक छाँव के अधीन… 🌿✨


बंधन अगर प्रेम का हो
तो वह उड़ान को और विस्तृत करता है,
पर यदि वह सीमाओं में बाँध दे—
तो वही प्रेम, बोझ बन जाता है… 🍂

क्योंकि स्वतंत्रता ही
प्रेम का सबसे सच्चा रूप है,
जहाँ साथ हो, पर बंधन ना हो… 🤍


हर हृदय की अपनी दिशाएँ होती हैं,
हर आत्मा का अपना आकाश…
और हर पंख को
अपने हिस्से की हवा चाहिए होती है… 🌬️🦋

इसलिए—
जो रुक जाए, उसे थाम लो स्नेह से…
और जो उड़ जाए,
उसे आशीष दो मुस्कान से… 🌸


क्योंकि प्रेम का सार
पाना नहीं,
समझना और मुक्त करना है… 💫

❖═══ ✍️ Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका ═══❖

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✨🌺 “स्वाभिमान की शांति” 🌺✨


तुम्हारा अहंकार मेरे लिए
शून्य-सा ही रहा… 🕊️
क्योंकि मैंने स्वयं को
कभी किसी से कम नहीं माना। 🌿

मैंने सीखा है—
झुकना केवल प्रेम में उचित है,
अपमान के सम्मुख नहीं… ⚜️

जो मेरी नज़रों में गिर जाए,
उसे उठाने की आदत नहीं मेरी,
मैं अपनी गरिमा का मूल्य
किसी के अहं से नहीं तोलती… 🌙

मेरा मौन ही उत्तर है,
और मेरी दूरी ही निर्णय… 🌸
क्योंकि मैं जानती हूँ—
स्वाभिमान से बड़ा कोई संबंध नहीं होता। ✨

Komal Rajput — साहित्यिक लेखिका 🌿📜

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@Killer_Boys

Hello

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❝ ✧° मौन का महागीत °✧ ❞


शब्दों की चकाचौंध में अक्सर
सत्य की आभा धुंधली हो जाती है… 🌫️
पर मौन—
वह तो आत्मा की सबसे प्रखर वाणी है। ✨

जहाँ तर्क थककर बैठ जाते हैं,
वहाँ अनुभूतियाँ
बिना शब्दों के ही संवाद रचती हैं… 💫
और वही संवाद—
हृदय के अंतराल में
अनंत तक गूंजता रहता है। 🌙

कलह के लिए उच्चारित शब्द
आग की लपटों जैसे होते हैं 🔥
जो संबंधों की कोमल शाखाओं को
धीरे-धीरे भस्म कर देते हैं… 🍂

किन्तु प्रेम—
वह तो मौन की शीतल छाया है 🌿
जहाँ बिना कहे ही
सब कुछ समझ लिया जाता है… ❤️

न वहाँ आरोपों की आवश्यकता होती है,
न स्पष्टीकरणों की कोई विवशता…
बस एक निशब्द अपनापन
सब कुछ कह जाता है। 🤍

जो मौन को पढ़ सके—
वही प्रेम का सच्चा साधक है… 🕊️
क्योंकि शब्दों से व्यक्त भाव
क्षणिक होते हैं,
पर मौन में निहित अनुभूति
अविनाशी होती है… ✨

इसलिए—
यदि प्रेम को संजोना है,
तो शब्दों की भीड़ में नहीं,
मौन की गहराइयों में उतरना सीखो… 🌌

वहीं प्रेम है,
वहीं सत्य है,
और वहीं—
मन की वास्तविक शांति। 🌸


⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯

✍️ Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका 🌹✨

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💔🥀

हर एक शख़्स ने “अपना” कह कर किनारा कर लिया,
मैं सोचता ही रह गया — ये क्या माजरा कर लिया।

जो लोग मेरी ज़ात में शामिल थे साँसों की तरह,
वक़्त ने कैसे उन्हें मुझसे जुदा कर लिया।

मैंने हर रिश्ते को दिल की तरह सींचा था मगर,
सब ने अहसास को जैसे कोई तमाशा कर लिया।

अब किसे अपना कहूँ, किसको पराया समझूँ,
सब ने चेहरे पे नया एक ही नक़ाब कर लिया।

वो जो कहते थे कि मर जाएँगे मेरे बिन भी कभी,
आज उन्हीं लोगों ने जीने का हुनर पा कर लिया।

अब तो तन्हाई ही “शिवा” मेरी हमराज़ बनी,
हर किसी ने मुझे “अपना” कह के तन्हा कर लिया।

✍🏿 शिवा

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💔🥀

मैं वहाँ आ बैठा हूँ जहाँ अब दिल भी अजनबी लगता है,
रिश्तों का हर एक धागा जैसे बस धुँधला-सा धागा लगता है।

प्यार की बातें सुनता हूँ तो हँसी खुद-ब-खुद आ जाती है,
जैसे कोई मासूम खिलौना, टूटा हुआ बस धागा लगता है।

सपनों की चादर ओढ़ी थी, रातों को चैन से सोने को,
अब हर एक ख़्वाब अधूरा, आँखों में जैसे धुआँ लगता है।

भरोसे की वो मीठी बातें, जो दिल को सुकून दिया करती थीं,
अब हर एक लफ़्ज़ में जैसे कोई छुपा हुआ धोखा लगता है।

हमने तो चाहा था दिल से, हर रिश्ता सच्चा, पाक रहे,
पर हर चेहरा अब हमको बस इक नक़ाब-सा लगता है।

ये कैसी राह पे आ बैठे, खुद से भी रिश्ता टूट गया,
अब अपना ही साया भी जैसे कोई अजनबी साया लगता है।


✍🏿 शिवा

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मुझे और मेरे परिवार को
आप सभी को यह बताते हुऐ ख़ुशी हो रही है कि,

एक लम्बे इन्तज़ार के बाद ईश्वर की कृपा और आप लोगों के आशीर्वाद से आज दोपहर 1:35 मिनट पर

ईश्वर की परम अनुकम्पा से हमारे घर
एक स्वस्थ, सुन्दर और 
लगभग 3 किलो 45 ग्राम का....













तरबूज बाज़ार से लाया गया...

दुआ कीजिये कि वो मीठा निकले...

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🌿 “लघु क्रियाओं का मौन उपचार” 🌿

जब मन की दिशाएँ
अव्यवस्थित विचारों के कोलाहल में उलझ जाती हैं,
तब समाधान के विशाल द्वार नहीं,
एक लघु स्पर्श ही
भीतर की शांति का मार्ग खोल देता है। ✨

अंतर में उठती हलचल
जब शब्दों में बंध नहीं पाती,
तब हाथों की साधारण गति—
झाड़न की लय,
जल का स्पर्श,
व्यवस्था का अनुशासन,
मौन साधना बन
चेतना को पुनः संतुलित कर देती है। 🌸


कभी एक कोना सजाना,
जैसे बिखरे मन को समेटना हो,
कभी गरम पेय की धीमी घूँटें,
जैसे आत्मा को सहलाना हो… ☕🌿

कभी एक सरल पदयात्रा,
जैसे थके विचारों को
नव प्राण देना हो,
और कभी कागज़ पर उतरते शब्द—
मानो अंतर्मन का भार
धीरे-धीरे विलीन हो रहा हो। 🕊️

याद रहे—
हर प्रश्न का उत्तर
विशाल परिवर्तन में नहीं छिपा होता,
कभी-कभी एक सूक्ष्म क्रिया ही
अंतर की निस्तब्धता को
पुनः जीवित कर देती है। 💫


क्योंकि—
शांति कोई दूर का पर्वत नहीं,
वह तो उसी क्षण में बसती है,
जहाँ हम
सरलता को स्वीकार कर लेते हैं… 🌙✨

🌷 Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका 🌸

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

💔🥀

वो साथ छोड़ के ऐसे मुकर गया,
मैं हाथ थामे रहा, वो बिखर गया।

कल तक जो नाम था मेरी हर बात में,
आज अजनबी सा दिल से उतर गया।

कुछ वादे थे जो धड़कनों में बस गए,
वो एक पल में सब कुछ ही कर गया।

मैं पूछता ही रहा वजह जुदाई की,
वो ख़ामोशियों में जवाब भर गया।

जो हँस के कहता था “तू ही मेरी दुनिया”,
वही किसी और की दुनिया संवर गया।

मैं टूट कर भी उसे ही सोचता रहा,
वो बेख़बर सा कहीं और ठहर गया।

अब हाल-ए-दिल भी छुपता नहीं मुझसे,
हर शेर में दर्द बनकर उभर गया।

✍🏿 शिवा

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🌸✨ शीर्षक — “मौन के भीतर की पुकार” ✨🌸

खिलखिलाहटों की चादर ओढ़े ये संसार 🌼,
भीतर ही भीतर
कितने ही मन चुपचाप रोते रहते हैं… 🌙

जहाँ कभी हँसी गूँजती थी 🎶,
अब वहाँ
संकोच और संत्रास की निस्तब्धता बस गई है… 🕊️

वो नारी, जो स्वच्छंद आकाश सी थी ☁️,
आज अपने ही पंख समेटे
मर्यादाओं के जाल में उलझी खड़ी है… 🍂

और वो पुरुष,
जिसकी मुस्कान में जीवन का उजास था ☀️,
अब उत्तरदायित्वों के भार तले
अपने ही हृदय से दूर होता जा रहा है… 🌫️

कैसा है ये विकास…? 🤍
जहाँ भावनाएँ क्षीण हो रही हैं,
और संवेदनाएँ
सिर्फ शब्दों में सिमटती जा रही हैं… 🖋️

उन्नति की इस चकाचौंध में ✨,
हमने खो दिया है वो सहज अपनापन,
जो कभी
आँखों की नमी से भी समझ लिया जाता था… 🌧️

अब संवाद नहीं,
सिर्फ औपचारिकताएँ शेष हैं…
और रिश्ते—
बस एक अभिनय बनकर रह गए हैं… 🎭

शायद यही समय है
स्वयं से प्रश्न करने का—
क्या सच में हम आगे बढ़े हैं…?
या बस
अपनी आत्मा को पीछे छोड़ आए हैं… 🌿


Komal Rajput | साहित्यिक लेखिका ✍️✨

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

❖❖❖ “अधूरी प्रतिज्ञाओं का सत्य” ❖❖❖

🌿
विवाह का बंधन केवल
दो नामों का संगम नहीं होता,
यह तो आत्माओं के मध्य
एक मौन अनुबंध होता है—
जहाँ शब्दों से अधिक
भावनाएँ बोलती हैं… ✨

🌸
पर विडंबना देखिए—
जिसके साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया जाता है,
वहीं अक्सर हृदय का स्पर्श
अधूरा रह जाता है…
और जिससे कभी मिलन न हो सका,
वह स्मृतियों में
जीवन-भर बस जाता है… 💔

🌼
यह प्रेम का विरोधाभास नहीं,
मानव-हृदय की सहज प्रकृति है—
जहाँ कर्तव्य और चाहत
दो भिन्न दिशाओं में चल पड़ते हैं,
और व्यक्ति
दोनों के मध्य
स्वयं को विभाजित करता रहता है… 🌙

🍂
किसी के साथ बंध जाना
प्रेम की पराकाष्ठा नहीं,
और किसी को चाहकर भी
न पा सकना
अधूरापन नहीं…
क्योंकि सच्चा प्रेम
प्राप्ति में नहीं,
अपितु अनुभूति में निहित होता है… 🕊️

🌺
इसलिए जीवन को
केवल परिणय के सूत्रों में न बाँधिए,
बल्कि उन भावों को समझिए
जो हृदय में
निर्वाक रहकर भी
सब कुछ कह जाते हैं… 🌿✨

❖❖❖
Komal Rajput — साहित्यिक लेखिका ✍️🌸

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❖❖❖ शीर्षक: “स्मृति की ममता” ❖❖

🌹
जब पीड़ा ने चुपके से
मन के द्वार खटखटाए,
तब अनायास ही
तेरी स्मृतियाँ
माँ-सी ममता बनकर
आंचल फैलाए चली आईं… 🤍

🍂
न जाने कब
तेरा स्नेह
मेरे हृदय की धड़कनों में
इतना गहराया कि—
हर आघात पर
तेरा ही नाम
प्रार्थना बनकर
अधरों पर उतर आया… ✨

🌼
वेदना की उस
निस्तब्ध सांझ में,
जब कोई साथ नहीं होता—
तब तेरी याद
दीपक-सी जलती है,
और अंधेरों को
संवेदना में बदल देती है… 🪔

💫
तू केवल एक व्यक्ति नहीं,
मेरे अस्तित्व की
वो अनुभूति है—
जो माँ की ममता-सी
निर्व्याज, निष्कलंक और
अमर प्रतीत होती है… 💖

🌙
अब तो आलम यह है कि—
हर दुःख की दस्तक पर
सबसे पहले
तेरी ही छवि उभरती है,
मानो ईश्वर ने
तेरे रूप में
मुझे सहारा भेजा हो… 🌸

🍁
और मैं सोचती रह जाती हूँ—
कि यह कैसा बंधन है,
जहाँ प्रेम भी है,
आश्रय भी…
और एक माँ-सा
अटूट अपनापन भी… 💞

❖❖❖

Komal Rajput — साहित्यिक लेखिका ✍️✨

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🌹RօվɑӀ ƒɾíҽղժՏ👑✨🎸

🌿 शीर्षक : “पुरुषार्थ का पथ” 🌿


स्वयं को कर्मठ बनाओ — ⚙️
पर थकान को अपनी पहचान मत बनने दो,
क्योंकि श्रम का सौंदर्य तभी है,
जब उसमें आशा की आभा भी झिलमिलाए। ✨

ज्ञानवर्धक बनो — 📖
पर अहंकार की अग्नि में मत जलो,
ज्ञान वही है जो विनम्रता के दीप से
अंतरतम को आलोकित करे। 🪔

प्रगतिशील बनो — 🌱
पर अपनी जड़ों से विमुख मत हो जाना,
क्योंकि जो वृक्ष अपनी धरा भूल जाए,
वह फलने से पहले ही सूख जाता है। 🍃

सदाचारी बनो — 🛡️
पर साहस का परित्याग मत करना,
धर्म वही जीवित रहता है,
जहाँ निडरता उसका संरक्षक हो। 🔥

जीवन कोई दौड़ नहीं —
यह एक साधना है,
जहाँ हर कदम पर
संयम, सत्य और समर्पण का संगीत गूँजता है। 🎶

इसलिए चलो ऐसे पथ पर,
जहाँ पुरुषार्थ भी हो,
और करुणा की शीतल छाया भी… 🌼

तभी मनुष्य,
केवल सफल नहीं —
सार्थक बनता है। 💫

Komal Rajput
साहित्यिक लेखिका ✍️

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