1959
Hare Krishna! Excerpts from the teachings of Srila Prabhupada and other Gaudiya Vaishnav Acharyas.
🌸 हरे कृष्ण! हरि बोल! 🌸
🙏 बृज चौरासी कोस परिक्रमा – एक दिव्य यात्रा 🙏
✨ Come. Walk. Connect. Surrender. ✨
क्या आप वृन्दावन धाम को केवल देखना नहीं, बल्कि अनुभव करना चाहते हैं? 💛
आइए, हमारे साथ चलिए एक विशेष आध्यात्मिक यात्रा पर, जहाँ भक्ति, साधु-संग, हरिनाम, दर्शन और ब्रज की दिव्य लीलास्थलियों का अद्भुत संगम होगा।
🗓️ यात्रा: 30 अक्टूबर – 6 नवंबर 2026
📌 Registration की अंतिम तिथि: 23 अगस्त 2026
🌿 यात्रा की विशेषताएँ:
🍚 दिन में 3 बार प्रसादम्
🛕 70+ पवित्र स्थानों का दर्शन
🌸 Mathura • Vrindavan • Barsana • Govardhan • Nandgaon एवं अन्य प्रमुख स्थान
🚌 AC Bus उपलब्ध
🏨 AC Rooms उपलब्ध
🚆 AC Train उपलब्ध
🙏 अनुभवी भक्तों के साथ साधु-संग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन
💰 Yatra Packages:
🛏️ Basic Room (3 Persons / Double Bed): ₹11,000 + Train Ticket
🛏️ Standard Room: ₹12,500 + Train Ticket
🛏️ Deluxe Room: ₹14,000 + Train Ticket
🛏️ Super Deluxe Room: ₹16,500 + Train Ticket
⚠️ LIMITED SEATS ONLY!
अगर आप इस दिव्य ब्रज यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अभी अपना स्थान सुनिश्चित करें।
📞 Call / WhatsApp:
Naman Krishna Prabhu: +91 82005 03703
Abhay Krishna Prabhu: +91 63590 50196
🌺 चलो तीरथ – With Gaurangas
ब्रज की धूल में चलें, हरिनाम में जुड़ें और श्रीकृष्ण की कृपा का अनुभव करें।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏🌸
https://youtube.com/shorts/IESY0dVXFV4?si=jdCJHjM6wcp1moDl
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https://youtube.com/shorts/1HiKGVEFjxI?si=93F_2NtyCVPnvpru
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हरे कृष्ण
शनिवार, *शयन एकादशी*
*पारणा:* रविवार सुबह
6:10 से 10:32 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
6:24 से 10:41 राजकोट, जामनगर, द्वारका
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युधिष्ठिर ने पूछा: भगवन्! आषाढ़ के शुक्लपक्ष में कौन सी एकादशी होती है? उसका नाम और विधि क्या है? यह बतलाने की कृपा करें।
भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन्! आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम ‘शयनी’ है। मैं उसका वर्णन करता हूँ। वह महान पुण्यमयी, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, सब पापों को हरनेवाली तथा उत्तम व्रत है। आषाढ़ शुक्लपक्ष में ‘शयनी एकादशी’ के दिन जिन्होंने कमल पुष्प से कमललोचन भगवान विष्णु का पूजन तथा एकादशी का उत्तम व्रत किया है, उन्होंने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओं का पूजन कर लिया। ‘हरिशयनी एकादशी’ के दिन मेरा एक स्वरुप राजा बलि के यहाँ रहता है और दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर तब तक शयन करता है, जब तक आगामी कार्तिक की एकादशी नहीं आ जाती, अत: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक मनुष्य को भलीभाँति धर्म का आचरण करना चाहिए। जो मनुष्य इस व्रत का अनुष्ठान करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है, इस कारण यत्नपूर्वक इस एकादशी का व्रत करना चाहिए। एकादशी की रात में जागरण करके शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। ऐसा करनेवाले पुरुष के पुण्य की गणना करने में चतुर्मुख ब्रह्माजी भी असमर्थ हैं।
राजन्! जो इस प्रकार भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले सर्वपापहारी एकादशी के उत्तम व्रत का पालन करता है, वह जाति का चाण्डाल होने पर भी संसार में सदा मेरा प्रिय रहनेवाला है। जो मनुष्य दीपदान, पलाश के पत्ते पर भोजन और व्रत करते हुए चौमासा व्यतीत करते हैं, वे मेरे प्रिय हैं। चौमासे में भगवान विष्णु सोये रहते हैं, इसलिए मनुष्य को भूमि पर शयन करना चाहिए। सावन में साग, भादों में दही, क्वार में दूध और कार्तिक में दाल का त्याग कर देना चाहिए। जो चौमसे में ब्रह्मचर्य का पालन करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है। राजन्! एकादशी के व्रत से ही मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है, अत: सदा इसका व्रत करना चाहिए। कभी भूलना नहीं चाहिए।
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हरे कृष्ण
बुधवार, *अपरा एकादशी*
*पारणा:* गुरुवार सुबह
6:01 से 10:22 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
6:15 से 10:31 राजकोट, जामनगर, द्वारका
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युधिष्ठिर ने पूछा: जनार्दन! ज्येष्ठ मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? मैं उसका माहात्म्य सुनना चाहता हूँ। उसे बताने की कृपा कीजिये।
भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन्! आपने सम्पूर्ण लोकों के हित के लिए बहुत उत्तम बात पूछी है। राजेन्द्र! ज्येष्ठ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार वैशाख) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम ‘अपरा’ है। यह बहुत पुण्य प्रदान करनेवाली और बड़े बडे पातकों का नाश करनेवाली है। ब्रह्महत्या से दबा हुआ, गोत्र की हत्या करनेवाला, गर्भस्थ बालक को मारनेवाला, परनिन्दक तथा परस्त्रीलम्पट पुरुष भी ‘अपरा एकादशी’ के सेवन से निश्चय ही पापरहित हो जाता है। जो झूठी गवाही देता है, माप तौल में धोखा देता है, बिना जाने ही नक्षत्रों की गणना करता है और कूटनीति से आयुर्वेद का ज्ञाता बनकर वैद्य का काम करता है… ये सब नरक में निवास करनेवाले प्राणी हैं। परन्तु ‘अपरा एकादशी’ के सवेन से ये भी पापरहित हो जाते हैं। यदि कोई क्षत्रिय अपने क्षात्रधर्म का परित्याग करके युद्ध से भागता है तो वह क्षत्रियोचित धर्म से भ्रष्ट होने के कारण घोर नरक में पड़ता है। जो शिष्य विद्या प्राप्त करके स्वयं ही गुरुनिन्दा करता है, वह भी महापातकों से युक्त होकर भयंकर नरक में गिरता है। किन्तु ‘अपरा एकादशी’ के सेवन से ऐसे मनुष्य भी सदगति को प्राप्त होते हैं।
माघ में जब सूर्य मकर राशि पर स्थित हो, उस समय प्रयाग में स्नान करनेवाले मनुष्यों को जो पुण्य होता है, काशी में शिवरात्रि का व्रत करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, गया में पिण्डदान करके पितरों को तृप्ति प्रदान करनेवाला पुरुष जिस पुण्य का भागी होता है, बृहस्पति के सिंह राशि पर स्थित होने पर गोदावरी में स्नान करनेवाला मानव जिस फल को प्राप्त करता है, बदरिकाश्रम की यात्रा के समय भगवान केदार के दर्शन से तथा बदरीतीर्थ के सेवन से जो पुण्य फल उपलब्ध होता है तथा सूर्यग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में दक्षिणासहित यज्ञ करके हाथी, घोड़ा और सुवर्ण दान करने से जिस फल की प्राप्ति होती है, ‘अपरा एकादशी’ के सेवन से भी मनुष्य वैसे ही फल प्राप्त करता है। ‘अपरा’ को उपवास करके भगवान वामन की पूजा करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो श्रीविष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है। इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है।
https://youtube.com/shorts/w6zLn6tgr0I?si=deHEe28d7e8x44qn
Don't take advantage of eating and sleeping. ~Srila Prabhupada
https://youtube.com/shorts/gruUN1HEPvw?si=qD-YWU2DQgy4cziO
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हरे कृष्ण
सोमवार, *मोहिनी एकादशी*
*पारणा:* मंगलवार सुबह
6:10 से 10:26 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
6:24 से 10:35 राजकोट, जामनगर, द्वारका
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युधिष्ठिर ने पूछा: जनार्दन! वैशाख मास के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? उसका क्या फल होता है? उसके लिए कौन सी विधि है?
भगवान श्रीकृष्ण बोले: धर्मराज! पूर्वकाल में परम बुद्धिमान श्रीरामचन्द्रजी ने महर्षि वशिष्ठजी से यही बात पूछी थी, जिसे आज तुम मुझसे पूछ रहे हो।
श्रीराम ने कहा: भगवन्! जो समस्त पापों का क्षय तथा सब प्रकार के दु:खों का निवारण करनेवाला, व्रतों में उत्तम व्रत हो, उसे मैं सुनना चाहता हूँ।
वशिष्ठजी बोले: श्रीराम! तुमने बहुत उत्तम बात पूछी है। मनुष्य तुम्हारा नाम लेने से ही सब पापों से शुद्ध हो जाता है। तथापि लोगों के हित की इच्छा से मैं पवित्रों में पवित्र उत्तम व्रत का वर्णन करुँगा। वैशाख मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम ‘मोहिनी’ है। वह सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है। उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं।
सरस्वती नदी के रमणीय तट पर भद्रावती नाम की सुन्दर नगरी है। वहाँ धृतिमान नामक राजा, जो चन्द्रवंश में उत्पन्न और सत्यप्रतिज्ञ थे, राज्य करते थे। उसी नगर में एक वैश्य रहता था, जो धन धान्य से परिपूर्ण और समृद्धशाली था। उसका नाम था धनपाल। वह सदा पुण्यकर्म में ही लगा रहता था। दूसरों के लिए पौसला (प्याऊ), कुआँ, मठ, बगीचा, पोखरा और घर बनवाया करता था। भगवान विष्णु की भक्ति में उसका हार्दिक अनुराग था। वह सदा शान्त रहता था। उसके पाँच पुत्र थे: सुमना, धुतिमान, मेघावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि। धृष्टबुद्धि पाँचवाँ था। वह सदा बड़े-बड़े पापों में ही संलग्न रहता था। जुए आदि दुर्व्यसनों में उसकी बड़ी आसक्ति थी। वह वेश्याओं से मिलने के लिए लालायित रहता था। उसकी बुद्धि न तो देवताओं के पूजन में लगती थी और न पितरों तथा ब्राह्मणों के सत्कार में। वह दुष्टात्मा अन्याय के मार्ग पर चलकर पिता का धन बरबाद किया करता था। एक दिन वह वेश्या के गले में बाँह डाले चौराहे पर घूमता देखा गया। तब पिता ने उसे घर से निकाल दिया तथा बन्धु बान्धवों ने भी उसका परित्याग कर दिया। अब वह दिन रात दु:ख और शोक में डूबा तथा कष्ट पर कष्ट उठाता हुआ इधर उधर भटकने लगा। एक दिन किसी पुण्य के उदय होने से वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुँचा। वैशाख का महीना था। तपोधन कौण्डिन्य गंगाजी में स्नान करके आये थे। धृष्टबुद्धि शोक के भार से पीड़ित हो मुनिवर कौण्डिन्य के पास गया और हाथ जोड़ सामने खड़ा होकर बोला: ‘ब्रह्मन्! द्विजश्रेष्ठ! मुझ पर दया करके कोई ऐसा व्रत बताइये, जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो।’
कौण्डिन्य बोले: वैशाख के शुक्लपक्ष में ‘मोहिनी’ नाम से प्रसिद्ध एकादशी का व्रत करो। ‘मोहिनी’ को उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मों के किये हुए मेरु पर्वत जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं |’
वशिष्ठजी कहते है: श्रीरामचन्द्रजी! मुनि का यह वचन सुनकर धृष्टबुद्धि का चित्त प्रसन्न हो गया। उसने कौण्डिन्य के उपदेश से विधिपूर्वक ‘मोहिनी एकादशी’ का व्रत किया। नृपश्रेष्ठ! इस व्रत के करने से वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर आरुढ़ हो सब प्रकार के उपद्रवों से रहित श्रीविष्णुधाम को चला गया। इस प्रकार यह ‘मोहिनी’ का व्रत बहुत उत्तम है। इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है।’
25 Apr 2026 - Mangal Aratik Darshan
Saturday, Vrindavan, India
Navami, Gaura Paksa
Madhusudana Masa, 540 Gaurabda
Srimati Sita Devi (consort of Lord Sri Rama) -- Appearance
Sri Madhu Pandita -- Disappearance
Srimati Jahnava Devi -- Appearance
https://youtube.com/shorts/cN_waGMHNC8?si=BvNjA7irTD0KrVlD
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हरे कृष्ण
सोमवार, *वरुथिनी एकादशी*
*पारणा:* मंगलवार सुबह
6:57 से 10:33 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
6:57 से 10:41 राजकोट, जामनगर, द्वारका
*Whatsapp*
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युधिष्ठिर ने पूछा: हे वासुदेव! वैशाख मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? कृपया उसकी महिमा बताइये।
भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन्! वैशाख (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार चैत्र ) कृष्णपक्ष की एकादशी ‘वरुथिनी’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह इस लोक और परलोक में भी सौभाग्य प्रदान करनेवाली है। ‘वरुथिनी’ के व्रत से सदा सुख की प्राप्ति और पाप की हानि होती है। ‘वरुथिनी’ के व्रत से ही मान्धाता तथा धुन्धुमार आदि अन्य अनेक राजा स्वर्गलोक को प्राप्त हुए हैं। जो फल दस हजार वर्षों तक तपस्या करने के बाद मनुष्य को प्राप्त होता है, वही फल इस ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत रखनेमात्र से प्राप्त हो जाता है।
नृपश्रेष्ठ! घोड़े के दान से हाथी का दान श्रेष्ठ है। भूमिदान उससे भी बड़ा है। भूमिदान से भी अधिक महत्त्व तिलदान का है। तिलदान से बढ़कर स्वर्णदान और स्वर्णदान से बढ़कर अन्नदान है, क्योंकि देवता, पितर तथा मनुष्यों को अन्न से ही तृप्ति होती है। विद्वान पुरुषों ने कन्यादान को भी इस दान के ही समान बताया है। कन्यादान के तुल्य ही गाय का दान है, यह साक्षात् भगवान का कथन है। इन सब दानों से भी बड़ा विद्यादान है। मनुष्य ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत करके विद्यादान का भी फल प्राप्त कर लेता है। जो लोग पाप से मोहित होकर कन्या के धन से जीविका चलाते हैं, वे पुण्य का क्षय होने पर यातनामक नरक में जाते हैं। अत: सर्वथा प्रयत्न करके कन्या के धन से बचना चाहिए उसे अपने काम में नहीं लाना चाहिए। जो अपनी शक्ति के अनुसार अपनी कन्या को आभूषणों से विभूषित करके पवित्र भाव से कन्या का दान करता है, उसके पुण्य की संख्या बताने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं। ‘वरुथिनी एकादशी’ करके भी मनुष्य उसीके समान फल प्राप्त करता है।
राजन्! रात को जागरण करके जो भगवान मधुसूदन का पूजन करते हैं, वे सब पापों से मुक्त हो परम गति को प्राप्त होते हैं। अत: पापभीरु मनुष्यों को पूर्ण प्रयत्न करके इस एकादशी का व्रत करना चाहिए। यमराज से डरनेवाला मनुष्य अवश्य ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत करे। राजन्! इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है और मनुष्य सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है।
🪔✨ EXPERIENCE DIWALI IN VRINDAVAN ✨🪔
जहाँ दीपों की रोशनी में भक्ति है,
जहाँ हरिनाम में आनंद है,
और जहाँ श्रीकृष्ण की भूमि में दीवाली मनाना स्वयं एक दिव्य अनुभव है। 🌸🙏
🌿 Vrindavan Dham Yatra 2026
🗓️ 6 – 11 November 2026
🛕 35+ दिव्य स्थानों के दर्शन
📿 हरिनाम • साधु-संग • भक्ति
🍚 3 Times Prasadam
🏨 AC Rooms Available
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💰 Packages Starting @ ₹6,300 + Train Ticket
⚠️ LIMITED SEATS ONLY!
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Naman Krishna Prabhu: +91 82005 03703
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🌺 चलो तीरथ – With Gaurangas 🌺
✨ This Diwali, don't just celebrate Diwali…
✨ Experience Diwali in Vrindavan! 🪔💛
हरे कृष्ण! 🙏
हरे कृष्ण
रविवार, *कामिका एकादशी*
*पारणा:* सोमवार सुबह
6:16 से 8:03 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
6:30 से 8:03 राजकोट, जामनगर, द्वारका
*WA G* https://chat.whatsapp.com/K1pBwij2tzZD60F5JxlmWw
*https://whatsapp.com/channel/0029VaaiU8SA89MjlmcjSi2K*
युधिष्ठिर ने पूछा: गोविन्द! वासुदेव! आपको मेरा नमस्कार है! श्रावण (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार आषाढ़) के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है? कृपया उसका वर्णन कीजिये।
भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन्! सुनो। मैं तुम्हें एक पापनाशक उपाख्यान सुनाता हूँ, जिसे पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने नारदजी के पूछने पर कहा था।
नारदजी ने प्रश्न किया: हे भगवन्! हे कमलासन! मैं आपसे यह सुनना चाहता हूँ कि श्रवण के कृष्णपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? उसके देवता कौन हैं तथा उससे कौन सा पुण्य होता है? प्रभो! यह सब बताइये।
ब्रह्माजी ने कहा: नारद! सुनो। मैं सम्पूर्ण लोकों के हित की इच्छा से तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दे रहा हूँ। श्रावण मास में जो कृष्णपक्ष की एकादशी होती है, उसका नाम ‘कामिका’ है। उसके स्मरणमात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। उस दिन श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव और मधुसूदन आदि नामों से भगवान का पूजन करना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से जो फल मिलता है, वह गंगा, काशी, नैमिषारण्य तथा पुष्कर क्षेत्र में भी सुलभ नहीं है। सिंह राशि के बृहस्पति होने पर तथा व्यतीपात और दण्डयोग में गोदावरी स्नान से जिस फल की प्राप्ति होती है, वही फल भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से भी मिलता है।
जो समुद्र और वनसहित समूची पृथ्वी का दान करता है तथा जो ‘कामिका एकादशी’ का व्रत करता है, वे दोनों समान फल के भागी माने गये हैं।
जो ब्यायी हुई गाय को अन्यान्य सामग्रियों सहित दान करता है, उस मनुष्य को जिस फल की प्राप्ति होती है, वही ‘कामिका एकादशी’ का व्रत करनेवाले को मिलता है। जो नरश्रेष्ठ श्रावण मास में भगवान श्रीधर का पूजन करता है, उसके द्वारा गन्धर्वों और नागों सहित सम्पूर्ण देवताओं की पूजा हो जाती है।
अत: पापभीरु मनुष्यों को यथाशक्ति पूरा प्रयत्न करके ‘कामिका एकादशी’ के दिन श्रीहरि का पूजन करना चाहिए। जो पापरुपी पंक से भरे हुए संसार समुद्र में डूब रहे हैं, उनका उद्धार करने के लिए ‘कामिका एकादशी’ का व्रत सबसे उत्तम है। अध्यात्म विधापरायण पुरुषों को जिस फल की प्राप्ति होती है, उससे बहुत अधिक फल ‘कामिका एकादशी’ व्रत का सेवन करनेवालों को मिलता है।
‘कामिका एकादशी’ का व्रत करनेवाला मनुष्य रात्रि में जागरण करके न तो कभी भयंकर यमदूत का दर्शन करता है और न कभी दुर्गति में ही पड़ता है।
लालमणि, मोती, वैदूर्य और मूँगे आदि से पूजित होकर भी भगवान विष्णु वैसे संतुष्ट नहीं होते, जैसे तुलसीदल से पूजित होने पर होते हैं। जिसने तुलसी की मंजरियों से श्रीकेशव का पूजन कर लिया है, उसके जन्मभर का पाप निश्चय ही नष्ट हो जाता है।
या दृष्टा निखिलाघसंघशमनी स्पृष्टा वपुष्पावनी
रोगाणामभिवन्दिता निरसनी सिक्तान्तकत्रासिनी।
प्रत्यासत्तिविधायिनी भगवत: कृष्णस्य संरोपिता
न्यस्ता तच्चरणे विमुक्तिफलदा तस्यै तुलस्यै नम:॥
‘जो दर्शन करने पर सारे पापसमुदाय का नाश कर देती है, स्पर्श करने पर शरीर को पवित्र बनाती है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुँचाती है, आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप ले जाती है और भगवान के चरणों मे चढ़ाने पर मोक्षरुपी फल प्रदान करती है, उस तुलसी देवी को नमस्कार है।’
जो मनुष्य एकादशी को दिन रात दीपदान करता है, उसके पुण्य की संख्या चित्रगुप्त भी नहीं जानते। एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के सम्मुख जिसका दीपक जलता है, उसके पितर स्वर्गलोक में स्थित होकर अमृतपान से तृप्त होते हैं। घी या तिल के तेल से भगवान के सामने दीपक जलाकर मनुष्य देह त्याग के पश्चात् करोड़ो दीपकों से पूजित हो स्वर्गलोक में जाता है।’
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: युधिष्ठिर! यह तुम्हारे सामने मैंने ‘कामिका एकादशी’ की महिमा का वर्णन किया है। ‘कामिका’ सब पातकों को हरनेवाली है, अत: मानवों को इसका व्रत अवश्य करना चाहिए। यह स्वर्गलोक तथा महान पुण्यफल प्रदान करनेवाली है। जो मनुष्य श्रद्धा के साथ इसका माहात्म्य श्रवण करता है, वह सब पापों से मुक्त हो श्रीविष्णुलोक में जाता है।
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🌸 *Tomorrow is Ekadashi*🌸 It is a very auspicious day!✨ Any spiritual activity performed on this day gives *100 times benefit!!* So... ▶️ *Chant min 25 rounds of Hare Krishna Mahamantra*🤗 ▶️ *Read Srila Prabhupada's Books*📚 ▶️ *Hear Krishna Katha*🧏 ▶️ *Fasting from Grains*😇 ▶️ *Can donate something in the service of the Lord*💰
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🌸📢 Registration Window is Open! 📢🌸
🙏 Hare Krishna!
The registration window for *Gaurangas Pathshala – Sunday Children’s online Class* is open! 🎉
If you’d like your child to learn timeless values, Krishna consciousness, inspiring Vedic stories, devotional songs, and character-building lessons in a joyful and interactive environment, this is a wonderful opportunity. 🌼📖✨
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We look forward to welcoming your child to the Gaurangas Pathshala family! 💛🙏
Hare Krishna! 🌸
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Photo from Dp
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Happy Ekadashi Mangal Darshan 🙏✨
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This is first-class rascaldom. ~Srila Prabhupada
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🦁 _*Happy Nṛsiṁha Chaturdshi*_
🪷 *“Today is the appearance day of Lord Nṛsiṁha-deva. Nṛsiṁha-deva appeared not for killing Hiraṇyakaśipu, but for giving protection to His devotee Prahlāda Mahārāja. To kill a demon is not very difficult for the Supreme Personality of Godhead, but He especially comes to give protection to His devotee.”*
Śrīla Prabhupāda Lecture, Los Angeles, May 27, 1972
https://youtube.com/shorts/Jj_kll565As?si=LXwSMjDIqTtrTrSr
Kṛṣṇa gives the four principles ~Srila Prabhupada
https://youtube.com/shorts/Jj_kll565As?si=LXwSMjDIqTtrTrSr
Kṛṣṇa gives the four principles ~Srila Prabhupada
https://www.instagram.com/reel/DXbOqhtCnnJ/?igsh=eDE2NXB5NjdsemZt
✨ राजापुर श्री जगन्नाथ जी के दिव्य दर्शन – श्रीधाम मायापुर ✨
क्या आप जानते हैं…
Rajapur Jagannath की यह अद्भुत प्रकट लीला
Mayapur में आज भी भक्तों को दिव्य अनुभूति कराती है…
🌊 समुद्र से प्रकट होकर
स्वयं भक्तों के पास आना—
यह दिखाता है कि भगवान केवल पूजनीय नहीं…
वे अपने भक्तों के साथ जीते हैं, उनके बीच रहते हैं ❤️
🙏 यह केवल दर्शन नहीं…
एक जीवंत संबंध का अनुभव है
📿 आइए, इस पावन धाम में
जगन्नाथ जी के चरणों में अपने हृदय को समर्पित करें…
जय जगन्नाथ!
https://youtube.com/shorts/vPGdQISDLCg?si=WfgL46vXFI2yoHij
*It is better late than never* ~Srila Prabhupada
https://youtube.com/shorts/vPGdQISDLCg?si=WfgL46vXFI2yoHij
It is better late than never ~Srila Prabhupada