1959
Hare Krishna! Excerpts from the teachings of Srila Prabhupada and other Gaudiya Vaishnav Acharyas.
https://youtube.com/shorts/qozT_6rulPs?si=LSJUUkhZN0yKPp4F
Don't allow your tongue to taste everything and anything ~HDG Srila Prabhupada
हरे कृष्णा प्रिय भक्तों 🙏
काउंटडाउन शुरू हो गया है 👇🏼
*मायापुर जगन्नाथ पुरी यात्रा या केवल जगन्नाथ पुरी यात्रा के लिए पंजीकरण के लिए अंतिम दिन हैं*। *इसके बाद कृपया यात्रा में शामिल होने के लिए कॉल या मैसेज न करें 🙏*
विनम्र निवेदन है कि यदि आप पुरुषोत्तम मास यात्रा में शामिल होना चाहते हैं तो कृपया अभी पंजीकरण करा लें 🙏 अन्यथा हमें मना करने में खेद होगा 😔
आपका सेवक
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*What is Dharma?🤔 part-2*
🌸 *Today is Papamochini Ekadashi*🌸
Mangal darshan🙏🙏
It is a very auspicious day!✨ Any spiritual activity performed on this day gives *100 times benefit!!*
So...
▶️ *Chant min 25 rounds of Hare Krishna Mahamantra*🤗
▶️ *Read Srila Prabhupada's Books*📚
▶️ *Hear Krishna Katha*🧏
▶️ *Fasting from Grains*😇
▶️ *Can donate something to the in the service of the Lord*💰
In Your Service✨
Hare Krishna dear devotees 🙏
Countdown starts 👇🏼
*Last 4 days for Mayapur Jagnnath Puri Yatra or only Jagnnath Puri Yatra registration* . *After that please don’t call or message for joining Yatra 🙏*
It’s humble request if you want to join Purshottam Mas Yatra please register now 🙏 after we feel regret to say No😔
Your servant
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🌸 मायापुर & जगन्नाथ पुरी यात्रा 2026 🌸
✨ पुरुषोत्तम मास में पुरुषोत्तम क्षेत्र परिक्रमा विशेष
📍 65 से अधिक तीर्थ स्थानों के दर्शन
🚆 AC / Non-AC ट्रेन
🏨 AC / Non-AC रूम
🚌 AC बस (आवश्यकतानुसार)
🍛 प्रतिदिन 3 बार स्वादिष्ट प्रसादम्
🎶 कथा • कीर्तन
🤝 भक्तों का दिव्य संग
🌟 केवल 4 वर्ष में एक बार आने वाला विशेष अवसर
आयोजक:
Chalo Tirthayatra (Gaurangas Group)
🍛🚌 मायापुर – भोजन व स्थानीय यात्रा: ₹5500
🍛🚌 पुरी – भोजन व स्थानीय यात्रा: ₹5000
💰 प्रारंभिक पैकेज
AC रूम – ₹16,000 + ट्रेन चार्ज
Non-AC रूम – ₹14,200 + ट्रेन चार्ज
(रूम व ट्रेन का चार्ज आपकी पसंद के अनुसार अतिरिक्त रहेगा)
📞 संपर्क:
7600156255
उद्धव दास
हरे कृष्णा 🙏
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Last 10 Days Left 🏃🏻
Limited Seats Left !!
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We have to adjust things ~Srila Prabhupada
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Hurray 🎉
Hari Hari 🩷🙏🏻
Website is finally working 🌹
Please go through the video to know the registration process 🙏🏻
Remember only 50 members will be taken and 30 devotees have already registered till now 🙏🏻
✨ _*जगन्नाथ पुरी एवं मायापुर धाम यात्रा 2026*_ ✨
🌺 *पुरुषोत्तम मास में पुरुषोत्तम क्षेत्र की दिव्य यात्रा* 🌺
चार वर्षों में एक बार आने वाला यह अत्यंत दुर्लभ और शुभ अवसर!
पावन परिक्रमाएँ • रसपूर्ण कथा • मंगलमय भक्त-संग
🎉 *शुभ विजया एकादशी के पावन दिवस पर भव्य शुभारंभ* 🎉
📅 यात्रा तिथि: *17 मई से 28 मई 2026*
इस यात्रा में हम *65+ पवित्र स्थलों* का दर्शन करेंगे:
🕉️ नवद्वीप मंडल परिक्रमा (मायापुर धाम)
🕉️ श्री क्षेत्र परिक्रमा (जगन्नाथ पुरी धाम)
🌿 यात्रा की विशेषताएँ:
✅ आरामदायक AC कमरे
✅ प्रतिदिन 3 समय शुद्ध प्रसाद
✅ पूर्णतः AC बस यात्रा
✅ प्रेरणादायक कथा एवं आनंदमय कीर्तन
✅ भक्ति चलचित्र एवं आध्यात्मिक आनंद
✅ भक्तों का दिव्य संग
💰 *रजिस्ट्रेशन राशि: ₹4000 मात्र*
👥 *केवल 50 भक्तों के लिए (सीमित स्थान)*
यह केवल यात्रा नहीं —
यह धाम सेवा, धाम दर्शन और आत्मिक जागृति का दिव्य अवसर है।
📞 शीघ्र पंजीकरण करें!
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संपर्क करें -
7600156255 (उद्धव दास)
9924958709 (उग्रश्रव दास)
7990200618 (अभय दास)
हरे कृष्ण
शुक्रवार, *विजया एकादशी*
*पारणा:* शनिवार सुबह
7:13 से 10:58 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
7:26 से 11:07 राजकोट, जामनगर, द्वारका
*WA Ch*
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*WA G*
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युधिष्ठिर ने पूछा: हे वासुदेव! फाल्गुन (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार माघ) के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है और उसका व्रत करने की विधि क्या है? कृपा करके बताइये।
भगवान श्रीकृष्ण बोले: युधिष्ठिर! एक बार नारदजी ने ब्रह्माजी से फाल्गुन के कृष्णपक्ष की ‘विजया एकादशी’ के व्रत से होनेवाले पुण्य के बारे में पूछा था तथा ब्रह्माजी ने इस व्रत के बारे में उन्हें जो कथा और विधि बतायी थी, उसे सुनो:
ब्रह्माजी ने कहा: नारद! यह व्रत बहुत ही प्राचीन, पवित्र और पाप नाशक है। यह एकादशी राजाओं को विजय प्रदान करती है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।
त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्रजी जब लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र के किनारे पहुँचे, तब उन्हें समुद्र को पार करने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। उन्होंने लक्ष्मणजी से पूछा: ‘सुमित्रानन्दन! किस उपाय से इस समुद्र को पार किया जा सकता है? यह अत्यन्त अगाध और भयंकर जल जन्तुओं से भरा हुआ है। मुझे ऐसा कोई उपाय नहीं दिखायी देता, जिससे इसको सुगमता से पार किया जा सके।‘
लक्ष्मणजी बोले: हे प्रभु! आप ही आदिदेव और पुराण पुरुष पुरुषोत्तम हैं। आपसे क्या छिपा है? यहाँ से आधे योजन की दूरी पर कुमारी द्वीप में बकदाल्भ्य नामक मुनि रहते हैं। आप उन प्राचीन मुनीश्वर के पास जाकर उन्हींसे इसका उपाय पूछिये।
श्रीरामचन्द्रजी महामुनि बकदाल्भ्य के आश्रम पहुँचे और उन्होंने मुनि को प्रणाम किया। महर्षि ने प्रसन्न होकर श्रीरामजी के आगमन का कारण पूछा।
श्रीरामचन्द्रजी बोले: ब्रह्मन्! मैं लंका पर चढ़ाई करने के उद्धेश्य से अपनी सेनासहित यहाँ आया हूँ। मुने! अब जिस प्रकार समुद्र पार किया जा सके, कृपा करके वह उपाय बताइये।
बकदाल्भय मुनि ने कहा: हे श्रीरामजी! फाल्गुन के कृष्णपक्ष में जो ‘विजया’ नाम की एकादशी होती है, उसका व्रत करने से आपकी विजय होगी। निश्चय ही आप अपनी वानर सेना के साथ समुद्र को पार कर लेंगे। राजन्! अब इस व्रत की फलदायक विधि सुनिये:
दशमी के दिन सोने, चाँदी, ताँबे अथवा मिट्टी का एक कलश स्थापित कर उस कलश को जल से भरकर उसमें पल्लव डाल दें। उसके ऊपर भगवान नारायण के सुवर्णमय विग्रह की स्थापना करें। फिर एकादशी के दिन प्रात: काल स्नान करें। कलश को पुन: स्थापित करें। माला, चन्दन, सुपारी तथा नारियल आदि के द्वारा विशेष रुप से उसका पूजन करें। कलश के ऊपर सप्तधान्य और जौ रखें। गन्ध, धूप, दीप और भाँति भाँति के नैवेघ से पूजन करें। कलश के सामने बैठकर उत्तम कथा वार्ता आदि के द्वारा सारा दिन व्यतीत करें और रात में भी वहाँ जागरण करें। अखण्ड व्रत की सिद्धि के लिए घी का दीपक जलायें। फिर द्वादशी के दिन सूर्योदय होने पर उस कलश को किसी जलाशय के समीप (नदी, झरने या पोखर के तट पर) स्थापित करें और उसकी विधिवत् पूजा करके देव प्रतिमासहित उस कलश को वेदवेत्ता ब्राह्मण के लिए दान कर दें। कलश के साथ ही और भी बड़े बड़े दान देने चाहिए। श्रीराम! आप अपने सेनापतियों के साथ इसी विधि से प्रयत्नपूर्वक ‘विजया एकादशी’ का व्रत कीजिये। इससे आपकी विजय होगी।
ब्रह्माजी कहते हैं: नारद! यह सुनकर श्रीरामचन्द्रजी ने मुनि के कथनानुसार उस समय ‘विजया एकादशी’ का व्रत किया। उस व्रत के करने से श्रीरामचन्द्रजी विजयी हुए। उन्होंने संग्राम में रावण को मारा, लंका पर विजय पायी और सीता को प्राप्त किया। बेटा! जो मनुष्य इस विधि से व्रत करते हैं, उन्हें इस लोक में विजय प्राप्त होती है और उनका परलोक भी अक्षय बना रहता है।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: युधिष्ठिर! इस कारण ‘विजया’ का व्रत करना चाहिए। इस प्रसंग को पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
https://www.youtube.com/live/TmjQRp1Rd9A?si=_8Job4BvAfWt4NPL
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https://www.instagram.com/reel/DUfKE22iqOh/?igsh=MWFhempkYnRnczJteg==
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Last 10 seats Available only So Book Fast
🌸 *जगन्नाथ पुरी यात्रा 2026* 🌸
✨ पुरुषोत्तम मास में पुरुषोत्तम क्षेत्र परिक्रमा विशेष
📍 30 से अधिक तीर्थ स्थानों के दर्शन
🚆 AC / Non-AC ट्रेन
🏨 AC / Non-AC रूम
🚌 AC बस (आवश्यकतानुसार)
🍛 प्रतिदिन 3 बार स्वादिष्ट प्रसादम्
🎶 कथा • कीर्तन
🤝 भक्तों का दिव्य संग
🌟 केवल 4 वर्ष में एक बार आने वाला विशेष अवसर
आयोजक:
*Chalo Tirthayatra (Gaurangas Group)*
🍛🚌 पुरी – भोजन व स्थानीय यात्रा: ₹5000
(रूम व ट्रेन का चार्ज आपकी पसंद के अनुसार अतिरिक्त रहेगा)
📞 संपर्क:
7600156255
उद्धव दास
हरे कृष्णा 🙏
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🌸 मायापुर & जगन्नाथ पुरी यात्रा 2026 🌸
✨ पुरुषोत्तम मास में पुरुषोत्तम क्षेत्र परिक्रमा विशेष
📍 65 से अधिक तीर्थ स्थानों के दर्शन
🚆 AC / Non-AC ट्रेन
🏨 AC / Non-AC रूम
🚌 AC बस (आवश्यकतानुसार)
🍛 प्रतिदिन 3 बार स्वादिष्ट प्रसादम्
🎶 कथा • कीर्तन
🤝 भक्तों का दिव्य संग
🌟 केवल 4 वर्ष में एक बार आने वाला विशेष अवसर
आयोजक:
Chalo Tirthayatra (Gaurangas Group)
🍛🚌 मायापुर – भोजन व स्थानीय यात्रा: ₹5500
🍛🚌 पुरी – भोजन व स्थानीय यात्रा: ₹5000
💰 प्रारंभिक पैकेज
AC रूम – ₹16,000 + ट्रेन चार्ज
Non-AC रूम – ₹14,200 + ट्रेन चार्ज
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हरे कृष्णा 🙏
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But if there is one moon in the sky, that is sufficient to... ~HDG Srila Prabhupada
हरे कृष्ण
रविवार, *पापमोचनी एकादशी*
*पारणा:* सोमवार सुबह
6:48 से 9:43 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
7:02 से 9:43 राजकोट, जामनगर, द्वारका
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युधिष्ठिर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की तो वे बोले: ‘राजेन्द्र! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था।’
मान्धाता ने पूछा: भगवन्! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया ये सब बातें मुझे बताइये।
लोमशजी ने कहा: नृपश्रेष्ठ! पूर्वकाल की बात है। अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी। वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे। मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी। मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये। मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी। मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे। रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा। इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये। मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई। जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन्! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये।’
मेघावी बोले: देवी! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो।
अप्सरा ने कहा: विप्रवर! अब तक न जाने कितनी ही संध्याँए चली गयीं! मुझ पर कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये!
लोमशजी ने कहा: राजन्! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे। उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये। उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया। उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी! तू पिशाची हो जा।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली: ‘विप्रवर! मेरे शाप का उद्धार कीजिये। सात वाक्य बोलने या सात पद साथ साथ चलनेमात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है। ब्रह्मन्! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन्! मुझ पर कृपा कीजिये।’
मुनि बोले: भद्रे! क्या करुँ? तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है। फिर भी सुनो। चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी।’ वह शाप से उद्धार करनेवाली तथा सब पापों का क्षय करनेवाली है। सुन्दरी! उसीका व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी।
ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये। उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा: ‘बेटा! यह क्या किया? तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला!’
मेघावी बोले: पिताजी! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है। अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय।
च्यवन ने कहा: बेटा! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा।
पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया। इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये। इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया। ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाचयोनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: राजन्! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है। ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं। यह व्रत बहुत पुण्यमय है।
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🌸 मायापुर & जगन्नाथ पुरी यात्रा 2026 🌸
✨ पुरुषोत्तम मास में पुरुषोत्तम क्षेत्र परिक्रमा विशेष
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🏨 AC / Non-AC रूम
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🌟 केवल 4 वर्ष में एक बार आने वाला विशेष अवसर
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Non-AC रूम – ₹14,200 + ट्रेन चार्ज
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उद्धव दास
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So if my consciousness continues Kṛṣṇa then it will carry me too... ~Srila Prabhupada
विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह परशुरामजी की सोने की प्रतिमा बनवाये। प्रतिमा अपनी शक्ति और धन के अनुसार एक या आधे माशे सुवर्ण की होनी चाहिए। स्नान के पश्चात् घर आकर पूजा और हवन करे। इसके बाद सब प्रकार की सामग्री लेकर आँवले के वृक्ष के पास जाय। वहाँ वृक्ष के चारों ओर की जमीन झाड़ बुहार, लीप पोतकर शुद्ध करे। शुद्ध की हुई भूमि में मंत्रपाठपूर्वक जल से भरे हुए नवीन कलश की स्थापना करे। कलश में पंचरत्न और दिव्य गन्ध आदि छोड़ दे। श्वेत चन्दन से उसका लेपन करे। उसके कण्ठ में फूल की माला पहनाये। सब प्रकार के धूप की सुगन्ध फैलाये। जलते हुए दीपकों की श्रेणी सजाकर रखे। तात्पर्य यह है कि सब ओर से सुन्दर और मनोहर दृश्य उपस्थित करे। पूजा के लिए नवीन छाता, जूता और वस्त्र भी मँगाकर रखे। कलश के ऊपर एक पात्र रखकर उसे श्रेष्ठ लाजों(खीलों) से भर दे। फिर उसके ऊपर परशुरामजी की मूर्ति (सुवर्ण की) स्थापित करे।
‘विशोकाय नम:’ कहकर उनके चरणों की,
‘विश्वरुपिणे नम:’ से दोनों घुटनों की,
‘उग्राय नम:’ से जाँघो की,
‘दामोदराय नम:’ से कटिभाग की,
‘पधनाभाय नम:’ से उदर की,
‘श्रीवत्सधारिणे नम:’ से वक्ष: स्थल की,
‘चक्रिणे नम:’ से बायीं बाँह की,
‘गदिने नम:’ से दाहिनी बाँह की,
‘वैकुण्ठाय नम:’ से कण्ठ की,
‘यज्ञमुखाय नम:’ से मुख की,
‘विशोकनिधये नम:’ से नासिका की,
‘वासुदेवाय नम:’ से नेत्रों की,
‘वामनाय नम:’ से ललाट की,
‘सर्वात्मने नम:’ से संपूर्ण अंगो तथा मस्तक की पूजा करे।
ये ही पूजा के मंत्र हैं। तदनन्तर भक्तियुक्त चित्त से शुद्ध फल के द्वारा देवाधिदेव परशुरामजी को अर्ध्य प्रदान करे। अर्ध्य का मंत्र इस प्रकार है:
नमस्ते देवदेवेश जामदग्न्य नमोSस्तु ते।
गृहाणार्ध्यमिमं दत्तमामलक्या युतं हरे ॥
‘देवदेवेश्वर! जमदग्निनन्दन! श्री विष्णुस्वरुप परशुरामजी! आपको नमस्कार है, नमस्कार है। आँवले के फल के साथ दिया हुआ मेरा यह अर्ध्य ग्रहण कीजिये।’
तदनन्तर भक्तियुक्त चित्त से जागरण करे। नृत्य, संगीत, वाघ, धार्मिक उपाख्यान तथा श्रीविष्णु संबंधी कथा वार्ता आदि के द्वारा वह रात्रि व्यतीत करे। उसके बाद भगवान विष्णु के नाम ले लेकर आमलक वृक्ष की परिक्रमा एक सौ आठ या अट्ठाईस बार करे। फिर सवेरा होने पर श्रीहरि की आरती करे। ब्राह्मण की पूजा करके वहाँ की सब सामग्री उसे निवेदित कर दे। परशुरामजी का कलश, दो वस्त्र, जूता आदि सभी वस्तुएँ दान कर दे और यह भावना करे कि: ‘परशुरामजी के स्वरुप में भगवान विष्णु मुझ पर प्रसन्न हों।’ तत्पश्चात् आमलक का स्पर्श करके उसकी प्रदक्षिणा करे और स्नान करने के बाद विधिपूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराये। तदनन्तर कुटुम्बियों के साथ बैठकर स्वयं भी भोजन करे।
सम्पूर्ण तीर्थों के सेवन से जो पुण्य प्राप्त होता है तथा सब प्रकार के दान देने दे जो फल मिलता है, वह सब उपर्युक्त विधि के पालन से सुलभ होता है। समस्त यज्ञों की अपेक्षा भी अधिक फल मिलता है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। यह व्रत सब व्रतों में उत्तम है।’
वशिष्ठजी कहते हैं: महाराज! इतना कहकर देवेश्वर भगवान विष्णु वहीं अन्तर्धान हो गये। तत्पश्चात् उन समस्त महर्षियों ने उक्त व्रत का पूर्णरुप से पालन किया। नृपश्रेष्ठ! इसी प्रकार तुम्हें भी इस व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: युधिष्ठिर! यह दुर्धर्ष व्रत मनुष्य को सब पापों से मुक्त करनेवाला है।
Mangal Darshan🙏🙏
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✨ _*જગન્નાથ પુરી અને માયાપુર ધામ યાત્રા 2026*_ ✨
🌺 *પુરુષોત્તમ માસમાં પુરુષોત્તમ ક્ષેત્રની દિવ્ય યાત્રા* 🌺
ચાર વર્ષમાં એકવાર આવતો આ અત્યંત દુર્લભ અને શુભ અવસર!
પવિત્ર પરિક્રમાઓ • રસસભર કથા • ભક્તોનું પાવન સંગ
🎉 *શુભ વિજય એકાદશીના પાવન દિવસે ભવ્ય લોન્ચિંગ* 🎉
📅 યાત્રા તારીખ: *17 મે થી 28 મે 2026*
આ યાત્રામાં અમે 65+ પવિત્ર સ્થળોના દર્શન કરીશું:
🕉️ નવદ્વીપ મંડલ પરિક્રમા
🕉️ શ્રી ક્ષેત્ર પરિક્રમા (જગન્નાથ પુરી ધામ)
🌿 યાત્રાની વિશેષતાઓ:
✅ આરામદાયક AC રૂમ વ્યવસ્થા
✅ દરરોજ 3 વખત શુદ્ધ પ્રસાદ
✅ સંપૂર્ણ AC બસ મુસાફરી
✅ પ્રેરણાદાયક કથા અને આનંદમય કીર્તન
✅ ભક્તિમય મૂવી અને આધ્યાત્મિક આનંદ
✅ ભક્તોનું દિવ્ય સંગ
💰 *રજીસ્ટ્રેશન રકમ: માત્ર ₹4000*
👥 *માત્ર 50 ભક્તો માટે (મર્યાદિત બેઠકો)*
આ માત્ર પ્રવાસ નથી —
આ છે ધામ સેવા, ધામ દર્શન અને આત્મિક ઉન્નતિનો દિવ્ય અવસર.
📞 સંપર્ક કરો:
7600156255 (ઉદ્ધવ દાસ)
9924958709 (ઉગ્રશ્રવ દાસ)
7990200618 (અભય દાસ)
📢 વહેલી તકે નોંધણી કરો!
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We should always pray Nityananda Prabhu... ~Srila Prabhupada