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कम-ज़र्फ़ भी है पी के बहकता भी बहुत है
भरता भी नहीं और छलकता भी बहुत है
किताब ए इश्क़ में क्या कुछ दफ़्न मिला,
मुड़े हुए पन्नों में एक भूला हुआ वादा मिला !!💔
तुमने समझा ही नहीं…और ना समझना चाहा,
हम चाहते ही क्या थे तुमसे… “तुम्हारे सिवा”.❤️
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो.. हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था! 💔
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लिखना था कि
खुश हैं तेरे बगैर भी यहां हम,
मगर कमबख्त...
आंसू हैं कि कलम से
पहले ही चल दिए। 🥀
बेच दू क्या सारी !
परेशानियो को....
मौत अच्छा
दाम दे रही है...
#गुलज़ार_साहब🌷🌷
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिल में कुछ यूँ सँभालता हूँ ग़म
जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
पेड़ पर पक गया है फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई
देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई
यही तो है आला-ज़रफों की अलामत (निशानी),
कि ज़हर पीने वाले भी यहाँ दुआएं देते हैं।"
💫❤️
Haan, zindagi hamesha apni marzi se nahi chalti,
Kabhi khushi, kabhi gham ki dastak lagti hai.
Jo hum chahe wo har pal mumkin nahi hota,
Magar jo mil jaaye, usi mein zindagi ki roshni jalti hai.
लक्ष्य कोई “ बड़ा ” नही . . .
हारा वही जो “ लड़ा ” नही । ✅
💫मोहब्बत की दास्ता ...लिख़ने का हुनर तो आ गया मुझमें...
पर महबूब को मनाने मे...आज भी नाकाम हूँ.......💫✍ 💫
*इतनी मनमानीयां भी अच्छी नही होती*
*तुम सिर्फ अपने ही नहीं मेरे भी हो*❣
वो भी एक वक्त था जब सबसे तेरी ही बातें होती थी,,,,,,,
आज कोई तेरा नाम भी ले तो बात बदल देते हैं हम......🍂
इतना कीमती ना करो खुद
को...
हम गरीब लोग है महगी चीजो
को छोड़ देते है....✍ 🌝
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है.
लम्बी है ग़म की शाम, मगर शाम ही तो है.. 🍂
छुपी होती है लफ्जों में बातें दिल की!
लोग शायरी समझ के बस मुस्कुरा देते हैं.!
अब तलक ये समझ न पाए हम ग़म तिरा क्यूँ ख़रीद लाये हम?
इक हवेली थी मोम की अपनी छत पे सूरज उतार लाये हम ।।
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा, मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा !!
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है.
लम्बी है ग़म की शाम, मगर शाम ही तो है.. 🍂
बड़े दिन बाद, कोई ज़बाब आया
ये शुक्र है, उसे मेरा ख्याल आया
क्यूं ना निकलें, नींद में आंसू मेरे
बहुत दिन बाद तेरा,ख़्वाब आया
हर एक बूंद में है, एक घर रोशन
मेरे हिस्से में चांद का दाग आया
तुम से नफ़रत भी, लाज़वाब थी
तुम पे इश्क़ भी, बेहिसाब आया ..
#गुलज़ार साहब🌷🌷
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे
धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में
जाने किस का ज़िक्र है इस अफ़्साने में
दर्द मज़े लेता है जो दोहराने में
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
हम इस मोड़ से उठ कर अगले मोड़ चले
उन को शायद उम्र लगेगी आने में....
"Hazaaron manzilein hongi, hazaaron raaste honge,"
"Nigahain dhundti jinko, woh mauje-faisle honge."
Dil ke armaan hamesha poore ho, ye mumkin nahi,
Par har dhadkan mein ek nayi kahani chhupi hoti hai।
Zindagi apni marzi se chalti hi kahan hai,
Ye to bas taqdeer ke likhe alfaazon ki tasveer hoti hai।
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
लफ्ज़ टूट-टूट के निकल रहे हैं ज़ेहन से,
लगता है दिल में कोई ____ हादसा हुआ है !!!!
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दीवाने तेरे हैं, इस बात से इनकार नहीं;
कैसे कहें कि हमें आपसे प्यार नहीं;
कुछ तो कसूर है आपकी निगाहों का;
हम अकेले तो गुनेहगार नहीं।
/channel/StarMiner3_bot?start=_tgr_oSBhgdc3MTQ1
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हमेशा के लिए अपने पास
रख लो ना मुझे
कोई पूछे तो कह देना..
किरायेदार है दिल का
कल क्या खूब इश्क़ से मैने बदला लिया,
कागज़ पर लिखा इश्क़ और उसे ज़ला दिया..!!
कोई चराग़ जलाता नहीं सलीक़े से,
मगर सभी को शिकायत हवा से होती है।